खत्म हो रही लीज, राजा महमूदाबाद की संपत्तियां अब होंगी सरकार की, बेदखल किए जाएंगे कब्जेदार

लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ में दशकों से काबिज शत्रु संपत्तियों के कब्जेदारों और किराएदारों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। केंद्र सरकार और शत्रु संपत्ति संरक्षक कार्यालय ने राजा महमूदाबाद की उन संपत्तियों को वापस अपने कब्जे में लेने की तैयारी पूरी कर ली है, जिनकी 99 वर्ष की लीज अवधि अगले वर्ष समाप्त हो रही है।

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लीज की समय सीमा बढ़ाने से इंकार

गृह मंत्रालय के सख्त रुख के बाद यह साफ हो गया है कि, अब इन संपत्तियों की लीज को किसी भी कीमत पर आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। नवाबों के शहर लखनऊ के दिल में बसी अरबों रुपये की ये संपत्तियां अब वापस सरकार के अधीन होंगी, जिससे उन रसूखदारों और व्यापारियों में हड़कंप मच गया है, जो वर्षों से इन इमारतों में मामूली किराए या अवैध कब्जे के सहारे अपना साम्राज्य चला रहे थे।

Raja Mahmudabad

लखनऊ की भौगोलिक और ऐतिहासिक संरचना में राजा महमूदाबाद की संपत्तियों का एक बड़ा हिस्सा शामिल है। आजादी से पहले और बाद में राजा द्वारा दी गई 99 साल की लीज अब अपने अंतिम चरण में है। प्रशासन में बैठे उच्च सूत्रों का कहना है कि इन संपत्तियों की लीज अवधि विस्तार के सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं। राजधानी में लगभग दो सौ ऐसी शत्रु संपत्तियां चिह्नित हैं, जिनमें से अधिकांश पर किराएदारों का कब्जा है।

किराया भी नहीं देते किरायेदार

हैरानी की बात यह है कि, इन बेशकीमती इमारतों में रहने या व्यापार करने वाले अधिकांश लोगों ने वर्षों से किराया तक जमा नहीं किया है। आंकड़ों के अनुसार, इन कब्जेदारों पर करोड़ों रुपये का किराया बकाया है, जिसके लिए प्रशासन लगातार नोटिस जारी कर रहा है, लेकिन वसूली की रफ्तार बेहद सुस्त रही है। सबसे अधिक 125 शत्रु संपत्तियां सदर तहसील क्षेत्र में आती हैं, जहां प्रशासन ने अब बेदखली की कार्रवाई के लिए खाका तैयार करना शुरू कर दिया है।

शत्रु संपत्ति संरक्षक कार्यालय की जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कई कब्जेदारों ने न केवल लीज की शर्तों का उल्लंघन किया है, बल्कि संपत्तियों के मूल स्वरूप के साथ भी भारी छेड़छाड़ की है। ऐतिहासिक महत्व की इन इमारतों में बिना अनुमति के बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य कराए गए और कई जगहों पर तो कब्जेदारों ने इन संपत्तियों को तीसरी पार्टी को अवैध रूप से किराए पर चढ़ा दिया है।

गृह मंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब ऐसी सभी संपत्तियों की सूची तैयार की जा रही है, जिनकी लीज 2025-26 में समाप्त हो रही है। अधिकारी ने पुष्टि की है कि, जैसे ही लीज की अवधि समाप्त होगी, प्रशासन पुलिस बल के सहयोग से इन इमारतों को सील करने और अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर देगा।

इस जिलों में भी हैं राजा महमूदाबाद की संपत्तियां

राजा महमूदाबाद के साम्राज्य का इतिहास काफी विस्तृत है, जिनकी जमींदारी केवल लखनऊ ही नहीं बल्कि सीतापुर और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों तक फैली हुई थी। आजादी के बाद राजा अमीर अहमद खान इराक चले गए और 1957 में उन्होंने पाकिस्तान की नागरिकता ले ली, जिसके बाद वे लंदन जाकर बस गए। उनके निधन के बाद उनके पुत्र राजा मोहम्मद अमीर मोहम्मद खान उर्फ सुलेमान मियां 1975 में भारत वापस लौटे और इन बेशकीमती संपत्तियों पर अपना दावा ठोक दिया।

इसके बाद शुरू हुई एक ऐसी कानूनी जंग जो दशकों तक निचली अदालतों से लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट तक चली। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा शत्रु संपत्ति अध्यादेश पारित किए जाने के बाद स्वामित्व की यह कानूनी लड़ाई पूरी तरह सरकार के पक्ष में झुक गई और अंततः इन सभी संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया।

इन बिल्डिगों पर चलेगा कानून का डंडा

यह पूरा मामला 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों की पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उस दौरान जो लोग भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए और वहां की राष्ट्रीयता स्वीकार कर ली, उनकी संपत्तियों को ‘भारत की रक्षा अधिनियम 1962’ के तहत शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था। इसी कानून की जद में राजा महमूदाबाद की संपत्तियां भी आईं।

Raja Mahmudabad

लखनऊ की कई प्रतिष्ठित इमारतें आज भी इस विवाद और कानूनी उलझन का गवाह हैं। इनमें हजरतगंज का हलवासिया कोर्ट, बटलर पैलेस, लारी बिल्डिंग, महमूदाबाद मेंशन और पुराना एसएसपी कार्यालय भवन जैसी प्रमुख इमारतें शामिल हैं। इसके अलावा कैसरबाग का हाता, गोलागंज की लाल कोठी, अमीनाबाद की वारसी बिल्डिंग और चौक इलाके की कनीज सईदा बेगम कोठी जैसी संपत्तियों पर भी अब प्रशासन का डंडा चलने वाला है।

व्यापारिक हलकों में हलचल तेज

प्रशासन की इस कार्रवाई से लखनऊ के रियल एस्टेट और व्यापारिक हलकों में भी हलचल तेज है। बटलर पैलेस जैसी ऐतिहासिक धरोहर हो या चौक की पुरानी बाड़ी खाना कोठी, इन सभी संपत्तियों का बाजार मूल्य आज अरबों में है। क्ले स्क्वायर स्थित हैदरी बेगम हवेली और नौबस्ता की पुरानी इमारतों में रहने वाले लोगों के पास अब सीमित समय बचा है।

शत्रु संपत्ति संरक्षक कार्यालय ने साफ कर दिया है कि जिन लोगों ने लीज की शर्तों को तोड़ा है या अवैध निर्माण किया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। राजधानी के विकास और सौंदर्यीकरण की योजनाओं के बीच इन संपत्तियों को वापस लेना सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से ये संपत्तियां कानूनी दांव-पेच और अवैध कब्जों के कारण उपेक्षित पड़ी थीं। अब प्रशासन की अगली बड़ी चुनौती इन संपत्तियों को खाली कराकर उनके संरक्षण और सरकारी उपयोग की योजना को अमली जामा पहनाने की होगी।

 

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