राम-कौशल्या पर सपा नेता के विवादित बोल, धार्मिक से लेकर राजनीतिक गलियारों तक धधकी आग, FIR दर्ज

 हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में समाजवादी पार्टी से जुड़े बताए जा रहे एक नेता यदुनंदन लाल के कथित विवादित बयान ने पूरे प्रदेश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। राजनीति और धर्म का संगम जब मर्यादाओं की दहलीज लांघ जाता है, तो उसका परिणाम इसी तरह के सामाजिक विद्वेष और तीखे राजनीतिक टकराव के रूप में सामने आता है।

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भगवान राम पर की आपत्तिजनक टिप्पणी

यदुनंदन लाल पर आरोप है कि, उन्होंने एक संबोधन के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और माता कौशल्या सहित अन्य पूजनीय धार्मिक पात्रों पर अत्यंत अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी की। जैसे ही इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हुआ, वैसे ही धार्मिक संगठनों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक विरोध की आग धधक उठी। इस मामले ने अब इतना तूल पकड़ लिया है कि न केवल स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई है, बल्कि प्रदेश स्तर पर बड़े नेताओं के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है।

हरदोई जिले के हरपालपुर सर्किल के क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र सिंह ने इस पूरे प्रकरण पर आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि पुलिस प्रशासन इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदुनंदन लाल ने अपने भाषण के दौरान हिंदू देवी-देवताओं को लेकर जो अपमानजनक शब्द कहे हैं, वे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की श्रेणी में आते हैं।

गिरफ्तारी के लिए दबिश

पुलिस ने इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश देना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून सम्मत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं ताकि आरोपी को जल्द से जल्द हिरासत में लेकर पूछताछ की जा सके।

इस पूरे विवाद के केंद्र में समाजवादी पार्टी का नाम आने पर पार्टी नेतृत्व ने तुरंत सफाई पेश की है। समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने इस मामले से पार्टी का पल्ला झाड़ते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदुनंदन लाल का समाजवादी पार्टी में कोई आधिकारिक अस्तित्व नहीं है और वे वर्तमान में पार्टी के किसी भी पद पर आसीन नहीं हैं।

भदौरिया ने जोर देकर कहा कि समाजवादी पार्टी यदुनंदन लाल के विचारों और उनके द्वारा दी गई आपत्तिजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और नेता भी प्रभु श्रीराम में अटूट आस्था रखते हैं और पार्टी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के पक्ष में कभी नहीं रही है। पार्टी की तरफ से यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि यह नेता का निजी कृत्य हो सकता है, जिससे संगठन का कोई लेना-देना नहीं है।

मनोज तिवारी ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

हालांकि समाजवादी पार्टी की सफाई के बावजूद भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने हमलावर रुख अपना लिया है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि राम नवमी जैसे पावन पर्व के समय माता कौशल्या और भगवान राम के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी करना सपा की मानसिकता को उजागर करता है।

उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अपनी आस्था का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करेगी और आने वाले समय में ऐसे लोगों और उनकी विचारधारा को सबक सिखाएगी। मनोज तिवारी का मानना है कि इस तरह के बयान सोची-समझी रणनीति के तहत समाज में ध्रुवीकरण पैदा करने के लिए दिए जाते हैं, लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है।

वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी ने भी इस मुद्दे पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आज के समय में राजनीतिक विरोध के नाम पर विपक्ष अपनी मर्यादा और सांस्कृतिक जड़ों को भूलता जा रहा है। शांभवी चौधरी के अनुसार कुछ लोग यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि भगवान श्रीराम का अपमान करके वे किसी विशेष विचारधारा का विरोध कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि श्रीराम और रामराज्य का विचार केवल पूजा पद्धति नहीं बल्कि सुशासन और न्याय का एक महान संकल्प है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बार-बार देवी-देवताओं का अपमान करने वाले तत्वों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जो समाज में एक मिसाल पेश करे।

धार्मिक मोर्चे पर लामबंदी

धार्मिक मोर्चे पर भी इस बयान के खिलाफ जबरदस्त लामबंदी देखी जा रही है। अखिल भारत हिंदू महासभा ने इस मामले में सबसे मुखर विरोध दर्ज कराया है। महासभा के प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में लिखित तहरीर देकर यदुनंदन लाल के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में जिस तरह से भगवान राम, माता कौशल्या और हिंदू धर्म के पवित्र यज्ञों का उपहास उड़ाया गया है, उससे सनातन धर्म के करोड़ों अनुयायियों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।

शिशिर चतुर्वेदी ने यह भी चिंता जताई कि ऐसी टिप्पणियां समाज को जातियों में बांटने और सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का काम करती हैं। उन्होंने पूर्व के घटनाक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी कई बार कुछ विशिष्ट राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोगों ने रामचरितमानस और माता सीता पर विवादित टिप्पणियां की हैं, जो एक खतरनाक प्रवृत्ति की ओर इशारा करती हैं।

जनता में आक्रोश

वर्तमान में हरदोई का यह मामला उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। एक ओर जहां पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है, वहीं दूसरी ओर जनता के बीच इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सार्वजनिक मंचों का उपयोग धार्मिक विद्वेष फैलाने के लिए क्यों किया जा रहा है।

विपक्षी दल इसे चुनावी लाभ से जोड़कर देख रहे हैं, तो वहीं सत्ता पक्ष इसे सांस्कृतिक गौरव पर हमला बता रहा है। यदुनंदन लाल की गिरफ्तारी के बाद ही इस मामले की अगली कड़ी साफ हो पाएगी, लेकिन फिलहाल इसने राज्य के सांप्रदायिक और राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है।

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