राघव चड्ढा का विस्फोटक बयान, 7 सांसदों के साथ ‘आप’ को छोड़ा, अब थामेंगे बीजेपी का हाथ

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के सियासी गलियारों में शुक्रवार को उस वक्त खलबली मच गई, जब आम आदमी पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अचानक से पार्टी छोड़ने का ऐलान किया। एक बेहद नाटकीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने न केवल अरविंद केजरीवाल का साथ छोड़ने का ऐलान किया, बल्कि ‘आप’ के संसदीय दल के  साथ भाजपा में शामिल होने की भी घोषणा की।

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बोले- गलत पार्टी में सही आदमी

प्रेस कांफ्रेस में भारी मन और कड़वाहट के साथ चड्ढा ने कहा कि, जिस पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल समर्पित कर दिए, वह अब अपने उन बुनियादी आदर्शों और मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है,  जिसके लिय उसका गठन किया गया था। राघव चड्ढा का यह कदम आम आदमी पार्टी के अस्तित्व के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अकेले नहीं, बल्कि राज्यसभा के दो-तिहाई से अधिक सांसदों के साथ पाला बदला है।

Raghav Chadha

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि, वे आम आदमी पार्टी से दूर जा रहे हैं क्योंकि वह अब जनता की आकांक्षाओं की पार्टी नहीं रह गई है। चड्ढा आगे कहा कि, पिछले कुछ वर्षों से उन्हें लगातार यह महसूस हो रहा था कि, वह एक गलत पार्टी में सही आदमी हैं।

सात सांसदों का सामूहिक विलय

उन्होंने आरोप लगाया कि, आम आदमी पार्टी अब देश हित में नहीं, बल्कि निजी स्वार्थों और फायदों के लिए काम करने वाला संगठन बनकर रह गई है। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि, उनका यह फैसला किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि उन सिद्धांतों की रक्षा के लिए है जिनसे समझौता करना अब उनके लिए मुमकिन नहीं था। उन्होंने कहा कि, वे पार्टी से दूर होकर अब जनता की ओर बढ़ रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू राज्यसभा में ‘आप’ के संसदीय दल का बीजेपी में मर्जर (विलय) है। राघव चड्ढा ने दावा किया कि उन्होंने दलबदल विरोधी कानून की पेचीदगियों को ध्यान में रखते हुए संवैधानिक प्रावधानों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने बताया कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें से दो-तिहाई से अधिक यानी 7 से ज्यादा सांसदों ने बीजेपी में विलय का सामूहिक फैसला लिया है।

इन्होंने छोड़ी पार्टी

चड्ढा के मुताबिक, इस मर्जर और इस्तीफे से जुड़ी तमाम कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई है और सभी संबंधित दस्तावेजों पर सांसदों के हस्ताक्षर के बाद इन्हें राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया गया है। यह कदम तकनीकी रूप से सांसदों की सदस्यता को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है, क्योंकि दो-तिहाई बहुमत के साथ विलय होने पर दलबदल कानून लागू नहीं होता।

राघव चड्ढा ने उन सात नामों का भी खुलासा किया जो उनके साथ इस नई राजनीतिक यात्रा पर निकल पड़े हैं। इनमें सबसे हैरान करने वाला नाम अशोक कुमार मित्तल का है, जिन्हें महज 15 दिन पहले ही राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में पार्टी का डिप्टी लीडर बनाया गया था। अशोक मित्तल के अलावा इस फेहरिस्त में पंजाब से आने वाले दिग्गज और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, प्रसिद्ध पर्यावरणविद् बलबीर सिंह सीचेवाल, विक्रमजीत सिंह साहनी और संदीप पाठक जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

केजरीवाल की व्यक्तिगत क्षति

इसके अलावा दिल्ली से राज्यसभा सांसद और पार्टी की तेजतर्रार नेता स्वाति मालीवाल का नाम भी इस सूची में शामिल है, जो पिछले कुछ समय से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रही थीं। चड्ढा ने बताया कि राजिंदर गुप्ता भी इस फैसले के साथ हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तीन सांसद उनके साथ मौके पर मौजूद थे, जो इस ऐतिहासिक टूट की गवाही दे रहे थे।

आम आदमी पार्टी के लिए यह केवल सांसदों की संख्या कम होने का मामला नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक हार जैसा है। राघव चड्ढा जैसे कद्दावर नेता का जाना, जो पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘आप’ का चेहरा माने जाते थे, अरविंद केजरीवाल के लिए एक व्यक्तिगत और राजनीतिक क्षति है।

Raghav Chadha

चड्ढा ने आरोप लगाया कि पार्टी की मूल नैतिकता अब समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जिस नैतिकता के दम पर वे राजनीति में आए थे, अब उसी की हत्या होते देखना उनके लिए असहनीय था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी में शामिल होने के फैसले को देश की मुख्यधारा की राजनीति से जुड़ने का प्रयास बताया। उनके अनुसार, अब समय आ गया है कि वे ऐसी जगह अपनी ऊर्जा लगाएं जहां देश निर्माण का वास्तविक कार्य हो रहा हो।

‘आप’ में घुटता था दम- राघव

इस महा-विलय के बाद अब राज्यसभा में समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे, जहां एक तरफ बीजेपी का पलड़ा और भारी होगा। वहीं ‘आप’ के पास अब उच्च सदन में केवल गिने-चुने नाम ही शेष रह जाएंगे। राघव चड्ढा ने साफ किया कि इस फैसले के पीछे लंबी सोच-विचार और पार्टी के भीतर बढ़ते दमघोंटू माहौल की बड़ी भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि वे अपनी नई भूमिका के लिए पूरी तरह तैयार हैं और जल्द ही आधिकारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, राघव चड्ढा का यह कदम पंजाब और दिल्ली की राजनीति में एक नए ध्रुवीकरण की शुरुआत है। आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी के भीतर और भी बड़ी टूट की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि राघव चड्ढा ने यह संकेत दे दिया है कि उनके संपर्क में कई और नेता हैं जो वर्तमान नेतृत्व से असंतुष्ट हैं।

 

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