
लखनऊ। उत्तर प्रदेश आज अपनी पुरानी पहचान को पीछे छोड़कर आस्था, अध्यात्म और आधुनिक पर्यटन के संगम से देश के विकास का एक नया वैश्विक मॉडल बनकर उभरा है। योगी सरकार की नीतियों और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विजन ने प्रदेश को उस दौर से बाहर निकाल लिया है जिसे कभी विकास की धीमी गति के लिए जाना जाता था। अब प्रदेश ग्रेवयार्ड इकोनॉमी के संकुचित दायरे से निकलकर टेंपल इकोनॉमी के एक ऐसे स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है, जहां श्रद्धा और अर्थव्यवस्था एक साथ कदमताल कर रहे हैं।
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वैश्विक स्तर पर बढ़ा यूपी का कद
ये बातें लखनऊ के लोकभवन में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहीं। उन्होंने कहा कि, 2017 के बाद प्रदेश की कानून-व्यवस्था में जो आमूलचूल सुधार हुए हैं, उसी ने निवेशकों और पर्यटकों के भीतर सुरक्षा का वह अटूट विश्वास पैदा किया है, जिसका परिणाम आज धरातल पर दिखाई दे रहा है।
पर्यटन मंत्री ने गर्व के साथ इस तथ्य को रेखांकित किया कि, घरेलू पर्यटन के मामले में उत्तर प्रदेश आज पूरे देश में पहले पायदान पर पहुंच गया है। वर्ष 2025 के आंकड़े इस सफलता की कहानी खुद बयां करते हैं, क्योंकि इस एक साल के भीतर प्रदेश में कुल 156 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ है। यह संख्या न केवल भारत के किसी भी राज्य के लिए एक कीर्तिमान है बल्कि यह यूपी की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का भी प्रमाण है।
36 लाख विदेशी सैलानी आए यूपी
इन आंकड़ों में सबसे उत्साहजनक पहलू विदेशी पर्यटकों की संख्या है, क्योंकि वर्ष 2025 में करीब 36 लाख विदेशी सैलानी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को निहारने पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में काशी, अयोध्या और मथुरा जैसे केंद्रों का जो पुनरुद्धार हुआ है, उसी ने अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर उत्तर प्रदेश की चमक को कई गुना बढ़ा दिया है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज के यशस्वी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार के 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज लोक भवन लखनऊ में मीडिया बंधुओं के साथ संवाद किया।
उत्तर प्रदेश में सुदृढ़ कानून-व्यवस्था की स्थापना, निवेश के लिए सर्वश्रेष्ठ गंतव्य के… pic.twitter.com/c7CWxPWQG8
— Jaiveer Singh (@jaiveersingh099) March 25, 2026
इस पूरी आर्थिक और सांस्कृतिक क्रांति का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु अयोध्या का भव्य राम मंदिर बनकर उभरा है। जयवीर सिंह ने जानकारी दी कि जनवरी 2024 में रामलला के अपने मंदिर में विराजमान होने के बाद से अयोध्या की पूरी तस्वीर बदल गई है और वर्ष 2025 में अकेले अयोध्या में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं का आवागमन दर्ज किया गया।
अयोध्या में उमड़े इस जनसैलाब ने न केवल धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई दी है बल्कि वहां की स्थानीय होटल इंडस्ट्री, परिवहन और हस्तशिल्प व्यवसाय को भी अभूतपूर्व मजबूती प्रदान की है। सरकार अब दीपोत्सव, देव दीपावली और ब्रज के रंगोत्सव जैसे आयोजनों को आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्रों के रूप में विकसित कर चुकी है जहां करोड़ों का कारोबार होता है और स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलता है।
बढ़ी हवाई कनेक्टिविटी
विकास की इस कड़ी में केवल मंदिरों का जीर्णोद्धार ही नहीं बल्कि वहां तक पहुंचने वाली सुविधाओं और बुनियादी ढांचे पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने अयोध्या, ब्रज, विंध्याचल, चित्रकूट और नैमिषारण्य जैसे पवित्र स्थलों के सर्वांगीण विकास के लिए विशेष परिषदों का गठन किया है जो वहां के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए आगरा और मथुरा में हेलीपोर्ट सेवाएं शुरू की गई हैं जबकि लखनऊ, प्रयागराज और कपिलवस्तु में हेलीकॉप्टर सेवाएं निरंतर संचालित हो रही हैं। इसके अलावा चित्रकूट में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार और कुशीनगर में बुद्ध थीम पार्क का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार तीर्थ यात्रियों को अनुदान देने के साथ-साथ कैलाश मानसरोवर भवन जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का निर्माण भी सुनिश्चित कर रही है।
आर्थिक मोर्चे पर बात करें, तो पर्यटन नीति-2022 के लागू होने के बाद से प्रदेश में निवेश की एक नई लहर देखी जा रही है। मंत्री के मुताबिक अब तक इस नीति के तहत कुल 36,681 करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतर चुका है जिससे आने वाले समय में लगभग 5 लाख नए रोजगार के अवसर सृजित होने की प्रबल संभावना है। अब तक 1757 नई पर्यटन इकाइयों का पंजीकरण किया गया है जो प्रदेश की बढ़ती आर्थिक क्षमता का संकेत है।
50 हजार होम स्टे बनाने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य पर्यटन के इस लाभ को केवल शहरों तक सीमित न रखकर गांवों तक ले जाना है जिसके लिए 234 ग्रामीण क्षेत्रों का चयन किया गया है। वर्ष 2026-27 तक प्रदेश में 50,000 होम स्टे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि पर्यटकों को घर जैसा वातावरण मिल सके और स्थानीय ग्रामीणों की आय में भी इजाफा हो।
इसके साथ ही प्रदेश के 16 वन्यजीव क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर प्रकृति प्रेमियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पर्यटकों को प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और पौराणिक कथाओं से सही तरीके से अवगत कराने के लिए अब तक 850 गाइडों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। अंत में जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब अपनी पहचान के संकट से पूरी तरह बाहर आ चुका है और सांस्कृतिक आत्मविश्वास के साथ ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के पथ पर चलते हुए देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
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