कौशल विकास मिशन: नए सत्र में 99,000 युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य, नीति में हुए बड़े बदलाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने युवाओं के कौशल को निखारकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले ही दिन अपनी कार्ययोजना को धरातल पर उतारते हुए प्रशिक्षण लक्ष्यों का आवंटन कर दिया है।

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5 प्रतिशत कोटा दिव्यांगजनों

मिशन का लक्ष्य प्रदेश के करीब एक लाख युवाओं को विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों में पारंगत करना है, ताकि वे न केवल निजी क्षेत्र में रोजगार पा सकें, बल्कि स्वरोजगार के माध्यम से दूसरों को भी काम देने में सक्षम हों। इस बार की आवंटन प्रक्रिया में मिशन ने पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जिसके लिए पूरी नीति में आमूल-चूल परिवर्तन किए गए हैं।

योजना की बारीकियों को किया साझा

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने इस पूरी योजना की बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि, नए वित्तीय वर्ष के प्रथम दिवस पर ही लक्ष्यों का आवंटन करना एक रणनीतिक निर्णय है। इससे पूरे वर्ष का कैलेंडर सुचारू रूप से चल सकेगा और प्रशिक्षण के बाद होने वाले मूल्यांकन और सेवायोजन की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं आएगा। पहले की व्यवस्थाओं में अक्सर लक्ष्यों के निर्धारण में देरी होने से सत्र पिछड़ जाते थे, लेकिन इस बार मिशन ने अर्ली बर्ड अप्रोच अपनाते हुए कुल 957 ट्रेनिंग पार्टनर्स को 99,075 युवाओं को प्रशिक्षित करने का उत्तरदायित्व सौंपा है।

इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मिशन ने पहली बार अपनी ग्रेडिंग नीति को सार्वजनिक किया है। फरवरी और मार्च के महीनों में सभी केंद्रों की जमीनी क्षमता का गहन भौतिक सत्यापन किया गया, जिसके आधार पर ही 619 निजी प्रदाताओं, 47 औद्योगिक भागीदारों और 291 सरकारी भागीदारों का चयन कर उन्हें लक्ष्य दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर दक्षता बढ़ाने के लिए मिशन ने एक बड़ा बदलाव समय सीमा में किया है।

30 दिन में पूरी करनी होगी औपचारिकता

अब प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए केंद्रों को जो 90 दिनों का समय मिलता था, उसे घटाकर केवल 30 दिन कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि, चयनित संस्थाओं को अब अधिक तेजी से काम करना होगा और सरकारी प्रक्रियाओं में लगने वाले अतिरिक्त समय को बचाकर सीधे प्रशिक्षण कार्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इसके साथ ही एक अत्यंत नवीन ‘स्मार्ट टॉपअप’ व्यवस्था की शुरुआत की गई है।

इस व्यवस्था के अंतर्गत जो प्रशिक्षण केंद्र उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और जिनके पास संसाधन उपलब्ध होंगे, वे अपने पुराने बैच के समाप्त होने से 15 दिन पहले ही नए लक्ष्यों की मांग कर सकेंगे। इससे अच्छे काम करने वाले संस्थानों को निरंतरता मिलेगी और युवाओं को भी प्रशिक्षण के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

डिजिटल हुई प्रक्रिया

भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पर कड़ा प्रहार करते हुए मिशन ने प्रशिक्षण प्रदाताओं के आबद्धीकरण यानी इम्पैनलमेंट की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया है। अब लक्ष्य आवंटन और टॉपअप की मांग केवल साल के चार निर्धारित क्वार्टरों अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी के प्रथम सप्ताह में ही की जा सकेगी। इस निश्चित समय सारिणी का लाभ यह होगा कि मिशन के अधिकारियों और कर्मचारियों के पास शेष समय में बिलों के सत्यापन और समय पर भुगतान करने की सुविधा होगी।

23 फरवरी को जारी की गई नई नियमावली के अनुसार, अब संस्थाओं को उनके काम की गुणवत्ता और ग्रेडिंग के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा यानी प्रशिक्षण लागत की अदायगी पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि संस्थान ने युवाओं को किस स्तर का हुनर सिखाया है और उनका प्लेसमेंट रिकॉर्ड कैसा रहा है।

सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के नजरिए से भी इस बार की नीति अत्यंत सुदृढ़ है। मिशन ने राज्य के सभी 75 जिलों और विशेष रूप से चिन्हित 108 आकांक्षी ब्लॉकों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। इन केंद्रों पर प्रशिक्षणार्थियों के चयन में कड़े सामाजिक मानक तय किए गए हैं। प्रत्येक बैच में न्यूनतम 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

5 प्रतिशत कोटा दिव्यांगजनों का 

इसके अलावा समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए 5 प्रतिशत कोटा दिव्यांगजनों के लिए सुरक्षित किया गया है। ‘जीरो पॉवर्टी’ श्रेणी यानी अत्यंत गरीब परिवारों के युवाओं को प्रवेश में प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि कौशल विकास के माध्यम से उनकी आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार लाया जा सके। नई संस्थाओं और अभिनव विचारों को प्रोत्साहित करने के लिए अब स्टार्टअप्स और प्राइवेट पार्टनर्स के जुड़ने की खिड़की साल में दो बार, मई और दिसंबर में खोली जाएगी।

इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है ताकि किसी भी स्तर पर बिचौलियों की भूमिका न रहे। सरकारी और औद्योगिक भागीदार भी इसी डिजिटल माध्यम से मिशन का हिस्सा बन सकेंगे। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने अपनी इस नई नीति के माध्यम से न केवल प्रशिक्षण की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश की है, बल्कि एक ऐसा तंत्र विकसित किया है जहाँ गुणवत्ता और समयबद्धता ही सफलता का एकमात्र पैमाना होगी। यह पहल निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कुशल मानव संसाधन के माध्यम से मजबूती प्रदान करेगी।

 

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