
जम्मू। मंदिरों के शहर जम्मू ने आज खेल जगत में एक नया इतिहास रच दिया। मूसलाधार बारिश और खराब मौसम के बावजूद, शहर में आयोजित पहली ‘जम्मू इंटरनेशनल मैराथन’ में उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ा। इस मेगा इवेंट की शुरुआत रविवार सुबह एम.ए. स्टेडियम से हुई, जिसे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने खुद भी ट्रैक पर उतरकर प्रतिभागियों के साथ दौड़ लगाई। उनके साथ उनके दोनों बेटे, जहीर और जमीर भी इस ऐतिहासिक दौड़ का हिस्सा बने, जिससे स्थानीय युवाओं में जबरदस्त ऊर्जा देखने को मिली।
वैश्विक भागीदारी और करोड़ों की पुरस्कार राशि
इस अंतरराष्ट्रीय मैराथन को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया था, जिसमें हाफ मैराथन (21 किमी), 10 किमी ‘फिटनेस रन’ और 5 किमी ‘फन रन’ शामिल थी। आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विजेताओं के लिए कुल 1.33 करोड़ रुपये की भारी-भरकम पुरस्कार राशि रखी गई है। इस पहले संस्करण में ही 4,000 से अधिक धावकों ने पंजीकरण कराया, जिनमें जम्मू-कश्मीर के बाहर से आए 1,000 से अधिक प्रतिभागी और केन्या समेत विभिन्न देशों के 90 अंतरराष्ट्रीय एथलीट शामिल थे। फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन और उनकी पत्नी अंकिता कोंवर ने भी मुख्यमंत्री के साथ कदम ताल मिलाई, जबकि अभिनेत्री गुल पनाग और गायक कमल खान ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
आतंकवाद को खेल और एकता से करारा जवाब
मैराथन के दौरान राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी पूरी प्रखरता के साथ उभरा। खेल मंत्री सतीश शर्मा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान और उन ताकतों को एक कड़ा संदेश है जो क्षेत्र में अस्थिरता फैलाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहाँ कुछ लोग आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, वहीं हम पर्यटन, भाईचारे और खेल संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। मंत्री ने डोगरा विरासत का गर्व से जिक्र करते हुए कहा कि हम तूफानों से डरने वाले नहीं, बल्कि लहरों के सामने डटकर खड़े रहने वाले योद्धा हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगामी महीनों में प्रदेश में दो अत्याधुनिक स्टेडियम तैयार किए जाएंगे, जिससे अगले साल जम्मू-कश्मीर में आईपीएल मैचों की मेजबानी का सपना सच हो सकेगा।
कठिन ट्रैक और विदेशी धावकों का अनुभव
पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक एजाज कैसर ने इस दिन को जम्मू के लिए “ऐतिहासिक” करार दिया। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण ट्रैक पर कुछ चुनौतियां जरूर थीं, विशेषकर 500 मीटर की खड़ी चढ़ाई, लेकिन धावकों की मानसिक तैयारी ने इसे आसान बना दिया। केन्या से आए धावक फ्रैंकलिन और एडविन ने जम्मू के आतिथ्य और यहाँ के शांत वातावरण की सराहना की। उन्होंने कहा कि हालांकि मौसम चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सड़क की गुणवत्ता और आयोजन का प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय स्तर का था। यह मैराथन न केवल फिटनेस का प्रतीक बनी, बल्कि इसने जम्मू को वैश्विक पर्यटन और खेल मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है।



