युद्ध विराम के बाद भी होर्मुज़ स्ट्रेट पर खतरनाक सन्नाटा, पशोपेश में जहाज, क्या टोल वसूलेगा ईरान

ईरान। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में युद्धविराम की घोषणा के बाद भी वैश्विक नौवहन और ऊर्जा बाज़ार में जिस तरह की अनिश्चितता और तनाव का माहौल बना हुआ है, वह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की पेचीदगियों को बखूबी बयां करता है। खाड़ी क्षेत्र में दो सप्ताह के युद्धविराम की खबर ने भले ही कागजों पर शांति की उम्मीद जगाई हो, लेकिन समुद्र की लहरों पर आज भी डर और आशंकाओं का साया गहराया हुआ है।

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युद्धविराम पर सवाल

ईरान की नौसेना की तरफ से जारी हालिया चेतावनी ने इस युद्धविराम की सफलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी नौसेना ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जो भी जहाज़ बिना उनकी अनुमति के इस संकरे जलमार्ग को पार करने का प्रयास करेगा, उसे न केवल रोका जाएगा बल्कि निशाना बनाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा।

The Strait of Hormuz

शिपिंग ब्रोकरेज फर्म एसएसवाई द्वारा बीबीसी वेरिफाई के साथ साझा की गई यह जानकारी बताती है कि युद्धविराम के बावजूद ईरान ने इस सामरिक मार्ग पर अपनी पकड़ ढीली नहीं की है और वह अब भी इस क्षेत्र में अपनी संप्रभुता और नियंत्रण को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

मंगलवार शाम को जब दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी, तो मुख्य शर्त यही थी कि, इस रास्ते से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन हकीकत यह है कि, युद्धविराम के बाद से अब तक बहुत कम जहाज़ ही यहां से गुजरने की हिम्मत जुटा पाए हैं। यह संकरा जलमार्ग अब केवल एक भौगोलिक रास्ता नहीं रह गया है, बल्कि यह अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चलने वाले दशकों पुराने संघर्ष का सबसे नया और खतरनाक केंद्र बन गया है।

कमजोर हुई सप्लाई चेन

ईरान ने प्रभावी रूप से दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बाधित कर दिया है, जिससे न केवल तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी गहरा झटका लगा है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि, दुनिया की लगभग 20 फ़ीसदी तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई इसी होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुजरती है। पिछले पांच हफ़्तों से जारी इस गतिरोध ने अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन की कमजोरी को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है। यह स्पष्ट हो गया है कि, दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और बड़े उद्योगों की स्थिरता इस एक संकरे मार्ग पर किस हद तक निर्भर है।

ऊर्जा संसाधनों के अलावा, यह क्षेत्र उन रसायनों की ढुलाई के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है जिनका उपयोग आधुनिक तकनीक के आधार स्तंभों जैसे माइक्रोचिप्स, जीवन रक्षक दवाइयों और कृषि के लिए आवश्यक उर्वरकों के निर्माण में होता है। यही कारण है कि यहां होने वाली छोटी सी हलचल भी दुनिया के कोने-कोने में कीमतों और उत्पादन को प्रभावित करती है। हालांकि युद्धविराम की खबर आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन शिपिंग विशेषज्ञों का मानना है कि इसे सामान्य स्थिति की बहाली मानना एक बड़ी भूल होगी।

अनिश्चितता का सामना कर रहे जहाज मालिक

वेसपुच्ची मैरिटाइम के प्रमुख लार्स जैनसन का आकलन है कि, ज्यादातर शिपिंग कंपनियां फिलहाल सुरक्षा गारंटी के अभाव में इस रास्ते से दूरी बनाए हुए हैं। कंपनियां यह जानना चाहती हैं कि, ईरान द्वारा तय की गई शर्तें क्या हैं और क्या उन्हें वहां से गुजरने के लिए वास्तव में कोई सुरक्षा घेरा प्रदान किया जाएगा। फिलहाल इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं, जिसके कारण जहाज़ मालिक भारी अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

डेटा विश्लेषण के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बाद भारतीय समयानुसार 8 अप्रैल की शाम तक केवल तीन कैरियर जहाज़, एनजी अर्थ, डेटोना बीच और हाई लॉन्ग1—ही इस जलमार्ग को पार करने में सफल रहे। मरीन ट्रैफ़िक के शिप ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि, इन जहाजों ने भी सामान्य मार्ग के बजाय ईरान के तट के करीब उत्तरी मार्ग लिया।

संघर्ष शुरू होने से पहले इस स्ट्रेट से रोजाना औसतन 138 जहाज गुजरते थे, जिसकी तुलना में वर्तमान संख्या नगण्य है। यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या इन तीन जहाजों का गुजरना युद्धविराम का परिणाम था या उन्हें पहले से ही कोई विशेष अनुमति प्राप्त थी। शिपिंग एनालिस्ट कंपनी कैप्लर की एना सुबासिक का भी यही मानना है कि, अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि, बड़े पैमाने पर आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। जहाज़ों के क्रू और कप्तान अब भी वहां जाने से डर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि समझौते के बावजूद उन पर हमला हो सकता है या उन्हें बंधक बनाया जा सकता है।

समुद्र में बिछी माइंस

लॉ़यड्स लिट के एडिटर-इन-चीफ़ रिचर्ड मीड ने इस स्थिति को जहाज़ मालिकों के लिए बेहद ख़तरनाक करार दिया है। उनके अनुसार, वर्तमान में करीब 800 जहाज़ कई हफ्तों से वहां फंसे हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर माल से पूरी तरह लदे हुए हैं। इन फंसे हुए टैंकरों को बाहर निकालना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन सुरक्षा जोखिम इतने अधिक हैं कि, कोई भी कदम उठाना चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा, समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों का खतरा एक अलग ही स्तर की चिंता पैदा कर रहा है।

The Strait of Hormuz

इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग के महासचिव थॉमस काज़ाकोस ने चेतावनी दी है कि, जब तक समुद्र को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक नाविकों को वहां भेजना उनके जीवन के साथ खिलवाड़ करने जैसा होगा। इन भौतिक खतरों के साथ-साथ अब एक नई आर्थिक और कानूनी पेचीदगी भी सामने आ रही है और वह है ईरान द्वारा मांगा जाने वाला संभावित टोल या शुल्क।

प्रभावित हुई सप्लाई चेन

खबर ये भी आ रही है कि, ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स वसूलने की योजना बना रहा है। यदि शिपिंग कंपनियां ईरान को इस तरह का कोई भुगतान करती हैं, तो यह सीधे तौर पर अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन हो सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि, किसी भी ऐसी संस्था या संगठन को पैसा देना जो प्रतिबंध सूची में शामिल है, कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध बन सकता है। ऐसे में जहाज़ मालिकों के सामने दोहरी चुनौती है, एक तरफ समुद्री खतरा और दूसरी तरफ कानूनी प्रतिबंधों की मार।

भारत और मलेशिया जैसे कुछ देशों ने कूटनीतिक रास्तों से अपने जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया है, लेकिन अन्य देशों के लिए स्थिति अब भी बहुत जटिल है। तेल की कीमतों में आई हालिया गिरावट भले ही एक सकारात्मक संकेत हो, लेकिन रिचर्ड मीड का कहना है कि यह केवल एक तात्कालिक प्रतिक्रिया है। जब तक तेल की पूरी सप्लाई चेन फिर से सुचारू नहीं हो जाती, तब तक वैश्विक ऊर्जा बाज़ार स्थिर नहीं हो सकता।

होर्मुज़ स्ट्रेट की यह अनिश्चितता न केवल व्यापार बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के भविष्य के लिए भी एक बड़ी परीक्षा साबित हो रही है, जहां हर बीतता दिन दुनिया को एक बड़े आर्थिक संकट की ओर धकेल सकता है।

 

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