बारिश और ओलावृष्टि ने यूपी में मचाई तबाही, 24 लोगों की मौत, सीएम बोले- 24 घंटे में दो मुआवजा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले 48 घंटों से जारी मौसम के तांडव ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। जेठ की तपती गर्मी के बीच अचानक बदले मौसम के मिजाज ने जहां एक तरफ तापमान में गिरावट लाकर लोगों को राहत दी। वहीं दूसरी ओर यह बदलाव दर्जनों परिवारों के लिए मातम का सबब बन गया। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुई मूसलाधार बारिश, ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में अब तक 24 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 15 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

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आकाशीय बिजली और दीवार गिरने से हुईं मौतें

कुदरत के इस कहर ने न केवल इंसानी जानों को निशाना बनाया, बल्कि पशुधन और तैयार फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्राकृतिक आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रशासन को वॉर फुटिंग पर काम करने और पीड़ितों को महज 24 घंटे के भीतर सहायता राशि उपलब्ध कराने का सख्त फरमान जारी किया है।

WEATHER REPORT

उत्तर प्रदेश के आसमान पर पिछले दो दिनों से छाये काले बादलों और रह-रहकर हो रही ओलावृष्टि ने राज्य के कई जिलों में तबाही  मचा दी थी। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो, इस आपदा में अब तक 24 लोगों की जान जा चुकी है। सबसे ज्यादा मौतें आकाशीय बिजली गिरने और जर्जर मकानों की दीवारें गिरने की वजह से हुई हैं।

बुधवार की रात से शुरू हुआ यह सिलसिला गुरुवार और शुक्रवार तक जारी रहा, जिससे जनहानि के साथ-साथ 16 पशुओं की भी जान चली गई। प्रदेश के राहत आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, प्रभावित जिलों में राहत कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं और घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार उनका सरकारी खर्च पर समुचित इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है।

प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा की

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आपदा को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने लखनऊ में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की और स्पष्ट किया कि, संकट की इस घड़ी में सरकार पूरी तरह से प्रभावितों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में हुई जनहानि, पशुहानि और फसल के नुकसान का तत्काल सर्वे कराएं।

सीएम ने दो टूक शब्दों में कहा है कि, जनहानि के मामलों में अगले 24 घंटों के भीतर मृतकों के परिजनों को सहायता राशि मिल जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि, आपदा राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए यह बेमौसम बारिश किसी अभिशाप से कम साबित नहीं हुई है। मार्च और अप्रैल की मेहनत के बाद जब फसलें कटकर खलिहानों में पहुंचने वाली थीं या कुछ इलाकों में जायद की फसलें तैयार हो रही थीं, तभी इस मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि ने सब कुछ तबाह कर दिया।

गेहूं और दलहन की फसलों को भारी नुकसान 

कई जिलों में गेहूं और दलहन की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों को भी निर्देशित किया है कि, वे ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान का मौके पर जाकर आकलन करें ताकि किसानों को फसल बीमा योजना और राज्य आपदा निधि से उचित मुआवजा समय पर दिलाया जा सके।

बदले हुए मौसम ने केवल देहात ही नहीं बल्कि शहरी इलाकों में भी बुनियादी ढांचे को चोट पहुंचाई है। तेज आंधी की वजह से सैकड़ों पेड़ उखड़ गए हैं और बिजली के खंभे गिर जाने से कई जिलों में घंटों तक बिजली आपूर्ति ठप रही। आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं ने लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

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मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों के लिए प्रदेश के कई इलाकों में येलो अलर्ट जारी किया है, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रहने और आपदा प्रभावितों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा है।

ब्यौरा जुटा रहे अधिकारी

इस प्राकृतिक आपदा के बीच प्रशासनिक सक्रियता का आलम यह है कि खुद मुख्यमंत्री कार्यालय से राहत कार्यों की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे फील्ड पर उतरें और केवल कागजी रिपोर्ट के बजाय धरातल पर जाकर लोगों की मदद करें।

सीएम ने स्पष्ट किया है कि जनहानि के साथ-साथ जिन लोगों के मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें भी नियमानुसार तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। सरकार का जोर इस बात पर है कि प्रशासनिक औपचारिकताओं की वजह से किसी भी पीड़ित की मदद में देरी न हो।

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि, जलवायु परिवर्तन और पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण मई के महीने में इस तरह का चरम मौसम देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ चिलचिलाती धूप से लोगों को अस्थाई सुकून मिला है, वहीं दूसरी ओर जीवन और संपत्ति का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई मुश्किल है।

फिलहाल, उत्तर प्रदेश सरकार का पूरा ध्यान राहत और पुनर्वास पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद तहसील स्तर के कर्मचारी गांव-गांव जाकर नुकसान का ब्योरा जुटा रहे हैं, ताकि सोमवार तक अधिकांश मामलों में मुआवजे की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सके।

 

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