
सीकर। राजस्थान के शेखावाटी अंचल का शांत जिला सीकर अब देश के शिक्षा मानचित्र पर नए कोटा के रूप में उभर रहा है। 2024-25 की नीट परीक्षाओं में शानदार नतीजे देने वाले इस शहर की आबो-हवा में अब सिर्फ डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपने तैरते हैं, लेकिन नीट 2026 के पेपर लीक कांड ने इस पर बदनुमा दाग लगा दिया है।
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सवा लाख से ज्यादा बच्चे हैं यहां
जी हां होनहार छात्रों और बेहतरीन कोचिंग हब के तौर पर पहचान बना रहा सीकर अब पेपर लीक के एपिसेंटर के तौर पर सुर्खियां बटोर रहा है। साल 2020 तक पिपराली रोड और नवलगढ़ रोड पर सन्नाटा पसरा रहता था, लेकिन अब यहां बहुमंजिला कोचिंग इमारतें, ,बड़े होर्डिंग्स और कतारों में हॉस्टल नजर आते हैं।

81 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक महावीर पुरोहित बताते हैं कि, 1990 के अंत में कोचिंग की शुरुआत हुई, लेकिन असली उछाल पिछले 10 सालों में आया। कोरोना के बाद तो शहर पूरी तरह कोचिंग हब बन गया। आज सीकर में करीब 3,000 हॉस्टल और पीजी चल रहे हैं। सवा लाख से ज्यादा नीट-जेईई अभ्यर्थी यहां पढ़ रहे हैं। ज्यादातर कोचिंग संचालक कोटा से आए या आईआईटी-आईआईएम पासआउट हैं।
ग्रामीण छात्रों की बड़ी संख्या, अनुशासन और कोटा स्टाइल तैयारी ने सीकर को मजबूत पहचान दी। अब यहां निजी मेडिकल कॉलेज भी बन रहा है, लेकिन सफलता की इस दौड़ में गलाकाट प्रतिस्पर्धा ने अनैतिक रास्ते खोल दिए। कोचिंग संचालकों का आरोप है कि, रिजल्ट पर टिकी बिजनेस मॉडल की वजह से कुछ लोग किसी भी हद तक जा रहे हैं।
12 मई को रद्द हुई थी परीक्षा
3 मई की रात करीब 1:30 बजे उद्योग नगर थाने में एक कोचिंग फिजिक्स शिक्षक रमाकांत (बदला नाम) घबराए हुए पहुंचे। उन्होंने मोबाइल पर एक फाइल दिखाई जिसमें नीट के सवाल हूबहू मिल रहे थे। लिखित शिकायत न देकर वह चले गए, लेकिन बाद में NTA को ईमेल कर शिकायत की। जांच में पता चला कि सीकर का एक छात्र (केरल के मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहा) इसकी मुख्य कड़ी था। उसने अपने दोस्त को गेस पेपर भेजा, जो कोचिंग और हॉस्टलों तक फैल गया।

इसमें केमिस्ट्री के 45 और बायोलॉजी के 90 सवाल मैच कर रहे थे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी और मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र से कई गिरफ्तारियां कीं। जयपुर के जमवारामगढ़ से दिनेश बिंवाल, उनके भाई मांगीलाल और बेटे विकास बिंवाल मुख्य आरोपी हैं। इनके परिवार के पांच बच्चे पिछले साल नीट में चयनित हुए थे। अन्य गिरफ्तारियों में यश यादव (हरियाणा), शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे और मनीषा वाघमारे (महाराष्ट्र) शामिल हैं।
2024 में भी हुआ था विवाद
सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों का हुआ। परीक्षा रद्द होने के बाद हजारों छात्र सदमे में हैं। झुंझुनूं की रितिका बोरड़ा की मां-बाप कहते हैं, दो साल की मेहनत बर्बाद हो गई। छात्रा प्रीति बताती है, सालाना 3 लाख रुपये खर्च कर हम पढ़ते हैं, लेकिन पेपर लीक सब कुछ खत्म कर देता है। दिल्ली एम्स के मनोचिकित्सक डॉ. गणेश कुमार मीणा कहते हैं कि, ईमानदार छात्रों का भरोसा टूट गया है। दोबारा परीक्षा में उनका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब एनटीए की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। 2024 में भी विवाद हुआ था। सीकर, जो दो साल पहले टॉपर्स दे रहा था, आज विवादों में घिर गया है। अब देखना है कि सीबीआई की जांच इस शिक्षा नगरी के दामन पर लगे दाग धो पाती है या कोचिंग माफिया छात्रों के भविष्य को और बर्बाद करता रहेगा।
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