
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यातायात की सूरत बदलने वाली है, जिससे आने वाले टाइम ने जाम की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। दरअसल, योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ग्रीन कॉरिडोर अब अपने सबसे निर्णायक चरण में प्रवेश कर गई है। एलडीए ने इस कॉरिडोर को सीधे सुल्तानपुर रोड से जोड़ने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है।
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एलडीए के उपाध्यक्ष ने किया निरीक्षण
इस नई सड़क के निर्माण से राजधानी के गोमती नगर विस्तार, अर्जुनगंज और शहीद पथ के आसपास रहने वाली लगभग 10 लाख की आबादी को सीधे तौर पर जाम से राहत मिलेगी। 33 करोड़ रुपए की इस परियोजना के पूरी होते ही सफर का समय कम हो जायेगा। साथ ही लखनऊ के दक्षिण-पूर्व हिस्से की कनेक्टिविटी में भी क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

मंगलवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण के बाद इस परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। यह विस्तार योजना लखनऊ को एक आधुनिक और स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी। ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक बिना किसी बाधा के आवागमन सुनिश्चित करना है।
इसी कड़ी में पिपराघाट से सुल्तानपुर रोड को जोड़ने की योजना पर अब जल्द ही काम शुरू होने वाला है। इसके तहत आर्मी लैंड (सेना की जमीन) से सुल्तानपुर रोड पर स्थित प्रसिद्ध मरी माता मंदिर तक लगभग 1800 मीटर लंबी शानदार 4-लेन सड़क बनाई जाएगी।
सीधे जुड़ेंगे कई इलाके
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, इस सड़क के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था का चयन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से पूरा कर लिया गया है। यह 4-लेन सड़क आर्मी लैंड से होकर गुजरेगी, जिससे गोमती नगर विस्तार की बड़ी टाउनशिप्स को सुल्तानपुर रोड तक पहुंचने के लिए अब संकरी गलियों या लंबे चक्करों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। 33 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली यह सड़क आधुनिक मानकों के अनुरूप होगी, जिसमें ड्रेनेज और लाइटिंग की भी विशेष व्यवस्था की जाएगी।
इस नए रूट के तैयार होने के बाद लखनऊ के कई महत्वपूर्ण इलाके सीधे आपस में जुड़ जाएंगे। वर्तमान में गोमती नगर विस्तार से सुल्तानपुर रोड या अर्जुनगंज जाने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ग्रीन कॉरिडोर से कनेक्टिविटी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय यानी सिग्नेचर बिल्डिंग, ओमैक्स टाउनशिप और इमार टाउनशिप जैसे पॉश इलाकों में रहने वालों के लिए रास्ता बेहद सुगम हो जाएगा।
इसके अलावा, शहीद पथ पर होने वाले ट्रैफिक के दबाव में भी भारी कमी आएगी। अर्जुनगंज की तरफ से जाने वाले लोग सीधे इस कॉरिडोर का उपयोग कर मरी माता मंदिर के पास निकल सकेंगे। अनुमान है कि, इस एक सड़क के बनने से लगभग 10 लाख की आबादी को रोजाना लगने वाले जाम से परमानेंट छुटकारा मिल जाएगा।
युद्ध स्तर पर चल रहा तीसरे चरण का काम
एलडीए वीसी ने निरीक्षण के दौरान बताया कि, ग्रीन कॉरिडोर के तीसरे चरण का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इस चरण के अंतर्गत पिपराघाट से शहीद पथ के बीच बंधा निर्माण, सड़क चौड़ीकरण, फ्लाईओवर और ब्रिज का काम किया जा रहा है। इस पूरे रूट को सुलतानपुर रोड से जोड़ने का निर्णय इसलिए लिया गया ताकि ग्रीन कॉरिडोर का लाभ केवल शहर के मुख्य हिस्सों तक सीमित न रहे, बल्कि यह बाहरी इलाकों यानी आउटर लखनऊ के लिए भी एक लाइफलाइन बन सके।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि, कार्यदायी संस्था जल्द से जल्द मौके पर मशीनरी लगाकर निर्माण कार्य शुरू करे। निर्माण के दौरान गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है, ताकि मानसून से पहले बड़े हिस्से का काम पूरा किया जा सके।
निरीक्षण के दौरान एलडीए उपाध्यक्ष ने केवल सुल्तानपुर रोड कनेक्टिविटी ही नहीं, बल्कि पुराने लखनऊ को जोड़ने वाले प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा की। उन्होंने पक्का पुल से डालीगंज के बीच बनाए जा रहे 1.5 किलोमीटर लंबे आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) और फ्लाईओवर का जायजा लिया। इस परियोजना में सबसे बड़ी बाधा रेलवे की एनओसी थी, जो अब मिल गई है।
कुछ मिनट में पहुंचे नए लखनऊ से पुराने लखनऊ
रेलवे से एनओसी मिलने के बाद अब इस आरओबी के निर्माण में आने वाली रुकावटें खत्म हो गई हैं। प्रथमेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि, 15 जून तक इस आरओबी का निर्माण हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए, ताकि इसे जनता के लिए खोला जा सके। इस फ्लाईओवर के चालू होने से खदरा, सीतापुर रोड, चौक, हुसैनाबाद और बसंतकुंज जैसे घनी आबादी वाले इलाकों को जबरदस्त फायदा होगा। पुराने लखनऊ से नए लखनऊ की दूरी महज कुछ मिनटों की रह जाएगी।

लखनऊ विकास प्राधिकरण की इन कोशिशों से साफ है कि, आने वाले कुछ महीनों में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आने वाला है। ग्रीन कॉरिडोर के सुलतानपुर रोड से जुड़ने और पक्का पुल आरओबी के तैयार होने से शहर के चारों कोनों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
सुल्तानपुर रोड और अर्जुनगंज क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में आबादी का घनत्व तेजी से बढ़ा है। ऐसे में 4-लेन की यह नई सड़क भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। 33 करोड़ रूपये का यह निवेश न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्र में रियल एस्टेट और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा। एलडीए का लक्ष्य है कि राजधानीवासियों को एक ऐसा सुगम रास्ता दिया जाए जहां उन्हें लाल बत्तियों और ट्रैफिक जाम का सामना न करना पड़े।
इस डेट को होगी कनेक्टिविटी
ग्रीन कॉरिडोर का सुल्तानपुर रोड से जुड़ना केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह लखनऊ के विकास की नई इबारत है। 1800 मीटर की यह 4-लेन सड़क उन हजारों यात्रियों के लिए वरदान साबित होगी जो रोजाना दफ्तर या घर जाते समय जाम में अपना कीमती समय बर्बाद करते हैं। सेना की जमीन पर सड़क निर्माण के लिए आवश्यक तालमेल और रेलवे से मिली एनओसी यह दर्शाती है कि शासन स्तर पर इन परियोजनाओं को पूरा करने की दृढ़ इच्छाशक्ति है। अब राजधानीवासियों को इंतजार है 15 जून का, जब कनेक्टिविटी के ये नए रास्ते उनके सफर को आसान बनाएंगे।
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