
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कड़े नियामकीय कदमों के बाद बृहस्पतिवार को रुपये में कई वर्षों की सबसे बड़ी एकदिवसीय तेजी दर्ज की गई। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में भारतीय मुद्रा 156 पैसे यानी 1.6 प्रतिशत मजबूत होकर 93.14 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुई।
कारोबार की शुरुआत में रुपया 94.62 प्रति डॉलर पर खुला और दिनभर के उतार-चढ़ाव के बीच यह 188 पैसे तक उछलकर 92.82 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, सत्र के अंत में इसमें कुछ नरमी आई और यह 93.14 पर बंद हुआ। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 94.84 प्रति डॉलर के अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था, जबकि सप्ताह की शुरुआत में यह 95 के स्तर को भी पार कर गया था।
रुपये में आई इस मजबूती के पीछे आरबीआई के हालिया फैसले प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। केंद्रीय बैंक ने 27 मार्च 2026 को जारी परिपत्र के तहत बैंकों के लिए रुपये में नेट ओपन पोजिशन की सीमा 10 करोड़ डॉलर निर्धारित कर दी है, जिसका अनुपालन 10 अप्रैल तक अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, बैंकों को ऑनशोर फॉरवर्ड बाजार में गैर-वितरणीय डेरिवेटिव अनुबंध करने से भी रोक दिया गया है।
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध को दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं होगी। इन सख्त उपायों का उद्देश्य रुपये पर सट्टा दबाव को कम करना और बाजार में स्थिरता लाना है। विश्लेषकों का मानना है कि इन नियमों के चलते बैंकों को अपनी ओपन पोजिशन कम करने के लिए डॉलर की बिक्री करनी पड़ी, जिससे रुपये को मजबूती मिली।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के अनुसार, यह पिछले 12 वर्षों में किसी एक कारोबारी सत्र में रुपये की सबसे बड़ी तेजी है। उन्होंने कहा कि 10 अप्रैल की समयसीमा तक बैंकों द्वारा डॉलर की बिकवाली जारी रह सकती है, जिससे रुपये को और समर्थन मिल सकता है।
हालांकि, वैश्विक कारक अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये पर दबाव बना सकती हैं। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.60 प्रतिशत बढ़कर 100.05 पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है। ब्रेंट क्रूड करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया, जो भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है। ईरान से जुड़े तनाव के कारण 28 फरवरी के बाद से रुपये में चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह करीब 10 प्रतिशत कमजोर हुआ है।
घरेलू शेयर बाजार में हालांकि तेजी का रुख रहा। उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में सेंसेक्स 185.23 अंक चढ़कर 73,319.55 अंक पर और निफ्टी 33.70 अंक बढ़कर 22,713.10 अंक पर बंद हुआ। बाजार आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की।



