
लखनऊ। कुछ लोग प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं और उन्हें महंगा व वसूली का केंद्र बताते हैं, जबकि ये स्कूल अभिभावकों को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनका बोझ हल्का कर रहे हैं। हमें तो प्राइवेट स्कूलों का एहसानमंद होना चाहिए कि,आजकल बच्चा पैदा करके सिर्फ दो-तीन साल बड़ा करने के अलावा और कोई जिम्मेदारी माता-पिता पर नहीं रह गई है।
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जैसे कि ड्रेस कहां से लानी है, किताबें किस दुकान या प्रकाशक से खरीदनी हैं, बाल किस सैलून में कटवाने हैं, जूते-मोजे, बनियान-कच्छा कौन सी दुकान से लेना है, ये सब स्कूल पहले से तय करके बता देते हैं। यानी आपको कोई झंझट ही नहीं उठानी पड़ती। बस एडमिशन करा दीजिए और फीस भर दीजिए, बाकी सारी चिंता स्कूल प्रबंधन संभाल लेता है।

पहले के समय में तो किताब, ड्रेस, जूता-मोजा सब कुछ खुद ही चुनना और खरीदना पड़ता था, लेकिन अब प्राइवेट स्कूलों ने पूरा सिस्टम इतना आसान बना दिया है कि, बच्चा पैदा करने के अलावा आपको कुछ नहीं करना पड़ता। सिर्फ समय-समय पर फीस और खर्चा देते रहिए। मैं तो कहता हूं कि, बच्चा पैदा कराने की जिम्मेदारी भी प्राइवेट स्कूल प्रबंधन को ही ले लेनी चाहिए। वे तय कर दें कि किस अस्पताल में डिलीवरी होगी और कौन से डॉक्टर बच्चे को जन्म देंगे।
ऐसा हो जाए तो अभिभावकों के पास सिर्फ एक ही काम रह जाएगा, शादी करके अपना नाइटवर्क पूरा कर लेना। बाकी सब स्कूल देख लेगा और अगर स्कूल वाले शादी का काम भी अपने हाथ में ले लें तो फिर तो सोने पर सुहागा हो जाएगा। वे पहले ही तय कर दें कि, शादी कहां और किस पंडाल में होगी, उसे सजाएगा कौन, फूल कहां से आएंगे, हॉल कौन सा बुक करना है।
शादी से लेकर स्कूल की पढ़ाई तक सब कुछ स्कूल प्रबंधन संभाल लेगा। सच कहें तो हमारी सरकार और शिक्षा व्यवस्था बहुत ही महान और जनहितैषी है। पहले लूटपाट के लिए बदमाश हथियारों का इस्तेमाल करते थे, अब सरकारी स्कूलों को कमजोर करके प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ये लोग बिना किसी हथियार के ही सब कुछ आसानी से कर लेते हैं।



