
लखनऊ। यूपी की योगी सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर सोमवार को आयोजित कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य की स्थानांतरण नीति 2026-27 को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है। यह नई नीति मंगलवार से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गई है, जिसके चलते अब सरकारी दफ्तरों में हलचल बढ़ना तय है।
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सचिवालय कर्मियों पर लागू नहीं होगी नीति
इस नीति के दायरे में प्रदेश के लगभग नौ लाख से अधिक राज्य कर्मचारी आएंगे, जो लंबे समय से अपने तबादलों का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि, यह नीति सचिवालय कर्मियों पर लागू नहीं होगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना और आकांक्षी जिलों में मानव संसाधन की कमी को दूर करना है। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से साफ है कि अब केवल परफॉरमेंस और नीतिगत नियमों के आधार पर ही कुर्सियां बदलेंगी।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकृत नई स्थानांतरण नीति के तहत तबादलों की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि, सभी प्रकार के स्थानांतरण 31 मई तक अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं। इस वर्ष की नीति में समूह ‘क’ और ‘ख’ के प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के लिए 20 प्रतिशत तक के तबादले करने का प्रावधान किया गया है।
वहीं, समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इस 10 फीसदी की सीमा के भीतर ही प्रदेश के करीब 9 लाख कर्मचारी शामिल होंगे। नीति के अनुसार, समूह ‘क’ और ‘ख’ के उन अधिकारियों का तबादला प्राथमिकता पर किया जाएगा जिन्होंने एक ही जिले में 3 साल का सेवाकाल पूरा कर लिया है। इसके अतिरिक्त, किसी भी मंडल में तैनाती की अधिकतम अवधि 7 साल तय की गई है। हालांकि, विभागाध्यक्ष और मंडलीय कार्यालयों में बिताए गए समय को इस 7 साल की अवधि में नहीं गिना जाएगा, जो अधिकारियों के लिए एक तकनीकी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
मेरिट बेस्ड ट्रांसफर सिस्टम पर जोर
सरकार ने इस बार मेरिट बेस्ड ट्रांसफर सिस्टम पर विशेष जोर दिया है। समूह ‘ख’ और ‘ग’ के कर्मचारियों के तबादले यथासंभव इसी ऑनलाइन और योग्यता आधारित प्रणाली के माध्यम से किए जाएंगे, ताकि भ्रष्टाचार और सिफारिशी संस्कृति पर लगाम लगाई जा सके। समूह ‘ग’ के लिए पटल और क्षेत्र परिवर्तन के संबंध में वर्ष 2022 के पुराने आदेशों को ही प्रभावी रखा गया है। नीति में मानवीय दृष्टिकोण को भी प्रमुखता दी गई है।
विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को बड़ी रियायत प्रदान की गई है। सरकार ने व्यवस्था की है कि, ऐसे कर्मचारियों की तैनाती उनके द्वारा मांगे गए विकल्पों के आधार पर उन स्थानों पर की जाएगी जहां बच्चों की उचित चिकित्सा और देखभाल की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों। इसके साथ ही, जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में केवल दो साल का समय शेष है, उन्हें उनके गृह जिले में तैनाती देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा, ताकि वे अपने भविष्य की योजनाएं सुचारू रूप से बना सकें।
प्रशासनिक पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने कड़े नियम भी लागू किए हैं। समूह ‘क’ के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही, यदि किसी अधिकारी का पद केवल मंडल स्तर पर ही है, तो उन्हें उनके गृह मंडल में भी तैनाती नहीं दी जाएगी।
मनचाहे स्थान पर तबादला पा सकेंगे पति-पत्नी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि, यदि पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं, तो उन्हें विकल्प के आधार पर एक ही स्थान पर या मनचाहे स्थान पर तबादले की सुविधा दी जाएगी, बशर्ते वहां पद रिक्त हो। 31 मई की समय सीमा बीतने के बाद यदि किसी अधिकारी का तबादला अपरिहार्य परिस्थितियों में करना पड़ता है, तो इसके लिए संबंधित विभागीय मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री का लिखित अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। यह प्रावधान बिचौलियों और अनावश्यक तबादला उद्योगों को रोकने के लिए किया गया है।
कैबिनेट ने केवल तबादला नीति ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को दस खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की ओर भी एक बड़ा कदम बढ़ाया है। योगी कैबिनेट ने ‘वन ट्रिलियन डॉलर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम’ को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत प्रदेश में कुल 150 ‘सीएम फेलो’ नियुक्त किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में एक आर्थिक विकास विश्लेषक और एक डेटा विश्लेषक की तैनाती होगी, जो जिला स्तर पर चल रही योजनाओं की सघन मॉनिटरिंग करेंगे और आर्थिक रणनीति बनाने में प्रशासन की मदद करेंगे।
खाली पड़े पदों को भरने की तैयारी तेज
इन पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तय की गई है और चयनित युवाओं को 50 हजार रुपये प्रति माह का मानदेय दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार द्वारा घोषित यूपी के 8 आकांक्षी जिलों और 34 जिलों के 100 आकांक्षी विकासखंडों में खाली पड़े सभी पदों को इस तबादला नीति के जरिए शत-प्रतिशत भरने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विकास की दौड़ में पिछड़े इलाकों को मुख्यधारा में लाया जा सके।
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