
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी और अदब के शहर लखनऊ में आज से एक ऐसी साहित्यिक और सांस्कृतिक यात्रा शुरू होने जा रही है, जो भारतीय मानस को वीर रस और राष्ट्रवाद से सराबोर कर देगी। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी और ओजपूर्ण कृति ‘रश्मिरथी’ के प्रकाशन के 75 गौरवशाली वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी में तीन दिवसीय रश्मिरथी पर्व का आयोजन किया जा रहा है।
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केन्द्रीय मंत्री शिवराज होंगे शामिल
24 अप्रैल से 26 अप्रैल तक गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होने वाले इस भव्य उत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इस कार्यक्रम में न केवल साहित्य की महक होगी, बल्कि राजनीति और समाज सेवा के दिग्गजों का जमावड़ा भी लगेगा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मौजूद रहेंगे, जो दिनकर के काव्य में छिपे सामाजिक न्याय और शौर्य के दर्शन को जनता के सामने रखेंगे।

यह आयोजन उस महाकाव्य को समर्पित है जिसने कर्ण के चरित्र के माध्यम से समाज के वंचित वर्ग की आवाज को बुलंद किया और युद्ध के मैदान में भी नैतिकता का पाठ पढ़ाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार इस रश्मिरथी पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को यह संदेश देना चाहती है कि, हमारी विरासत केवल पत्थरों और इमारतों में नहीं, बल्कि हमारे साहित्य और विचारों में भी सुरक्षित है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इस आयोजन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि, यह पर्व युवाओं को राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान, संघर्ष और सामाजिक समरसता की अनूठी प्रेरणा देगा। रश्मिरथी के पचहत्तर वर्षों का यह सफर भारतीय साहित्य के उस स्वाभिमान का प्रतीक है, जिसने गुलामी की बेड़ियों से निकले भारत को वैचारिक स्वतंत्रता और वीरता का मार्ग दिखाया था।
भव्य नाटक का मंचन होगा
आयोजन के पहले दिन यानी शुक्रवार, 24 अप्रैल को उद्घाटन सत्र के दौरान रश्मिरथी संवाद नामक एक विशेष स्मारिका का लोकार्पण किया जाएगा। यह स्मारिका दिनकर के लेखन और उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को समेटे हुए है। उद्घाटन के पश्चात एक राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन होगा, जिसमें देश भर के ख्याति प्राप्त विद्वान, आलोचक और साहित्यकार शिरकत करेंगे। इस चर्चा का मुख्य विषय दिनकर के साहित्य में निहित राष्ट्रवाद और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता होगा।
विद्वानों का मानना है कि, आज के दौर में जब वैश्विक स्तर पर वैचारिक टकराव बढ़ रहा है, तब दिनकर की पंक्तियां हमें धैर्य और वीरता के बीच संतुलन बनाना सिखाती हैं। शाम को रश्मिरथी पर आधारित एक भव्य नाटक का मंचन किया जाएगा, जिसमें कर्ण और कृष्ण के संवादों के जरिए जीवन के गूढ़ रहस्यों को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
पर्व का दूसरा दिन, 25 अप्रैल, पूरी तरह से युवा चेतना और आध्यात्मिक जागरण को समर्पित रहेगा। इस दिन ‘स्वामी विवेकानंद के सांस्कृतिक भारत निर्माण में योगदान’ विषय पर एक विशेष परिसंवाद का आयोजन किया गया है। दिनकर की कविताएं जहां पौरुष की बात करती हैं, वहीं विवेकानंद का दर्शन उसे सही दिशा में मोड़ने का मार्ग दिखाता है। इस सत्र के माध्यम से युवाओं को आत्मविश्वास, निस्वार्थ राष्ट्रसेवा और आध्यात्मिक चेतना का पाठ पढ़ाया जाएगा।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान पर चर्चा
वक्ताओं का उद्देश्य यह स्पष्ट करना होगा कि, आधुनिक भारत का निर्माण तभी संभव है जब हमारे पास प्राचीन संस्कार और आधुनिक विचार दोनों हों। शनिवार की सांस्कृतिक संध्या में विवेकानंद के जीवन दर्शन पर आधारित एक प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति होगी, जो दर्शकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करेगी।
आयोजन के समापन दिवस, 26 अप्रैल को भारतीय राजनीति और समाज सुधार के दो स्तंभों लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान पर गंभीर चर्चा होगी। ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा देने वाले तिलक और ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा’ की घोषणा करने वाले अटल बिहारी बाजपेयी के बीच जो वैचारिक सेतु है, उसे इस सत्र में विद्वान जनता के सामने रखेंगे।
समापन सत्र की सबसे भावुक और आकर्षक प्रस्तुति ‘अटल स्वरांजलि’ होगी, जो अटल की प्रसिद्ध कविताओं पर आधारित एक संगीतमय नृत्य नाटिका है। इसके साथ ही लोकमान्य तिलक के जीवन संघर्षों पर आधारित एक नाटक का मंचन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। यह समापन सत्र न केवल श्रद्धांजलि होगा, बल्कि भविष्य के भारत के लिए एक विजन डॉक्यूमेंट की तरह पेश किया जाएगा।
सीएम योगी भी करेंगे शिरकत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस आयोजन में शामिल होना यह दर्शाता है कि, उत्तर प्रदेश सरकार साहित्य को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक सशक्त माध्यम मानती है। ‘रश्मिरथी’ के 75 साल पूरे होना इस बात का प्रमाण है कि श्रेष्ठ साहित्य कभी पुराना नहीं होता।

कर्ण का संघर्ष, उसकी दानवीरता और उसका न्याय के लिए खड़ा होना आज भी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो जीवन में चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस तीन दिवसीय महाकुंभ में शामिल होने वाले लोग न केवल कविता का आनंद लेंगे, बल्कि वे अपने साथ उस राष्ट्रवाद की ज्योति भी लेकर जाएंगे, जिसे राष्ट्रकवि दिनकर ने अपनी लेखनी से प्रज्वलित किया था।
लखनऊ का इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान इन तीन दिनों के लिए एक ऐसे केंद्र के रूप में उभरेगा जहां प्राचीन महाकाव्यों की मर्यादा और आधुनिक भारत की आकांक्षाओं का मिलन होगा। पर्यटन विभाग ने इस कार्यक्रम के लिए विशेष तैयारियां की हैं ताकि आने वाले दर्शक और साहित्य प्रेमी एक यादगार अनुभव लेकर लौटें।
‘रश्मिरथी पर्व’ के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार यह सिद्ध कर रही है कि वह विकास की दौड़ में आगे रहने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक और भाषाई जड़ों को सींचने का काम भी पूरी निष्ठा से कर रही है। यह आयोजन निश्चित रूप से लखनऊ के सांस्कृतिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा और आने वाले कई दशकों तक इसकी गूंज साहित्य जगत में सुनाई देती रहेगी।
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