
लखनऊ। आर्थिक अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मोहम्मद इकबाल को भगोड़ा घोषत करा दिया है। मामले में सुनवाई कर रहे जज राहुल प्रकाश ने सख्त रुख अपनाते हुए इकबाल से जुड़ी तीन बड़ी चीनी मिलों को भी जब्त करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इक़बाल को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट (FEOA) के तहत आधिकारिक तौर पर फरार आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया।
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हर दल में था इक़बाल का प्रभाव
मोहम्मद इकबाल की कहानी सत्ता की हनक और अवैध व्यापार के बल पर खड़े किए गए एक विशाल साम्राज्य की दास्तान है। एक समय था जब उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से, खासकर सहारनपुर में इकबाल की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था। उसने खनन के कारोबार में कदम रखते ही नियमों को ताक पर रखकर ऐसी दौलत बटोरी कि देखते ही देखते वह अरबों की संपत्तियों का मालिक बन गया। उसके रसूख का आलम यह था कि, प्रदेश में सरकार चाहे किसी भी दल की रही हो, इकबाल का प्रभाव कभी कम नहीं हुआ।
उसके आलीशान आवास पर सूबे के बड़े मंत्रियों, विधायकों और आला अधिकारियों का जमावड़ा लगा रहता था। उसने शिक्षा से लेकर उद्योग जगत तक अपनी जड़ें फैला ली थीं, लेकिन इस पूरे साम्राज्य की नींव अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग के काले पैसों पर टिकी थी, फिर वक्त ने करवट तब ली, जब साल 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद जांच एजेंसियों ने इकबाल के काले कारनामों की फाइलें खोलनी शुरू कीं।
2024 में कुर्क हुई अवैध यूनिवर्सिटी
पुलिस रिकॉर्ड में उसे एक संगठित गैंग का लीडर घोषित किया गया और उसके खिलाफ दर्जनों मुकदमे दर्ज हुए। जैसे ही कानून का शिकंजा कसना शुरू हुआ, इकबाल के बुरे दिन शुरू हो गए। प्रवर्तन निदेशालय ने जब उसकी शेल कंपनियों और फर्जी निवेश के जाल को खंगाला, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में पाया गया कि, इकबाल ने सैकड़ों फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की थी। इसी जांच के दौरान साल 2024 में ईडी ने उसकी एक बड़ी अवैध यूनिवर्सिटी को भी कुर्क कर लिया था, जिसका संचालन उसके बेटों और भाई महमूद अली के जरिए किया जा रहा था।
जब इकबाल को लगा कि, अब उसका जेल जाना तय है, तो वह गुपचुप तरीके से देश छोड़कर फरार हो गया। हालांकि, उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसके भाई महमूद अली और उसके चारों बेटों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया, लेकिन मुख्य सरगना इकबाल विदेश में बैठकर कानूनी प्रक्रिया को चुनौती देता रहा।
तीन चीनी मिलें भी जब्त
कोर्ट ने उसे कई बार समन जारी किए और पेश होने के अवसर दिए, लेकिन उसने हर बार जांच में सहयोग करने के बजाय दूरी बनाए रखी। इसी व्यवहार को आधार बनाते हुए अदालत ने अब उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया है। इस कानून के तहत किसी भी अपराधी की संपत्ति को दोषसिद्धि से पहले ही सरकारी कब्जे में लिया जा सकता है, जो फरार अपराधियों के लिए सबसे बड़ी सजा मानी जाती है।
अब जब्त की जाने वाली इन तीन चीनी मिलों की कीमत बाजार में 1000 करोड़ रुपये से अधिक है। ईडी की लखनऊ जोनल ऑफिस की इस कामयाबी ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे सात समंदर पार भी क्यों न बैठा हो, उसकी आर्थिक रीढ़ को पूरी तरह तोड़ा जा सकता है। यह फैसला उन सभी सफेदपोश अपराधियों के लिए एक चेतावनी है जो समझते हैं कि वे देश का पैसा लेकर या अवैध संपत्तियां बनाकर विदेश में चैन की नींद सो सकते हैं।
समाप्त हुआ आतंक
सरकार अब इन मिलों को अपने नियंत्रण में लेकर आगे की नीलामी या संचालन की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिससे यह संदेश जाएगा कि जनता की और प्राकृतिक संसाधनों की लूट से बनाई गई संपत्ति अंततः जनता के ही काम आएगी। मोहम्मद इकबाल के इस पतन ने सहारनपुर और आसपास के इलाकों में उसके आतंक और प्रभाव को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। जांच एजेंसियां अब उसके अंतरराष्ट्रीय ठिकानों का पता लगाने और उसे वापस भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण की कोशिशों में जुट गई हैं।
फिलहाल, 1000 करोड़ की संपत्तियों पर सरकारी मोहर लगने की इस खबर ने पूरे प्रदेश के राजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था की उस ताकत को दर्शाता है, जहां देर भले ही हो जाए, लेकिन कानून के लंबे हाथ अपराधियों तक पहुंच ही जाते हैं। इकबाल की यह बर्बादी उस अपराध जगत के लिए एक सबक है जो सत्ता और पैसे के दम पर खुद को संविधान से ऊपर समझने की भूल कर बैठता है।
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