सहकार भारती की बैठक में फूंका गया सहकारिता का मंत्र, आर्थिक मजबूती की नई रणनीति पर मंथन

वाराणसी। उत्तर प्रदेश सहकार भारती की दो दिवसीय प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक का शुभारंभ आज वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित श्री धर्मसंघ शिक्षा मंडल के सभागार में हुआ। कार्यकम का उद्घाटन पूर्वी क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह डॉ. वीरेंद्र जायसवाल ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर भारत माता एवं सहकार भारती के संस्थापक स्व. लक्ष्मण राव इनामदार के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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सहकारिता की उपयोगिता पर प्रकाश

कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री दीपक चौरसिया, श्रीधर्मसंघ शिक्षा मंडल के सचिव पंडित जगजीतन पाण्डेय, सहकार भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील गुप्ता, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार सिंह एवं प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार सिंह ने राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय पाचपोर समेत सभी अतिथियों एवं विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों का स्वागत किया और बैठक की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने सहकारिता के लक्ष्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि, इस प्रकार की बैठकों से सहकारिता को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सहयोग मिलता है। तत्पश्चात प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और विगत 6 महीने में सहकार भारती द्वारा किए गए कार्यों से सबको अवगत कराया।

मुख्य अतिथि पूर्वी क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह डॉ. वीरेंद्र जायसवाल ने सहकारिता आंदोलन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिकता और संस्कार अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने सहकारिता को समाज निर्माण का सशक्त माध्यम बताते हुए छोटे-छोटे समूहों के माध्यम से बड़े लक्ष्य हासिल करने का आह्वान किया।

 सहकारिता को राम के व्यक्तित्व से जोड़ा

कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि के तौर पर उपस्थित राष्ट्रीय महामंत्री दीपक चौरसिया ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए सहकारिता मॉडल को वर्तमान चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया। उन्होंने सहकारिता को भगवान श्रीराम के व्यक्तित्व से जोड़ते हुए बताया कि, कैसे उन्होंने दुर्गम क्षेत्र और विपरीत परिस्थितियों में माता सीता की तलाश में वानर राज समेत वनवासियों को एकत्र किया। मात्र 3 दिन में सभी के सहयोग से सेतु तैयार हो गया, जिसमें गिलहरी ने अपनी समर्थनुसार योगदान दिया था, इसलिए समाज के हर वर्ग को सहकारिता से जुड़ना चाहिए।

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उन्होंने आगे कहा कि, सहकारिता न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन भी है, जो रोजगार सृजन और समावेशी विकास का आधार बन सकता है। उन्होंने सहकारी संस्थाओं में आपसी सामंजस्य बनाए रखने पर जोर दिया। पैक्स, मत्स्य, एफपीओ, दुग्ध, एसएचजी एवं अन्य संस्थाओं के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए वित्तीय प्रगति करने की जरूरत बताई।

बारीकियों पर हुई चर्चा

दीपक ने कहा कि, सहकार भारती छोटे-छोटे प्रयासों को जोड़कर बड़े परिवर्तन का माध्यम बन रही है और समाज के हर वर्ग को इससे जुड़ना चाहिए। श्री धर्मसंघ शिक्षा के सचिव पंडित जगजीतन पांडे ने स्तुति से शुरू अपने संबोधन में वर्तमान समय में सहकारिता की  आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि, आर्थिक समृद्धि का मार्ग संगठन और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

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उद्घाटन सत्र के अंत में प्रदेश उपाध्यक्ष डी.पी. पाठक ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया और आगामी तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों के मार्गदर्शन को आत्मसात करने का आह्वान किया। बैठक में विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने बारीकियां और संगठनात्मक रणनीति निर्माण की उपयोगिता बताई।

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कार्यक्रम के दूसरे सत्र में तकनीकी सत्रों में प्राकृतिक खेती पर भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह ने खेती में गौ से मिलने वाले गोबर व मूत्र के समुचित उपयोग पर प्रकाश डाला।  वहीं, नाबार्ड की सोनिका राणा ने सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन और वित्त पोषण पर बारीकियों से अवगत कराया।

बैठकों में काम और दायित्व पर विचार-विमर्श 

इसके बाद कई और बैठकें हुईं। जैसे कि प्रदेश के सभी जिला एवं महानगर अध्यक्ष तथा प्रदेश प्रकोष्ठ प्रमुखों की बैठक, जिसकी अध्यक्षता डॉ. अरुण सिंह ने की। महिला प्रमुखों और एसएचजी प्रकोष्ठ प्रमुखों की बैठक की अध्यक्षता मीनाक्षी राय द्वारा की गई। सभी जिला महामंत्रियों की बैठक का नेतृत्व राष्ट्रीय महामंत्री दीपक चौरसिया और प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे ने किया। सभी संगठन प्रमुख और विभाग संयोजक की बैठक प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील गुप्ता के नेतृत्व में हुई।

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इन बैठकों में सभी के कार्य और दायित्व पर विमर्श किया गया। प्रदेश की सहकारी समितियों की संस्थागत सदस्यता विभिन्न प्रकोष्ठों से कराने के लिए प्रदेश उपाध्यक्ष डीपी पाठक ने विचार प्रस्तुत किए। बैठक का संचालन हरेंद्र सिंह, कैलाश निषाद, लोकेंद्र सिंह और आनंद पाण्डेय ने किया।

 

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