सीएम योगी की मां पर अभद्र टिप्पणी करने वाले मौलाना को STF ने उठाया, 84 मुकदमों के बाद कसा शिकंजा

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां के बारे में अपशब्द कहने के आरोपी बिहार के इस्लामिक वक्ता मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी बिहार के पूर्णिया जिले के अमौर थाना इलाके में हुई। सीएम योगी की मां के बारे में विवादित टिप्पणी करने को लेकर मौलाना के खिलाफ 80 से ज़्यादा केस दर्ज हैं। एसटीएफ फिलहाल मौलाना को गोरखपुर ले आई है, जहां उससे पूछताछ की जा रही है।

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फिल्मी स्टाइल में हुई गिरफ़्तारी

आपको बता दें कि, मौलाना की इस टिप्पणी से उत्तर प्रदेश की जनता में भारी आक्रोश था। नतीजतन उसके खिलाफ प्रदेश भर में 80 से अधिक मुकदमे दर्ज हो गए। मौलाना चतुर्वेदी की गिरफ्तारी के लिए यूपी एसटीएफ की टीम पिछले कई दिनों से बिहार में डेरा डाले हुए थी। सादे लिबास में पहुंची टीम ने जिस फिल्मी अंदाज में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, उससे स्थानीय लोग भी दंग रह गए।

Islamic speaker Maulana Abdullah Salim Chaturvedi

फिलहाल मौलाना को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर यूपी एसटीएफ गोरखपुर पहुंच चुकी है, जहां वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि, संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और उनके परिजनों के खिलाफ नफरती भाषा का इस्तेमाल करने वालों पर कानून का शिकंजा कसना तय है।

मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी की गिरफ्तारी पूर्णिया जिले के अमौर थाना क्षेत्र के दमालपुर गांव से हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यूपी एसटीएफ की टीम सादे कपड़ों में निजी वाहनों से पहुंची थी। टीम ने इतनी सटीकता और फुर्ती से काम किया कि, स्थानीय ग्रामीणों को संभलने या विरोध करने का मौका तक नहीं मिला।

5 मिनट में पूरा हुआ ऑपरेशन

गिरफ्तारी का मंजर इतना अचानक था कि पहली नजर में ग्रामीणों को लगा कि किसी अपराधी गिरोह ने मौलाना का अपहरण कर लिया है। महज 5 मिनट के भीतर मौलाना को गाड़ी में बिठाकर टीम वहां से रवाना हो गई। बाद में जब बिहार पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की कि यह उत्तर प्रदेश एसटीएफ की आधिकारिक कार्रवाई थी, तब जाकर गांव में फैला तनाव कम हुआ। यूपी पुलिस ने इस ऑपरेशन को बेहद गोपनीय रखा था, ताकि मौलाना को फरार होने का कोई मौका न मिल सके।

यह पूरा मामला मौलाना चतुर्वेदी के एक विवादित वीडियो से शुरू हुआ जो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। दरअसल, एक धार्मिक जलसे (इज्तिमा) को संबोधित करते हुए मौलाना ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गोकशी के खिलाफ लागू किए गए सख्त कानूनों की तीखी आलोचना की थी। अपनी तकरीर के दौरान मौलाना ने आपा खो दिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माताजी को लेकर आपत्तिजनक और अभद्र शब्दों का प्रयोग किया।

जैसे ही इस भाषण की क्लिप वायरल हुई, पूरे उत्तर प्रदेश में हिंदू संगठनों और आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का कहना था कि, राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी की मां को विवाद में घसीटना और उनके लिए अपशब्दों का प्रयोग करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी गुस्से का परिणाम था कि, उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज और वाराणसी समेत लगभग 84 स्थानों पर मौलाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

मौलाना ने वीडियो जारी कर दी सफाई

जब विवाद ने हिंसक रूप लेना शुरू किया और यूपी पुलिस की टीमें बिहार की ओर कूच करने लगीं, तब मौलाना चतुर्वेदी ने एक सफाई वीडियो जारी कर माफी मांगी थी। उन्होंने दावा किया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया है। मौलाना ने बचाव में कहा, योगी आदित्यनाथ की माताजी मेरे लिए भी मां के समान हैं। यह वीडियो लगभग दो साल पुराना है जिसे अब साजिश के तहत वायरल किया जा रहा है। मेरे पास इसका असल फुटेज मौजूद है जिसमें पूरी बात स्पष्ट हो जाएगी।

हालांकि, जांच एजेंसियों और शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि, टिप्पणी चाहे पुरानी हो या नई, वह कानूनन अपराध की श्रेणी में आती है और नफरत फैलाने के उद्देश्य से दी गई थी। यूपी पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि चुनाव के समय या विशेष परिस्थितियों में इस वीडियो को दोबारा हवा देने के पीछे किसका हाथ है।

मौलाना अब्दुल्ला सलीम के नाम के साथ ‘चतुर्वेदी’ शब्द लगा होना भी लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। वे मूल रूप से बिहार के अररिया जिले के जोकीहाट (पथराबाड़ी गांव) के रहने वाले हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि, उन्होंने वैदिक ज्ञान प्राप्त किया है, इसलिए वे चतुर्वेदी लगाते हैं, जबकि आलोचक इसे एक सोची-समझी रणनीति या ध्रुवीकरण का हिस्सा मानते हैं।

AIMIM से मांगा टिकट

मौलाना केवल धार्मिक मंचों तक ही सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि उनकी राजनीतिक महात्वाकांक्षाएं भी प्रबल रही हैं। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ओवैसी की पार्टी AIMIM से जोकीहाट सीट के लिए टिकट की मांग की थी। टिकट न मिलने पर उन्होंने बगावत कर दी और बाद में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी या उससे प्रेरित होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने की कोशिश की। राजनीतिक हलकों में उनकी पहचान एक विवादित और कट्टर छवि वाले नेता के रूप में रही है।

गिरफ्तारी के बाद यूपी एसटीएफ मौलाना को सीधे गोरखपुर ले गई है। गोरखपुर मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र है और वहां मौलाना के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान मौलाना से उनके पुराने भाषणों, उनके विदेशी संपर्कों और उनके ‘चतुर्वेदी’ उपनाम के पीछे की सच्चाई जानने की कोशिश की जाएगी। इसके साथ ही, यह भी जांचा जाएगा कि क्या वे किसी बड़े नफरती सिंडिकेट का हिस्सा हैं जो उत्तर प्रदेश और बिहार की सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।

 हेट स्पीच पर एक्शन

मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी की गिरफ्तारी यह स्पष्ट करती है कि, डिजिटल युग में हेट स्पीच की उम्र लंबी होती है। मुख्यमंत्री की माता पर की गई टिप्पणी ने न केवल कानून की मर्यादा तोड़ी बल्कि सामाजिक नैतिकता को भी तार-तार किया। अब कानून यह तय करेगा कि अभिव्यक्ति की आजादी और नफरत फैलाने के बीच की वह महीन रेखा कहां खत्म होती है। फिलहाल, यूपी पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने आक्रोशित भीड़ को शांत करने और कानून का इकबाल बुलंद करने का काम किया है।

 

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