
अयोध्या। चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि पर आज अयोध्या की पावन धरती ने एक ऐसा दृश्य दिखा, जो युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर राम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में साक्षात सूर्य देव ने अपने वंशज का तिलक किया। ठीक दोपहर के बारह बजे, जब पूरी अयोध्या भए प्रगट कृपाला के भजनों से गूंज रही थी, तब सूर्य की एक सुनहरी किरण ने रामलला के ललाट को आलोकित कर दिया।
इसे भी पढ़ें- जेवर एयरपोर्ट बनेगा महा कनेक्टिविटी हब, अयोध्या से चारधाम तक के लिए होंगी सीधी उड़ानें
नम हुईं भक्तों की आंखें
यह कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि आधुनिक विज्ञान और प्राचीन भारतीय परंपरा का एक ऐसा मेल था जिसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। लगभग चार मिनट तक रामलला के मस्तक पर सूर्य की किरणों का यह दिव्य अभिषेक चलता रहा और इस दौरान वहां मौजूद हर भक्त की आंखें श्रद्धा से नम थीं।

इस अलौकिक घटना के पीछे भारतीय वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत और इंजीनियरिंग का कमाल छिपा है। रुड़की के सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने मंदिर की वास्तुकला में एक ऐसा ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम स्थापित किया है, जो बिना किसी बिजली या बैटरी के काम करता है। मंदिर के तीसरे तल पर लगे विशेष रिफ्लेक्टर और उच्च क्षमता वाले दर्पणों के माध्यम से सूर्य की किरणों को पाइप के जरिए नीचे गर्भगृह तक लाया गया।
दर्पणों और लेंसों के सटीक कोण की मदद से इन किरणों को ठीक 75 मिलीमीटर के गोलाकार तिलक के रूप में रामलला के ललाट के मध्य में केंद्रित किया गया। यह पूरी प्रक्रिया सूर्य की वार्षिक गति और दिशा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि हर साल रामनवमी के दिन ठीक इसी समय सूर्य देव रामलला का राजतिलक करें।
भगवन राम के कुलदेवता है सूर्यदेव
इस वर्ष की रामनवमी आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही क्योंकि आज रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का विशेष संयोग बना हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव भगवान राम के कुलदेवता हैं और अपने आराध्य का इस प्रकार अभिनंदन करना करोड़ों हिंदुओं के लिए गौरव का क्षण बन गया।
सूर्य तिलक के इस भव्य नजारे का गवाह बनने के लिए न केवल देश बल्कि विदेश से भी लाखों श्रद्धालु डिजिटल माध्यमों और टीवी चैनलों के जरिए जुड़े रहे। मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पूरी अयोध्या में जगह-जगह बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई थीं ताकि जो लोग मुख्य मंदिर तक नहीं पहुंच पाए हैं, वे भी इस दिव्य पल के साक्षी बन सकें।
प्रभु के सूर्यतिलक का दिव्य दृश्य pic.twitter.com/4k9OwQuH38
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) March 27, 2026
इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और वैज्ञानिकों की टीम पिछले कई दिनों से रात-दिन एक किए हुए थी। लगातार तीन दिनों तक इसका सफल ट्रायल किया गया ताकि मुख्य दिन बादलों या किसी तकनीकी त्रुटि की गुंजाइश न रहे। गुरुवार को हुए अंतिम परीक्षण में जब परिणाम शत-प्रतिशत सटीक आए, तब जाकर वैज्ञानिकों ने राहत की सांस ली।
बदली गर्भ गृह की आभा
आज दोपहर में जैसे ही सूर्य की किरण ने प्रतिमा के ललाट को छुआ, पूरे गर्भगृह की आभा बदल गई और रामलला की श्याम वर्ण प्रतिमा स्वर्ण की भांति चमक उठी। भक्तों के लिए यह दृश्य साक्षात त्रेतायुग की वापसी जैसा था, जब भगवान के जन्म पर देवता स्वर्ग से पुष्प वर्षा करते थे।
प्रशासन ने इस महापर्व के लिए सुरक्षा के इतने कड़े इंतजाम किए थे कि, परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। सरयू नदी के तट से लेकर रामपथ तक लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ड्रोन कैमरों और हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। पूरी अयोध्या को फूलों और रोशनी से दुल्हन की तरह सजाया गया था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे नए भारत की सांस्कृतिक विजय बताया है। रामलला के इस सूर्य तिलक ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अपनी विरासत को संरक्षित करते हुए विज्ञान की ऊंचाइयों को छूने में सक्षम है। यह चार मिनट का अंतराल इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो गया है, जिसने करोड़ों सनातनी हृदय को भक्ति के रस में डुबो दिया।
इसे भी पढ़ें- कल अयोध्या आएंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, बदलेगा रामलला के दर्शन का समय, डायवर्जन भी रहेगा



