
मेरठ। मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोमवार रात भारी अफरा-तफरी का माहौल रहा। दरअसल, सीलिंग और सख्त कार्रवाई की आशंका के चलते व्यापारियों, अस्पताल संचालकों और अन्य प्रतिष्ठान संचालकों ने देर रात तक अपनी व्यावसायिक गतिविधियां समेटनी शुरू कर दीं। सुबह से ही क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। दमकल गाड़ियां भी मौके पर मौजूद हैं। बड़ी संख्या में व्यापारी भी सेंट्रल मार्केट में जमा हो गये हैं। सपा विधायक अतुल प्रधान भी व्यापारियों के बीच पहुंचे हैं।
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आस्तित्व पर संकट
उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला एक बार फिर बड़े आंदोलन की दहलीज पर खड़ा है। यहां के शास्त्रीनगर स्थित एक सेंट्रल मार्केट पर आज अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद सोमवार की पूरी रात मेरठ के व्यापारियों के लिए कयामत की रात जैसी रही, क्योंकि एक तरफ जहां प्रशासन भारी पुलिस बल और पीएसी के साथ बाजार को सील करने की तैयारी में जुटा है।

वहीं, दूसरी तरफ हजारों व्यापारियों ने अपनी रोजी-रोटी बचाने के लिए करो या मरो का ऐलान कर दिया है। सोमवार की रात जैसे ही ध्वस्तीकरण और सीलिंग की खबरें पुख्ता हुईं, वैसे ही सेंट्रल मार्केट में भी हड़कंप मच गया। सबसे संवेदनशील स्थिति क्षेत्र के अस्पतालों की रही, जहां डॉ. अशोक गर्ग के अस्पताल सहित कई नर्सिंग होम्स में रात भर बैठकों का दौर चलता रहा।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की तलवार लटकते देख अस्पताल संचालकों ने मानवीय आधार पर कम गंभीर मरीजों को आनन-फानन में शहर के अन्य अस्पतालों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि, अब किसी भी नए मरीज को भर्ती न किया जाए। अस्पतालों के साथ-साथ बाजार के बड़े शोरूम और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में भी रात भर काम चलता रहा और कानूनी कार्रवाई तथा जब्ती से बचने के लिए शोरूम मालिकों ने क्रेन और मजदूरों की मदद से अपने कीमती कमर्शियल बोर्ड और होर्डिंग्स उतरवा दिए।
छावनी में बदला शास्त्री नगर
शास्त्रीनगर स्कीम नंबर-7 के तहत आने वाले सैकड़ों प्रतिष्ठानों के बाहर रात के सन्नाटे में भी व्यापारियों का भारी जमावड़ा लगा रहा और मंगलवार की सुबह सेंट्रल मार्केट का नजारा किसी छावनी जैसा नजर आया। पुलिस प्रशासन ने बाजार के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी है और कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ दमकल की गाड़ियां भी तैनात कर दी गई हैं।
संयुक्त व्यापार संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि, जिस तरह से पुलिस ने घेराबंदी की है उससे व्यापारियों में दहशत का माहौल है और उनका तर्क है कि जब तक प्रशासन के पास अदालत का स्पष्ट लिखित आदेश नहीं आता तब तक ऐसी दमनकारी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। संयुक्त व्यापार संघ के बैनर तले मेरठ के करीब 665 व्यापारिक संगठनों ने इस लड़ाई को आर-पार की जंग घोषित कर दिया है और व्यापारियों ने साफ कर दिया है कि, वे दूसरी बार अपने प्रतिष्ठानों को टूटते हुए नहीं देख सकते।

व्यापारियों की इस लड़ाई को राजनीतिक समर्थन भी मिलना शुरू हो गया है और सपा विधायक अतुल प्रधान सुबह-सुबह ही व्यापारियों के बीच पहुंचकर प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करने लगे। व्यापारियों का कहना है कि यह केवल दुकानों की बात नहीं है बल्कि हजारों परिवारों के चूल्हे का सवाल है।
पीएम मोदी से लगाई गुहार
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। हालांकि, प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहा है लेकिन व्यापारी अपने हकों के लिए सीना तानकर खड़े हैं और उन्होंने चेतावनी दी है कि, यदि प्रशासन ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के ध्वस्तीकरण शुरू किया तो मेरठ का हर छोटा-बड़ा व्यापारी सड़क पर उतरकर जेल भरो आंदोलन शुरू कर देगा।
फिलहाल पूरे शास्त्रीनगर में भारी तनाव व्याप्त है और सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकलेगा या फिर मेरठ की सड़कों पर बुलडोजर की गर्जना सुनाई देगी।
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