राहत की खबर: ग्लोबल ऑयल संकट के बीच भारत पहुंचा 20,000 टन एलपीजी टैंकर

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऑयल व एलपीजी आपूर्ति को लेकर मंडराते संकट के बादलों के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी खींचतान और युद्ध जैसी आशंकाओं के कारण जहां पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई हैं, वहीं भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने में पूरी तरह कामयाब रहा है। इसी कड़ी में, करीब 20 हजार टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर आ रहा मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एक विशाल टैंकर सिमी बेहद सुरक्षित तरीके से गुजरात के कच्छ जिले में स्थित रणनीतिक कांडला पोर्ट पर लंगर डाल चुका है।

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भारतीय सीमा में घुसा जहाज

यह मालवाहक जहाज 13 मई को दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले हो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर भारतीय सीमा में दाखिल हुआ। वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे हाहाकार के बीच इस टैंकर का भारत पहुंचना किसी बड़ी कूटनीतिक और नौसैनिक कामयाबी से कम नहीं माना जा रहा है, क्योंकि इस रूट पर लगातार जहाजों के अपहरण और हमलों का खतरा बना हुआ था।

Oil Crisis

भौगोलिक और व्यापारिक दृष्टि से देखा जाए तो होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्ग माना जाता है। यह संकरा समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और फिर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से सीधे जोड़ता है। पूरी दुनिया की कुल ऊर्जा आपूर्ति, विशेषकर कच्चे तेल और एलपीजी का एक बहुत बड़ा हिस्सा हर रोज इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

यही कारण है कि जब भी पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, तो पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर टिक जाती हैं, क्योंकि यहां होने वाली एक छोटी सी हलचल भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार सकती है। ऐसे नाजुक समय में, जब इस क्षेत्र में तनाव को लेकर दुनिया भर के देश सहमे हुए हैं, भारत का यह एलपीजी टैंकर सुरक्षित पहुंचना देश के करोड़ों उपभोक्ताओं और घरेलू ईंधन की निर्बाध आपूर्ति के लिए बेहद सुखद संदेश है।

ईरानी विदेश मंत्री ने की एस जयशंकर से बात

इस बड़ी कामयाबी और सुरक्षित नौपरिवहन के पीछे भारत और ईरान के बीच परदे के पीछे चल रही बेहद अहम और उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत रही है। वैश्विक चिंताओं के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से टेलीफोन पर लंबी और विस्तृत बातचीत की। इस महत्वपूर्ण संवाद के दौरान अराघची ने भारत को आश्वस्त करते हुए साफ शब्दों में कहा कि नई दिल्ली जैसे तमाम मित्र देशों को अपनी व्यापारिक और समुद्री सुरक्षा के लिए पूरी तरह से ईरान पर भरोसा रखना चाहिए।

ईरानी विदेश मंत्री ने इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी अपनी बात साझा की। उन्होंने लिखा कि, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा व्यवस्था पर बेहद सकारात्मक और सार्थक चर्चा हुई है। उन्होंने दुनिया को संदेश देते हुए कहा कि ईरान हमेशा से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा का अपना ऐतिहासिक दायित्व निभाता आया है और आगे भी इसे पूरी मुस्तैदी से निभाता रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि, ईरान भारत सहित अपने सभी मित्र देशों के लिए एक बेहद भरोसेमंद साझेदार है और वह इस समुद्री क्षेत्र में होने वाली तमाम व्यापारिक गतिविधियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

केवल बातचीत ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी भारत आ रहे जहाजों को एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान किया जा रहा है। रक्षा और रणनीतिक सूत्रों से मिली अंदरूनी जानकारी के मुताबिक, 13 मई को भारत आ रहा एक अन्य एलपीजी टैंकर एमवी सनशाइन भी उसी समय होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर रहा था।

इंडियन नेवी निभा रही अहम भूमिका

इस जहाज को भी सुरक्षित भारतीय बंदरगाह तक पहुंचाने के लिए हर संभव रणनीतिक और तकनीकी सहायता मुहैया कराई जा रही थी। चौंकाने वाली बात यह है कि, यह फारस की खाड़ी के अशांत माहौल से सुरक्षित निकालकर भारत लाया जाने वाला 15वां एलपीजी जहाज था। भारत सरकार की इस रणनीति के तहत जहाजों को सुरक्षित भारत पहुंचाने के लिए बैकस्टेज में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां एक साथ मिलकर काम कर रही हैं।

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इस पूरे रेस्क्यू और एस्कॉर्ट ऑपरेशन में भारतीय नौसेना सबसे अग्रणी भूमिका निभा रही है, जिसके युद्धपोत और टोही विमान इस पूरे समुद्री गलियारे पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहे हैं और भारतीय हितों वाले जहाजों को सुरक्षा घेरा प्रदान कर रहे हैं। इस पूरे मामले पर ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी तेहरान का रुख स्पष्ट किया है।

शांति की उम्मीद

उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि जैसे ही इस पूरे क्षेत्र में पूर्ण शांति स्थापित होगी, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक बेहतर और सुगम हो जाएगी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भरोसा दिलाया कि शांति बहाली के बाद इस रूट पर पारदर्शिता और सुरक्षा में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी और ईरान की तरफ से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों से बाहर जाकर कभी कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका इस समय किसी भी तरह की गंभीर कूटनीति में शामिल नहीं दिख रहा है, लेकिन इसके बावजूद यदि क्षेत्रीय शक्तियों के सहयोग से यहां शांति स्थापित होती है, तो आने वाले दिनों में पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता देखने को मिलेगी, जिसका सीधा फायदा भारत जैसे विकासशील देशों को होगा।

 

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