
नई दिल्ली। भारत के राजनीतिक गलियारों में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर छिड़ी जंग अब और तेज हो गई है। पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष, विपक्ष को महिला विरोधी करार दे रहा है, तो वहीं विपक्ष इसे पिछड़ी और अल्पसंख्यक जातियों की महिलाओं के खिलाफ गहरी साजिश बता रहा है। कांग्रेस की कद्दावर नेता और सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे लोकतंत्र के इतिहास का एक बेहद संवेदनशील मोड़ करार दिया है।
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सरकार के लिए काला दिन
प्रियंका गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि, केंद्र की मोदी सरकार महिला आरक्षण के नाम पर देश की आधी आबादी को गुमराह कर रही है, जबकि उसका असली मकसद परिसीमन है और इसकी आड़ में अपनी राजनीतिक बिसात बिछाना व सत्ता पर एकाधिकार जमाए रखना है। उन्होंने शुक्रवार 17 अप्रैल को संसद में हुई घटना को एनडीए सरकार के लिए एक काला दिन बताया और कहा ये विपक्ष की एकजुटता व लोकतंत्र की जीत है।

प्रियंका गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब महिला आरक्षण कानून को लागू करने की समयसीमा और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर संसद से लेकर सड़क तक घमासान मचा हुआ है। प्रियंका ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि, सरकार को पहली बार ऐसा जोरदार राजनीतिक झटका लगा है, जिसने उसकी नीतियों के पीछे छिपे सच को जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
2023 वाले कानून को लागू करें
उनका कहना है कि, सरकार की यह स्थिति किसी बाहरी दबाव का परिणाम नहीं है, बल्कि खुद उसकी अपनी भ्रामक नीतियों और रणनीतियों का नतीजा है। प्रियंका ने जोर देकर कहा कि, महिलाओं के अधिकारों को अब और अधिक समय तक टाला नहीं जा सकता और जो कानून 2023 में संसद में पारित हुआ था, उसे बिना किसी बहानेबाजी के तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने सरकार को हकीकत का आइना दिखाते हुए कहा कि, अब वह दौर बीत चुका है जब केवल मीडिया मैनेजमेंट और बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए जनता की आंखों में धूल झोंकी जा सकती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि, मौजूदा घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि सरकार की पुरानी रणनीति अब काम नहीं कर रही है और देश की जनता, विशेषकर महिलाएं, सरकार के हर कदम को गहराई से देख रही हैं।
ठोस परिणाम चाहती हैं महिलाएं
प्रियंका ने इसे सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक पराजय बताई और कहा कि, यह संकट सरकार ने खुद अपने अहंकार और अपारदर्शी कार्यशैली से पैदा किया है। उन्होंने आगाह किया कि, देश की महिलाएं अब पहले से कहीं अधिक जागरूक हैं और वे केवल नारों या चुनावी घोषणाओं से प्रभावित होने वाली नहीं हैं। महिलाओं के सामने आज जो चुनौतियां हैं, चाहे वह सुरक्षा का मुद्दा हो या आर्थिक स्वावलंबन का, वे लगातार जटिल होती जा रही हैं और महिलाएं अब ठोस परिणाम चाहती हैं।
प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन में इस बात पर भी जोर दिया कि, बदलाव केवल दिखावे से नहीं आता है बल्कि इसके लिए कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि अब समय केवल घोषणाएं करने या श्रेय लेने का नहीं है, बल्कि निर्णय लेने और उन्हें धरातल पर उतारने का है। उन्होंने सवाल उठाया कि, जब 2023 में महिला आरक्षण कानून को संसद ने सर्वसम्मति से पारित किया था, तो फिर उसे लागू करने के लिए परिसीमन और जनगणना जैसी पेचीदा शर्तें क्यों लगाई जा रही है?
जनता पर थोपा जा रहा परिसीमन
प्रियंका के अनुसार, यदि सरकार के मन में खोट नहीं है और वह वास्तव में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना चाहती है, तो उसे तकनीकी अड़चनों का बहाना बनाना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि, यदि कानून के क्रियान्वयन में कोई छोटी-मोटी तकनीकी बाधा है, तो उसे तत्काल छोटे संशोधनों के माध्यम से दूर किया जा सकता है, लेकिन पूरी प्रक्रिया को सालों के लिए लटका देना महिलाओं के साथ विश्वासघात है।

प्रियंका गांधी ने बीजेपी की कथित साजिश का खुलासा करते हुए कहा कि, विपक्ष किसी भी कीमत पर महिला आरक्षण की आड़ में थोपी जा रही परिसीमन योजना का समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि, बीजेपी की पूरी योजना महिला आरक्षण को एक ट्रोजन हॉर्स की तरह इस्तेमाल करने की है, ताकि इसकी आड़ में परिसीमन की प्रक्रिया को अंजाम देकर अपनी सत्ता को स्थायी रूप से सुरक्षित किया जा सके।
राजनीतिक हलकों में खलबली
प्रियंका ने इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि, बीजेपी महिलाओं के संवैधानिक हक को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ा रही है। उन्होंने कल लोकसभा में हुए घटनाक्रमों को याद करते हुए कहा कि, वहां जो कुछ भी हुआ, वह विपक्षी एकता की एक बड़ी मिसाल है और इससे यह संदेश गया है कि तानाशाही रवैया लोकतंत्र में अधिक समय तक सफल नहीं हो सकता।
प्रियंका गांधी के इस कड़े रुख ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि, विपक्ष अब इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। प्रियंका ने अपने बयान के समापन में कहा कि, यह लड़ाई केवल एक कानून की नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता के खिलाफ है जो महिलाओं को केवल एक ‘वोट बैंक’ के रूप में देखती है।
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