
आधुनिक जीवनशैली में जब की पूरी की पूरी लाइफस्टाइल खराब हो चुकी है। सोने-जगाने से लेकर खानपान तक की गलत आदत पड़ गई है, जिसने गंभीर स्वास्थ्य सकंट को जन्म दे दिया है। अक्सर हम किसी उत्सव में या अपनी पसंद का व्यंजन देखकर जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं और इसे एक सामान्य सी बात मानकर टाल देते हैं, तो इसका हमारी सेहत पर गहरा असर पड़ता है।
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बिगड़ जाता है मेटाबॉलिज्म
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि, यह क्षणिक आनंद भविष्य में बड़ी बीमारियों की वजह बन सकता है। उनका कहना है कि, ओवरईटिंग से सिर्फ वजन नहीं बढ़ता, बल्कि यह शरीर के संपूर्ण तंत्र को भीतर से कमजोर करने वाली एक गंभीर स्थिति होती है, जिसे समय रहते पहचान लेना चाहिए।

जब कोई व्यक्ति बार-बार अपनी शारीरिक आवश्यकता से अधिक भोजन का सेवन करता है, तो इसका सबसे पहला और सीधा प्रहार पाचन तंत्र पर होता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, अतिरिक्त भोजन को पचाने के लिए अमाशय को जरूरत से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और अधिक मात्रा में पाचक रसों का स्राव करना पड़ता है। इससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है और शरीर में वसा का संचय होने लगता है। लंबे समय तक यह सिलसिला चलने से शरीर का मेटाबॉलिज्म पूरी तरह बिगड़ जाता है, जिससे कई घातक बीमारियां होने का खतरा रहता है।
दिल के दौरे का खतरा
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, ओवरईटिंग का सबसे खतरनाक परिणाम मोटापे के रूप में सामने आता है, जो अपने साथ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी विकार भी लेकर आता है। जब हम शरीर की ऊर्जा खपत से ज्यादा कैलोरी लेते हैं, तो वह रक्त में शुगर के स्तर को बढ़ा देती है। इसे नियंत्रित करने के लिए शरीर को अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है और धीरे-धीरे शरीर इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधी होने लगता है, जो अंततः टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनता है। इसके साथ ही, रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से धमनियों में रुकावट आने लगती है, जिससे दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है।
बीमारियों की यह फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। भूख से ज्यादा खाने का सबसे बुरा प्रभाव लिवर पर पड़ता है। शरीर में जमा होने वाला अतिरिक्त फैट लिवर की कोशिकाओं के आसपास इकट्ठा होने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में फैटी लिवर कहा जाता है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण न पाया जाए, तो यह लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, नियमित रूप से जरूरत से ज्यादा खाने वाले लोग अक्सर एसिडिटी, सीने में जलन और पुरानी कब्ज जैसी समस्याओं से घिरे रहते हैं, जो उनके दैनिक जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करती है। इस समस्या की पहचान करने के लिए कुछ स्पष्ट संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।
माइंडफुल ईटिंग की आदत डालें
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि, अगर भोजन करने के बाद आपको अत्यधिक सुस्ती महसूस होती है, सांस लेने में हल्की कठिनाई होती है या पेट में भारीपन बना रहता है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि, आपने अपनी क्षमता से अधिक खाया है। कई लोग भूख न होने पर भी केवल तनाव को कम करने के लिए या मनोरंजन के तौर पर खाना खाते हैं, जिसे इमोशनल ईटिंग कहा जाता है। यह व्यवहार मानसिक और शारीरिक दोनों की सेहत के लिए हानिकारक है।
डॉक्टर्स का कहना है कि, हमें माइंडफुल ईटिंग यानी सचेत होकर भोजन करने की आदत डालनी चाहिए। मतलब ये है कि, खाना खाते समय टीवी, मोबाइल या अन्य किसी भी ध्यान भटकाने वाली चीज को खुद से दूर रखना चाहिए। जब हम ध्यान लगाकर और चबा-चबाकर खाना खाते हैं, तो हमारे मस्तिष्क को समय पर यह संदेश मिल जाता है कि, पेट भर चुका है। आमतौर पर पेट से मस्तिष्क तक तृप्ति का संकेत पहुंचने में लगभग बीस मिनट का समय लगता है, इसलिए धीरे खाना ओवरईटिंग से बचने का सबसे अचूक उपाय है।
जंक फ़ूड से बनाएं दूरी
हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह है कि, स्वस्थ रहने के लिए अनुशासन बहुत जरूरी है। घर का बना पौष्टिक भोजन, जिसमें फाइबर और प्रोटीन की भरपूर मात्रा हो, उसका सेवन करना चाहिए। बाहर के जंक फूड और अत्यधिक तैलीय पदार्थों से दूरी रहना चाहिए। वे यह भी सुझाव देते हैं कि, व्यक्ति को एक बार में बहुत सारा खाने के बजाय छोटे-छोटे अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाना खाना चाहिए। यदि हम अपनी खाने की आदतों पर आज नियंत्रण नहीं करेंगे, तो कल हमारा शरीर बीमारियों का घर बन सकता है।
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