संजय दत्त की फिल्म ‘आखिरी सवाल’ का ट्रेलर रिलीज, दिखा एक्टर का सबसे दमदार रूप

अपनी दमदार एक्टिंग से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बना चुके संजय दत्त की फिल्म ‘आखिरी सवाल’ का ट्रेलर रिलीज़ हो गया है। यह फिल्म आरएसएस से जुड़ी कुछ ऐतिहासिक घटनाओं पर गंभीर सवाल उठाती है। ये फिल्म महात्मा गांधी की हत्या, अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराने और इमरजेंसी में RSS के कथित तौर पर शामिल होने जैसे मुद्दों पर आधारित है।

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

आपको बता दें कि, भारतीय सिनेमा में जब भी राजनीति और इतिहास से जुड़ी फ़िल्में बनती हैं, तो अक्सर विवाद और बहस भी शुरू हो जाती है।  कुछ ऐसा ही अब संजय दत्त की अपकमिंग फिल्म ‘आखिरी सवाल’  के साथ हो रहा है। इस फिल्म के रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया इसे लेकर बहस छिड़ गई है।

aakhri sawaal

दरअसल, फिल्म ने देश के सबसे संवेदनशील मुद्दों को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा कर दिया है। लंबे समय के इंतजार के बाद फिल्म का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है, जो न केवल संजय दत्त के एक नए अवतार को पेश करता है, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कार्यप्रणाली और इतिहास से जुड़े कई असुविधाजनक सवालों पर से पर्दा उठाने का दावा करता है।

ट्रेलर के सामने आते ही इसकी चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि इसमें महात्मा गांधी की हत्या, आपातकाल और बाबरी मस्जिद विध्वंस जैसे उन जख्मों को कुरेदा गया है, जिन्हें लेकर देश की राजनीति हमेशा दो ध्रुवों में बंटी रही है। फिल्म के लगभग तीन मिनट के इस ट्रेलर की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के उस ऐतिहासिक और विवादित ऐलान से होती है, जिसने देश में आपातकाल की नींव रखी थी।

बाबरी विध्वंस से जुड़ी फिल्म

वहां से कहानी की कड़ियां जुड़ना शुरू होती हैं और सीधे 1992 के उस मंजर पर जाकर टिकती हैं, जिसने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी थी। ट्रेलर का सबसे प्रभावशाली और चर्चा में रहने वाला हिस्सा वह है, जहां एक तीखा सवाल पूछा जाता है कि, यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वास्तव में एक शांत और अनुशासित समाज सेवी संगठन है, तो फिर बाबरी मस्जिद विध्वंस के उस दिन हजारों की संख्या में लोग गुंबद पर क्यों चढ़े थे?

यह एक ऐसा सवाल है जो फिल्म की मूल संवेदना और इसके शीर्षक ‘आखिरी सवाल’ को सार्थक करता नजर आता है। फिल्म का यह ट्रेलर साफ संकेत दे रहा है कि यह केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि एक खास विचारधारा और ऐतिहासिक घटनाओं के बीच के द्वंद्व को पर्दे पर उतारने की एक निडर कोशिश है। संजय दत्त इस फिल्म में एक प्रोफेसर की भूमिका निभा रहे हैं, जो अपनी बौद्धिक क्षमता और तर्कों से आरएसएस के खिलाफ उठने वाले आरोपों और सवालों का बेबाकी से जवाब देते दिखाई देते हैं।

बेहद संजीदा है एक्टर के लुक और संवाद

ट्रेलर में संजय दत्त का लुक और उनके संवाद बोलने का तरीका बेहद संजीदा है, जो उनके पिछले कुछ वर्षों के एक्शन हीरो वाले किरदारों से बिल्कुल अलग है। फिल्म में न केवल दक्षिणपंथी बल्कि वामपंथी विचारधाराओं के टकराव को भी बखूबी फिल्माया गया है। निर्देशक अभिजीत मोहन वारंग, जो पहले ही अपनी कलात्मकता के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं, उन्होंने इस कहानी को बेहद बारीकी और बिना किसी डर के परोसने का साहस दिखाया है। ट्रेलर को देखकर यह स्पष्ट है कि फिल्म में सिस्टम और विचारधारा के बीच के उस धुंधले क्षेत्र को छूने की कोशिश की गई है, जिसे अक्सर मुख्यधारा की फिल्में छूने से कतराती रही हैं।

ट्रेलर में दिखाया गया संवाद और दृश्य निर्माण बेहद प्रभावशाली हैं। बाबरी मस्जिद विध्वंस और गांधी हत्या जैसे प्रसंगों को जिस तरह से जोड़ा गया है, वह दर्शकों के मन में कई जिज्ञासाएं पैदा करता है। फिल्म में संजय दत्त के साथ अमित साध, समीरा रेड्डी, नीतू चंद्रा और त्रिधा चौधरी जैसे कलाकार भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

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विशेषकर अमित साध और समीरा रेड्डी के किरदारों को लेकर ट्रेलर में जो रहस्य बना हुआ है, वह फिल्म की पटकथा को और भी मजबूत बनाता है। नमाशी चक्रवर्ती का अभिनय भी इस गंभीर ड्रामा में एक नई ताजगी भरता हुआ दिखाई दे रहा है। ट्रेलर के हर फ्रेम में एक तरह का तनाव और गंभीरता महसूस की जा सकती है, जो यह बताती है कि ‘आखिरी सवाल’ महज़ एक कमर्शियल फिल्म नहीं बल्कि एक वैचारिक सिनेमा होने वाला है।

रिलीज डेट में कई बार हुआ बदलाव

गौरतलब है कि इस फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड (CBFC) में भी काफी खींचतान देखने को मिली थी। अपनी संवेदनशील विषय वस्तु और राजनीतिक संदर्भों के कारण फिल्म लंबे समय तक बोर्ड की जांच के घेरे में फंसी रही, जिसके कारण इसकी रिलीज तारीख में कई बार बदलाव करना पड़ा, लेकिन अब सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद फिल्म निर्माताओं ने इसकी रिलीज का रास्ता साफ कर दिया है।

यह फिल्म आगामी 15 मई 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिल्म की रिलीज के बाद देश में एक नई बहस छिड़ सकती है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर उन घटनाओं पर सवाल उठाए गए हैं जो आज भी भारत के राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हैं। फिल्म के तकनीकी पक्ष की बात करें तो ट्रेलर का बैकग्राउंड स्कोर और सिनेमैटोग्राफी काफी प्रभावशाली है। काले-सफेद फुटेज और आज के समय के दृश्यों का संयोजन इतिहास और वर्तमान के बीच के पुल को बखूबी दर्शाता है।

दर्शकों के सामने छोड़ा बड़ा सवाल

निर्देशक अभिजीत मोहन वारंग ने जिस ईमानदारी और निडरता के साथ इस विषय को चुना है, वह ट्रेलर में साफ झलकता है। उन्होंने किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय सवालों को दर्शकों के सामने छोड़ने की कोशिश की है, जो कि एक अच्छे सिनेमा की पहचान मानी जाती है। ट्रेलर के संवादों में जो वजन है, वह निश्चित रूप से दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगा और सिनेमाघरों तक खींचने में कामयाब होगा।

 

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