रवि किशन का छलका दर्द, कहा- 34 साल बाद आया मेरा वक्त, कभी उड़ाया जाता था मजाक

बॉलीवुड और भोजपुरी सिनेमा के मशहूर अभिनेता और मौजूदा सांसद रवि किशन इन दिनों खूब सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई फिल्म या उनका कोई राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि उनके संघर्ष के दिनों की एक भावुक कहानी है, जो उन्होंने खुद सुनाई है। दरअसल, रवि किशन ने हाल ही में अपने करियर के शुरुआती दौर को याद करते हुए कुछ ऐसी बातें शेयर कीं, जिसने न सिर्फ प्रशंसकों बल्कि उनके साथ मौजूद लोगों को भी इमोशनल कर दिया।

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‘अलायंस’ में किया खुलासा

रवि किशन इन दिनों प्राइम वीडियो पर आ रहे एक नए रियलिटी शो ‘अलायंस’ का हिस्सा बने हुए हैं। इस शो की मेजबानी मशहूर अभिनेता कुणाल खेमू कर रहे हैं। खास बात यह है कि, इस शो में रवि किशन अकेले नहीं, बल्कि अपनी बेटी रीवा किशन के साथ हिस्सा ले रहे हैं। शो की शूटिंग के दौरान जब कंटेस्टेंट्स के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, तो रवि किशन ने अपने अतीत के उन पन्नों को खोल दिया, जिन्हें शायद उन्होंने लंबे समय से अपने भीतर संजो कर रखा था।

90 के दशक की तल्ख यादें

रवि किशन ने बताया कि, जब उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था, उस वक्त उन्हें कई कलाकारों की उपेक्षा और मजाक का सामना करना पड़ा था। उन्होंने खुलकर कहा कि, 90 के दशक में इंडस्ट्री के कई लोग उन्हें भाव तक नहीं देते थे। यही नहीं, जो कलाकार बाद में बड़े सितारे बनकर उभरे, उनमें से कुछ लोग उस वक्त रवि किशन का मजाक उड़ाया करते थे। यह सुनकर शो में मौजूद बाकी कंटेस्टेंट्स भी हैरान रह गए, क्योंकि आज रवि किशन को इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित और अनुभवी कलाकारों में गिना जाता है।

Ravi Kishan

एक्टर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, उनकी जिंदगी में ऐसे कई लोग आए, जिन्होंने उनका उपहास किया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जिस दौर में बाकी कलाकार एक-एक करके बड़े स्टार बनते जा रहे थे, वे खुद बस दूर खड़े होकर उन्हें सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए देखते रह जाते थे। यह अनुभव किसी भी संघर्षशील कलाकार के लिए बेहद तकलीफदेह हो सकता है और रवि किशन ने इसे बिना किसी झिझक के सबके सामने साझा किया।

खुद को किया तैयार

सबसे दिलचस्प बात यह है कि रवि किशन ने बताया कि उन्होंने इंडस्ट्री में आने से पहले खुद को हर मोर्चे पर पूरी तरह तैयार किया था। उनका मानना था कि, एक कामयाब अभिनेता में जो भी गुण और हुनर होने चाहिए, वे सारे उन्होंने बड़ी मेहनत से सीखे थे। उन्होंने बताया कि उनकी आवाज बेहद प्रभावशाली थी, उन्हें घुड़सवारी करनी आती थी और एक्शन सीक्वेंस करने में भी वे माहिर थे। इसके अलावा उन्होंने उर्दू और हिंदी भाषा को भी बाकायदा सीखा था, ताकि संवाद अदायगी में कोई कमी न रह जाए।

रवि किशन ने यह भी बताया कि उन्होंने थिएटर में काम किया था और डांस की भी विधिवत ट्रेनिंग ली थी। उनका कहना था कि इन सभी तैयारियों के बावजूद वे इंडस्ट्री में पीछे रह गए, जबकि बाकी लोग आगे निकलते चले गए। इस बात ने उन्हें अंदर ही अंदर बहुत तकलीफ दी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

 खुद को देते थे तसल्ली

एक्टर ने बताया कि, उस मुश्किल दौर में वे खुद को यह कहकर तसल्ली देते थे कि, अगर बाकी लोगों का वक्त आया है, तो एक दिन उनका भी वक्त जरूर आएगा। हालांकि उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनके इस इंतजार की घड़ी इतनी लंबी खिंच जाएगी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्हें नहीं पता था कि उनका असली समय आने में पूरे 34 साल का लंबा वक्त लग जाएगा।
यह सुनकर शो में मौजूद तमाम कंटेस्टेंट्स भी काफी प्रभावित हुए, क्योंकि इतने लंबे संघर्ष के बाद भी हार न मानना और अपने सपनों पर भरोसा बनाए रखना आसान बात नहीं है।

मेहनत रंग लाई

रवि किशन ने आगे बताया कि आखिरकार वह दिन आया जब उनकी मेहनत रंग लाई, लेकिन इसके लिए उन्हें पूरे 34 साल का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उसी साल उन्होंने बेस्ट एक्टर की श्रेणी में लगभग सभी बड़े पुरस्कार अपने नाम किए। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जिन मंचों पर पहले उन्हें बुलाया तक नहीं जाता था, आज उन्हीं मंचों पर उनका भव्य सम्मान किया गया।

उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा था जब लोग उन्हें अपने कार्यक्रमों में बुलाना तक जरूरी नहीं समझते थे और उनका मजाक उड़ाना आम बात हो गई थी। उस वक्त किसी को यह भरोसा नहीं था कि रवि किशन आगे चलकर कुछ बड़ा कर पाएंगे, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और वे खुद इस बात के गवाह हैं कि मेहनत और धैर्य आखिरकार रंग लाते ही हैं। रवि किशन की यह भावुक कहानी सुनकर शो में मौजूद बाकी कंटेस्टेंट्स की आंखें भी नम हो गईं।

1990 के दशक में की थी शुरुआत

रवि किशन के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्होंने अपने अभिनय जीवन की शुरुआत 1990 के दशक की शुरुआत में हिंदी फिल्मों से की थी। उनकी शुरुआती फिल्मों में ‘पितांबर’, ‘आतंक’, ‘आर्मी’ और ‘जख्मी दिल’ जैसी फिल्में शामिल हैं। इस दौर में उन्होंने बॉलीवुड की कई फिल्मों में छोटे-बड़े किरदार निभाए, लेकिन हिंदी सिनेमा में उन्हें वह मुकाम नहीं मिल पाया, जिसकी उन्हें तलाश थी।

Ravi Kishan

हालांकि, किस्मत ने उनके लिए एक अलग राह तय कर रखी थी। रवि किशन को असली पहचान और स्टारडम भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से मिला। यहां उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर खुद को स्थापित किया और आगे चलकर भोजपुरी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में शुमार हो गए। उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि आज उन्हें भोजपुरी इंडस्ट्री के सबसे सफल और सम्मानित कलाकारों में गिना जाता है।

राजनीति में रखा कदम

फिल्मी करियर के अलावा रवि किशन ने राजनीति में भी कदम रखा और आज वे एक सांसद के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनकी यह कहानी न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष कर रहे कलाकारों के लिए, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक प्रेरणा है, जो मुश्किल हालातों में भी अपने सपनों को जिंदा रखे हुए है। रवि किशन का यह सफर साबित करता है कि अगर मेहनत और भरोसा बना रहे, तो देर भले ही हो, लेकिन सफलता जरूर मिलती है।

 

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