
टनकपुर। उत्तराखंड की धरती से संचालित होने वाली पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा का रविवार को टनकपुर से विधिवत शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं उपस्थित रहे और उन्होंने शारदा पर्यटक आवास गृह से यात्रा के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर विदा किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सभी श्रद्धालुओं के लिए सकुशल और सफल यात्रा की कामना की।
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छोलिया नृत्य से हुआ सीएम धामी का स्वागत
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का स्वागत उत्तराखंड की पारंपरिक लोकनृत्य शैली छोलिया के माध्यम से किया गया, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। इसके अतिरिक्त पुलिस विभाग की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्वयं आगे बढ़कर यात्रियों का अभिनंदन किया।

उन्होंने प्रत्येक श्रद्धालु के गले में रुद्राक्ष की माला पहनाई और भगवान शिव के नाम का पटका भेंट किया। इस दौरान उन्होंने यात्रियों से आत्मीयता से बातचीत भी की, जिससे माहौल भावनात्मक और सौहार्दपूर्ण बना रहा।
आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह यात्रा आध्यात्मिक जागृति, सांस्कृतिक एकजुटता और राष्ट्रीय समरसता की एक जीवंत मिसाल है। उन्होंने कहा कि, इतने कठिन और दुर्गम मार्ग की यह यात्रा हर किसी के भाग्य में नहीं होती, और जिसे भी यह सौभाग्य मिलता है, वह भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा का ही परिणाम है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यात्रा के रास्ते में अनेक कठिनाइयां आ सकती हैं, लेकिन श्रद्धा और धैर्य बनाए रखते हुए ही उनका सामना किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान शिव में अटूट आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए हर मुश्किल रास्ता सहज हो जाता है।
सीमांत क्षेत्रों के विकास से जोड़ा यात्रा को
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में इस यात्रा के आर्थिक और सामाजिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि, कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल आध्यात्मिक अनुभव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में विकास और समृद्धि लाने का एक सशक्त माध्यम भी है।

इस यात्रा के जरिए देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु सीमांत गांवों की समृद्ध परंपराओं, स्थानीय संस्कृति और वहां के जनजीवन से सीधे तौर पर जुड़ते हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने सभी यात्रियों से अपील की कि वे यात्रा के दौरान स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों और वस्तुओं की खरीदारी अवश्य करें, ताकि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिल सके और वहां के कारीगरों व व्यापारियों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचे।
प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की सराहना
कार्यक्रम में सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में देश भर के प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों का जीर्णोद्धार तथा सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है, जिसके चलते भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को एक नई पहचान मिल रही है। भाषण के अंत में उन्होंने एक बार फिर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और भगवान भोलेनाथ से सबकी यात्रा को सुखद व सफल बनाने की प्रार्थना की।
श्रद्धालुओं ने जताया सरकार का आभार
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने भी उत्तराखंड सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं की खुले दिल से प्रशंसा की। इस दल में सातवीं बार कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे श्रद्धालु अनिल कुमार जैन सहित बाकी सभी यात्रियों ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद अदा किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहद उम्दा प्रबंध किए हैं, जिससे उन्हें यात्रा शुरू होने से पहले ही राहत और भरोसे का एहसास हुआ।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुआ स्वागत
शनिवार शाम को टनकपुर पहुंचे यात्रा के पहले दल का स्वागत देवभूमि उत्तराखंड की परंपरा के अनुरूप बड़े धूमधाम से किया गया। इस स्वागत समारोह में छोलिया नृत्य के साथ-साथ पुष्पवर्षा और फूल-मालाओं के जरिए यात्रियों का अभिनंदन किया गया। इसके अलावा श्रद्धालुओं के मनोरंजन और उत्साहवर्धन के लिए एक विशेष सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसमें उत्तराखंड की स्थानीय लोक कलाओं और लोक संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं।
49 यात्री हैं दल में
शारदा पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक मनोज कुमार ने यात्रा से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि पहले दल में एक चिकित्सक सहित कुल 49 तीर्थयात्री शामिल हैं। इनमें 34 पुरुष श्रद्धालु और 15 महिला श्रद्धालु हैं। यह दल देश के विभिन्न राज्यों आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और स्वयं उत्तराखंड के श्रद्धालुओं से मिलकर बना है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता की सुंदर मिसाल पेश करता है।

दल की चिकित्सा व्यवस्था के लिए तमिलनाडु से डॉ. अरुण कुमार को साथ भेजा गया है, जो जरूरत पड़ने पर यात्रियों को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराएंगे। इस दल में सबसे वरिष्ठ यात्री राजस्थान के 68 वर्षीय पुरुषोत्तम खंडेलवाल हैं, जबकि गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्णा दल के सबसे युवा श्रद्धालु के रूप में शामिल हैं। इस तरह यह यात्रा हर आयु वर्ग के लोगों में भगवान शिव के प्रति गहरी और अटूट आस्था को दर्शाती है, जो उम्र की सीमाओं से परे जाकर सभी को एक सूत्र में बांधती है।
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