
तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात हो चुका है। दशकों से चले आ रहे डीएमके और एआईएडीएमके के वर्चस्व को चुनौती देते हुए फिल्मी पर्दे के थलापति जोसेफ विजय अब राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हो चुके हैं। साल 2026 के विधानसभा चुनावों में विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) ने जो करिश्मा कर दिखाया, उसकी कल्पना शायद राजनीतिक पंडितों ने भी नहीं की थी।
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रविवार को ली शपथ
234 सीटों वाली विधानसभा में 108 सीटें जीतकर टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी और इसी के साथ विजय ने रविवार को चेन्नई में आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन सत्ता के इस शीर्ष तक पहुंचने का रास्ता विजय के लिए कभी भी आसान नहीं था।

राजनीति के जिस मैदान में आज वे सिरमौर बने हैं, उसी मैदान में उतरने के नाम पर कभी उन्होंने अपने ही माता-पिता के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया था। यह कहानी है एक ऐसे अभिनेता की है, जो राजनीति से दूर भागना चाहता था, लेकिन किस्मत और अपनों की महत्वाकांक्षा ने उन्हें एक ऐसी राह पर खड़ा कर दिया जहां से मुख्यमंत्री भवन का रास्ता निकलता था।
तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में विजय ने एक ऐसा रिकॉर्ड कायम किया है, जिसे तोड़ पाना भविष्य में किसी भी अभिनेता के लिए बड़ी चुनौती होगी। वे राज्य के पहले ऐसे अभिनेता बन गए हैं जिन्होंने अपने पहले ही चुनावी प्रयास में न केवल जीत दर्ज की, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भी विराजमान हुए। उनसे पहले महान अभिनेता एमजीआर ने भी अपने पहले प्रयास में चुनाव जीता था, लेकिन उन्हें तुरंत मुख्यमंत्री बनने का अवसर नहीं मिला था।
सक्रिय राजनीति के खिलाफ थे विजय
विजय की यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि उन्होंने तमिलनाडु की 60 साल पुरानी द्विध्रुवीय राजनीति को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि विजय एक समय पर सक्रिय राजनीति के सख्त खिलाफ थे। उनके करीबी लोग और विशेष रूप से उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर उन्हें राजनीति में लाने के लिए बेताब थे, जबकि विजय अपने फिल्मी करियर और शांतिपूर्ण जीवन को प्राथमिकता दे रहे थे।
राजनीति की इसी खींचतान के बीच साल 2021 में एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया था। उस समय विजय ने अपने माता-पिता सहित 11 लोगों के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी थी। विजय का उद्देश्य बहुत स्पष्ट था, वे नहीं चाहते थे कि कोई भी उनके नाम, उनकी तस्वीरों या उनके विशाल फैन क्लब (विजय मक्कल इयकम) का इस्तेमाल किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधियों के लिए करे।
संगठन से किया किनारा
असल में विवाद तब शुरू हुआ था जब उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने विजय की अनुमति या सहमति के बिना ही उनके फैन एसोसिएशन को एक राजनीतिक संगठन ‘विजय मक्कल इयकम’ में बदलने का प्रयास किया और उसे पंजीकृत करा लिया। इस कदम से विजय इस कदर आहत हुए कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से खुद को इस राजनीतिक दल से अलग कर लिया और घोषणा की कि उनका इस संगठन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने अपने समर्थकों को भी आगाह किया था कि वे उनके पिता की पार्टी से न जुड़ें।
विजय द्वारा अपने ही माता-पिता पर केस किए जाने की खबर ने तब तमिल सिनेमा और राजनीति में हड़कंप मचा दिया था। इस कानूनी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय के पिता और दिग्गज निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर ने बड़े ही संयत ढंग से स्थिति को संभालने की कोशिश की थी। उन्होंने उस दौरान मीडिया से बातचीत में कहा था कि हर परिवार में कुछ न कुछ आंतरिक समस्याएं और मतभेद होते हैं। उन्होंने इसे पिता और पुत्र के बीच का एक सामान्य वैचारिक टकराव बताया था और भरोसा जताया था कि अंततः वे अपने मतभेदों को सुलझा लेंगे।
2024 में बनाई ‘तमिलगा वेट्री कज़गम’ पार्टी
वहीं विजय की मां शोभा ने भी इस पूरे प्रकरण पर सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी थी। उन्होंने अपने पति के दावों के उलट यह स्वीकार किया था कि चंद्रशेखर ने विजय के फैन क्लब को राजनीतिक दल में बदलने से पहले अपने बेटे से इजाजत नहीं ली थी। मां के इस बयान ने विजय के पक्ष को और मजबूती दी थी और यह साफ कर दिया था कि अभिनेता को बिना बताए राजनीति में घसीटा जा रहा था।

समय का पहिया ऐसा घूमा कि, जिस राजनीति से विजय भाग रहे थे, आखिरकार उन्होंने उसी में अपनी नियति तलाशी। 2 फरवरी, 2024 को विजय ने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कज़गम’ लॉन्च करके सबको हैरान कर दिया। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा यू-टर्न था। उन्होंने फिल्मों से संन्यास की घोषणा की और पूरी तरह जनसेवा में जुट गए। उनकी इस मेहनत का फल 10 मई, को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में देखने को मिला, जब उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
इस भव्य समारोह में देशभर के बड़े राजनेता, फिल्मी हस्तियां और लाखों समर्थक मौजूद थे। समारोह में अभिनेत्री तृषा कृष्णन की मौजूदगी ने भी काफी सुर्खियां बटोरीं, जो विजय को इस नए सफर की शुरुआत करते देखने पहुंची थीं। आज विजय के वही माता-पिता, जिनके खिलाफ उन्होंने कभी केस किया था, अपने बेटे की इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं, जो साबित करता है कि राजनीति में न तो कोई स्थायी दुश्मन होता है और न ही स्थायी विवाद।
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