स्वामी गोविंद देव महाराज का बड़ा एलान… मथुरा में भी बनेगा ‘राम मन्दिर’ जैसा भव्य ‘कृष्ण मंदिर’

 मथुरा।  धर्मनगरी अयोध्या में राम जन्मभूमि पर प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब देश की नजरें कान्हा की नगरी मथुरा पर टिकी हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के उपाध्यक्ष, स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद पर एक बड़ा बयान दिया है। इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि, जिस प्रकार अयोध्या में सदियों पुराना सपना साकार हुआ है, ठीक उसी तरह मथुरा में भी भगवान कृष्ण का भव्य मंदिर बनेगा।

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बयान से उत्साहित हुए कृष्ण भक्त

महाराज का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब मथुरा विवाद को लेकर अदालत में कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। उनके इस दावे ने न केवल कृष्ण भक्तों में उत्साह भर दिया है, बल्कि देश के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में एक नई चर्चा भी छेड़ दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि, सत्य की जीत होगी और मथुरा का दृश्य भी अयोध्या की तरह ही अलौकिक और ऐतिहासिक होगा।

Krishna temple

आपको बता दें कि, स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज इंदौर की सामाजिक संस्था सार्थक द्वारा आयोजित समर्पण के प्रतीक विषय पर आधारित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। यहां उन्होंने मथुरा विवाद पर खुलकर अपनी राय रखी। महराज ने कहा, राम मंदिर का निर्माण केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना भी है और अब अगला पड़ाव मथुरा है। आने वाले समय में मथुरा में भी कृष्ण जन्मभूमि पर वैसा ही भव्य मंदिर बनेगा जैसा शास्त्रों में वर्णित है और जैसा देश की जनता का सपना है।

कोर्ट की कार्यवाही पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि, अभी मामला न्यायालय के विचाराधीन है, लेकिन हिंदू पक्ष के पास पर्याप्त साक्ष्य और ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं। ऐसे में कानूनी रूप से इसमें कोई बड़ी अड़चन नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि, जिस तरह से अयोध्या के मामले में धैर्य और न्याय की जीत हुई, वही इतिहास मथुरा में भी दोहराया जाएगा। उनके अनुसार, भगवान कृष्ण की जन्मस्थली को मुक्त कराना करोड़ों हिंदुओं की आस्था का विषय है और इसे टाला नहीं जा सकता।

राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ एकजुट होने का आह्वान

इस दौरान स्वामी जी ने देश के वर्तमान और भूतकाल के हालातों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, पिछले 150 से 200 वर्षों से भारत को कमजोर करने के लिए एक बहुत बड़ी वैश्विक और आंतरिक साजिश रची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि, विदेशी ताकतों और स्वार्थी तत्वों ने भारत को खान-पान, जाति, भाषा, क्षेत्र और संप्रदायों के आधार पर बांटने का निरंतर प्रयास किया है।

महाराज ने कहा कि बांटो और राज करो की जो नीति अंग्रेजों ने शुरू की थी, उसे आजादी के बाद भी कुछ विचारधाराओं ने जीवित रखा है। आज भी देश की जनता इन साजिशों के दुष्परिणाम झेल रही है। कभी आरक्षण के नाम पर, कभी भाषा के नाम पर, कभी क्षेत्रीय अस्मिता के नाम पर भारतीयों को आपस में लड़ाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने आह्वान किया कि, अब समय आ गया है जब भारतीयों को इन संकीर्ण दीवारों से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ एकजुट होना चाहिए।

स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि, आज यदि भारत अपनी अखंडता को बचाए हुए है और हिंदू समाज जागृत हुआ है, तो इसमें संघ का अतुलनीय योगदान है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा, मैं कभी-कभी एकांत में बैठकर सोचता हूं कि, यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ न होता, तो इस देश की स्थिति क्या होती? शायद इस देश का भूगोल पूरी तरह बदल चुका होता और भारत अनगिनत टुकड़ों में बंट गया होता।

आरएसएस की सराहना

उन्होंने संघ को देश की सांस्कृतिक और भौगोलिक एकता का रक्षक बताया। महाराज के अनुसार, संघ ने निस्वार्थ भाव से समाज को जोड़ने और राष्ट्रभक्ति की अलख जगाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि आज जो सांस्कृतिक पुनर्जागरण हम देख रहे हैं, उसकी नींव दशकों पहले ही रखी जा चुकी थी।

Krishna temple

महाराज ने विश्वास दिलाया कि, भगवान जल्द ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करेंगे। उन्होंने अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि, वहां प्रभु राम के जन्मस्थान पर मंदिर का निर्माण एक ऐसी मिसाल है, जिसने दुनिया को दिखा दिया कि, न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन सत्य पराजित नहीं हो सकता। मथुरा में भी वैसा ही होगा, क्योंकि वहां की भूमि का कण-कण कृष्ण की गवाही देता है।

उन्होंने यह भी कहा कि, मथुरा और काशी के मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से होना चाहिए। हिंदू समाज अब जागरूक है और वह अपने प्रतीकों की पुनर्स्थापना के लिए संकल्पित है। महाराज ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और इतिहास को पढ़ें ताकि वे भ्रमित न हों। उन्होंने समर्पण के प्रतीक कार्यक्रम के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया कि राष्ट्र के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ी पूजा है।

 शादी ईदगाह का विरोध

स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज के इस बयान ने मथुरा विवाद को एक नई दिशा दे दी है। उनके जैसे उच्च पदस्थ धार्मिक व्यक्तित्व द्वारा अयोध्या जैसा मंदिर बनने की बात कहना यह संकेत देता है कि, हिंदू समाज और धार्मिक ट्रस्टों की तैयारी कितनी पुख्ता है। हालांकि, शाही ईदगाह पक्ष और कुछ अन्य संगठन लगातार इसका विरोध कर रहे हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक में लंबित है। स्वामी जी के इस वक्तव्य से ऐसा लग रहा है कि,अयोध्या के बाद अब मथुरा का मुद्दा पूरी तरह से केंद्र में आ चुका है और यहां भी भव्य मन्दिर बनाने की पुख्ता तैयारी है, इंतजार है तो बस कोर्ट के फैसले का।

 

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