
मथुरा। कान्हा की नगरी मथुरा वृन्दावन में आज उस समय मातम पसर गया, जब एक स्टीमर अचानक से पलट गया और 20 से 25 लोग गहरे पानी में समा गये। इस घटना से वहां चीख-पुकार मच गई। इस घटना में अभी तक 10 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है, वहीं कई लोग घायल हो गये, वहीं कई लापता हो गये।
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मची चीख पुकार
जानकारी के मुताबिक, हादसे का शिकार हुए सभी श्रद्धालु पंजाब के लुधियाना से ठाकुर बांके बिहारी जी के दर्शन करने के लिए वृंदावन आए थे। दर्शन पूजन के बाद ये लोग श्रृंगार घाट के पास से स्टीमर पर सवार होकर यमुना भ्रमण पर निकले थे, तभी स्टीमर अनियंत्रित हो गया और ये अनहोनी हो गई। जैसे ही स्टीमर पलटा, मौके पर चीख पुकार मच गई, जिसे सुनकर घाट पर मौजूद लोगों ने तत्काल बचाव अभियान शुरू कर दिया, लेकिन पानी का बहाव तेज होने और गहराई अधिक होने के कारण रेस्क्यू में काफी दिक्कतें आईं।स्थानीय गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद कुछ लोगों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक कई लोग डूब चुके थे।

घटना की सूचना मिलते ही मथुरा के जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और एसएसपी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता और लोगों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत सेना के स्थानीय स्टेशन से संपर्क किया और मिलिट्री के पेशेवर गोताखोरों की मदद मांगी गई ताकि लापता लोगों को जल्द से जल्द तलाशा जा सके।
जिलाधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, लुधियाना से आए इन श्रद्धालुओं के लिए जिले के सभी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और रामकृष्ण मिशन अस्पताल में घायलों के उपचार के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन की पहली प्राथमिकता है सबकी जान बचना, जिसके लिए सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान चला रही है।
लोहे या केबल में फंसा स्टीमर
हादसे की असल वजह को लेकर पुलिस प्रशासन अब हर पहलू से गहनता से जांच कर रहा है। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि, घटनास्थल के पास बने एक जर्जर पीपा पुल की मरम्मत का काम काफी समय से चल रहा था। मथुरा ग्रामीण के एसपी सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि एक निजी एजेंसी द्वारा पुल के पोंटूनों को ठीक किया जा रहा था और आशंका जताई जा रही है कि, इसी मरम्मत कार्य के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे भारी केबल या लोहे के हिस्सों में स्टीमर फंस गया या उनसे टकराकर असंतुलित हो गया।
अब तक नदी से करीब 22 लोगों को बाहर निकालकर तत्काल एम्बुलेंस और पुलिस की रिस्पांस गाड़ियों के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया है, जिनमें से कई की हालत अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। गोताखोरों की टीम अभी भी यमुना की मटमैली लहरों के बीच लापता लोगों की तलाश में जुटी है, जबकि घाट पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई बाहरी बाधा न आए और भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
इस भीषण हादसे की खबर मिलते ही, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने लखनऊ से ही स्थिति का पल-पल का संज्ञान लेते हुए स्थानीय प्रशासन को राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत झोंकने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को यह भी आदेश दिया है कि पीड़ितों के परिवारों को तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा और हर संभव सहायता प्रदान की जाए।

मुख्यमंत्री कार्यालय से लगातार मथुरा प्रशासन के साथ संपर्क साधा जा रहा है, ताकि घायलों के इलाज में कोई कोताही न बरती जाए। वृंदावन के इस हादसे ने एक बार फिर तीर्थस्थलों पर सुरक्षा मानकों, नावों की क्षमता और बिना लाइफ जैकेट के हो रहे सफर को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों को किया गया सूचित
यह हादसा न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि उस ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है, जो जर्जर पीपा पुल की मरम्मत कर रहा था। श्रद्धालुओं का कहना है कि, अगर वहां मरम्मत का काम चल रहा था, तो उस क्षेत्र को पूरी तरह से प्रतिबंधित क्यों नहीं किया गया या स्टीमर चालक को चेतावनी क्यों नहीं दी गई। वर्तमान में यमुना के तट पर सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन का संयुक्त महा-अभियान जारी है।
घाट के किनारे अपनों को खोने वाले परिवारों की चीखें और सिसकियां पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने वाली हैं। डूबे हुए लोगों के परिजन और अन्य श्रद्धालु भारी मन से और नम आंखों से यमुना किनारे बैठकर अपनों की सलामती की आखिरी दुआ कर रहे हैं। प्रशासन ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और लुधियाना में उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। जैसे-जैसे शाम ढल रही है, रेस्क्यू ऑपरेशन और भी कठिन होता जा रहा है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि जब तक आखिरी लापता व्यक्ति मिल नहीं जाता, यह अभियान थमेगा नहीं।
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