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सुब्रत रॉय पर फिर लटकने लगी गिरफ्तारी की तलवार, SEBI ने कसा शिकंजा

भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (SEBI) ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय पर एक बार फिर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। दरअसल, SEBI ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सुब्रत रॉय और उनकी दो कंपनियों को करीब 62 हजार करोड़ रुपए जमा करने का आदेश दिया है। SEBI ने अपनी इस याचिका में मांगी की है कि अगर सुब्रत रॉय यह पैसा जमा नहीं करवाते हैं तो उन्हें हिरासत में लिया जाए। सेबी ने कहा कि 8 साल बाद भी यह ग्रुप कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं कर रहा है।

सुब्रत रॉय को वर्ष 2016 में मिली थी जमानत

दरअसल, सहारा समूह पर निवेशकों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया है। सहारा समूह ने बांड स्कीम के तहत यह रुपये इकट्ठा किया था। बाद में इन स्कीम्स को गैरकानूनी ठहराया गया था। इन्ही रुपयों को लेकर SEBI सहारा समूह के मुखिया सुब्रत रॉय पर शिकंजा कसती रही है।

वर्ष 2014 में कोर्ट के अवमानना के मामले में सुब्रत रॉय को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वर्ष 2016 में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। तब से वह जेल से बाहर चल रहे हैं।  

हालांकि एक बार फिर SEBI ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा है कि आदेशों का पालन करने के लिए सहारा ने अभी तक कुछ नहीं किया है। दूसरी ओर अवमानना करने वालों पर देनदारी बढ़ती जा रही है और वे कस्टडी से रिहा होने के बाद आनंद ले रहे हैं। सेबी ने यह भी कहा कि सहारा ग्रुप ने प्रिंसिपल अमाउंट का केवल एक हिस्सा जमा किया है। ब्याज समेत बकाया रकम करीब 62 हजार करोड़ रुपए है।

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वहीं, सहारा ग्रुप का कहना है कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे हैं। सहारा ग्रुप ने यह भी दावा किया है कि उसने सेबी  को 22 हजार करोड़ रुपए दिए हैं, लेकिन सेबी ने निवेशकों को केवल 106.10 करोड़ रुपए दिए हैं।