राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: लवकुश मिश्र के घर पर चलेगा बुलडोजर, ADA ने थमाया नोटिस

अयोध्या। अयोध्या के चर्चित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा की मुश्किलें अब सिर्फ आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि उनकी संपत्ति पर भी प्रशासनिक कार्रवाई की तलवार लटक गई है। अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने आरोपी की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर बन रही एक बिल्डिंग को लेकर नोटिस जारी किया है, जिसने पूरे मामले को एक नई गंभीरता दे दी है।

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क्या है पूरा मामला

राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे में चोरी का मामला सामने आने के बाद से ही यह घटना सुर्खियों में बनी हुई है। जांच में लवकुश मिश्रा का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया, जो कथित तौर पर मंदिर के दफ्तर से जुड़े काम में शामिल था। इसी दौरान चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी और चोरी की शिकायतें मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमला हरकत में आया।

Ram Temple

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे आरोपी से जुड़े कई और तथ्य भी सामने आने लगे। इसी क्रम में यह बात उजागर हुई कि जिस दौरान लवकुश मिश्रा राम मंदिर के दफ्तर में कार्यरत था, उसी अवधि में उसने एक जमीन खरीदी थी। खास बात यह रही कि यह जमीन उसने अपने नाम पर न खरीदकर अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदी। इस तरह की खरीद-फरोख्त ने जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि आमतौर पर संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों में परिजनों के नाम पर संपत्ति खरीदने का पैटर्न देखा जाता है।

जमीन सौदे की पूरी डिटेल

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, यह जमीन सौदा 16 अक्टूबर 2025 को हुआ था। यह जमीन सोहावल तहसील के मंगसी परगना क्षेत्र में स्थित है और इसे कमल स्वरूप सिंह नामक व्यक्ति से खरीदा गया था। रजिस्ट्री के दस्तावेजों में इस जमीन की कीमत मात्र 8.8 लाख रुपये दर्शाई गई थी।

हालांकि जब मौजूदा बाजार दरों के हिसाब से इस प्रॉपर्टी का वास्तविक मूल्यांकन किया गया, तो यह करीब 25 लाख रुपये के आसपास बैठता है। यानी रजिस्ट्री में दिखाई गई कीमत और बाजार की वास्तविक कीमत के बीच लगभग तीन गुने का अंतर है, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में अक्सर स्टांप ड्यूटी बचाने या फिर संपत्ति के असली स्रोत को छिपाने की मंशा से कम कीमत दिखाई जाती है, हालांकि इस पहलू की अलग से जांच की आवश्यकता होगी।

अवैध निर्माण का खुलासा

इसी बेशकीमती जमीन पर सुप्रिया मिश्रा के नाम पर एक बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा था। जब अयोध्या विकास प्राधिकरण के अधिकारी नियमित जांच अभियान के तहत मौके पर पहुंचे, तो उन्हें कई गंभीर अनियमितताएं नजर आईं। निर्माण कार्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों और नियमों के अनुरूप नहीं हो रहा था। बिल्डिंग बनाने में जरूरी कायदे-कानूनों की खुलेआम अनदेखी की जा रही थी, जो शहरी विकास प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।

अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण करने के तुरंत बाद इस पर संज्ञान लिया और बिना समय गंवाए कार्रवाई शुरू कर दी। इसी क्रम में लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा को औपचारिक नोटिस थमाया गया, जिसमें निर्माण से जुड़े कई अहम सवाल पूछे गए हैं।

नोटिस में पूछे गये ये सवाल

अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए इस नोटिस में मुख्य रूप से यह पूछा गया है कि, क्या इस बिल्डिंग के निर्माण के लिए कोई नक्शा विधिवत रूप से पास कराया गया था या नहीं। अगर नक्शा पास कराया गया है, तो प्राधिकरण ने संबंधित सभी कागजात और दस्तावेज एक सप्ताह के भीतर कार्यालय में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

Ram Temple

यह नोटिस स्पष्ट रूप से चेतावनी देता है कि अगर तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया या फिर आवश्यक कागजात प्रस्तुत नहीं किए गए, तो प्राधिकरण इस अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। इस कार्रवाई में ध्वस्तीकरण यानी बुलडोजर चलाकर निर्माण को गिराने की प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है। फिलहाल प्राधिकरण की तरफ से आरोपी के परिवार के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

तेजी से हो रही चढ़ावा चोरी की जांच

राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी चोरी का यह मूल मामला पहले से ही गहन जांच के दायरे में है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें इस पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई हैं। मंदिर जैसे धार्मिक और आस्था से जुड़े स्थान पर चढ़ावे की चोरी होना अपने आप में एक संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर श्रद्धालुओं के विश्वास पर भी असर पड़ता है।

अब जब आरोपी से जुड़ी इस बेनामी संपत्ति जैसी प्रतीत होने वाली जमीन और उस पर बने अवैध निर्माण पर भी सीधी कार्रवाई शुरू हो गई है, तो यह पूरा मामला पहले से कहीं ज्यादा गंभीर और पेचीदा हो गया है। जानकारों का मानना है कि अगर जांच में यह साबित होता है कि यह संपत्ति चढ़ावे की चोरी से जुड़े अवैध धन से खरीदी गई थी, तो आरोपी पर धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी धाराओं में भी कार्रवाई हो सकती है।

 जल्द आएंगे नतीजे

फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आरोपी लवकुश मिश्रा और उनका परिवार इस नोटिस का क्या जवाब देता है। अगर वे तय समय सीमा के भीतर वैध कागजात प्रस्तुत करने में असफल रहते हैं, तो अयोध्या विकास प्राधिकरण बिना किसी देरी के इस अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चला सकता है। साथ ही, चढ़ावा चोरी के मूल मामले की जांच भी अपनी गति से जारी रहेगी, जिसके नतीजे आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं।

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