
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जनगणना-2027 की तैयारी तेज हो गई है। जनगणना की प्रक्रिया को सुचारू, आधुनिक और पारदर्शी बनाने को लेकर डीएम विशाख की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित हुई और एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। बुधवार को लखनऊ कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया कि इस बार की जनगणना में तकनीक और जनभागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
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7 से 21 मई तक चलेगा ‘स्वगणना’ अभियान
बैठक का मुख्य केंद्र 7 मई से 21 मई 2026 तक चलने वाला विशेष ‘स्वगणना’ अभियान रहा। जिलाधिकारी ने कड़े लहजे में अधिकारियों को निर्देशित किया कि यह अभियान केवल एक सरकारी प्रक्रिया मात्र नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लखनऊ और उत्तर प्रदेश की रूपरेखा तय करने वाला एक राष्ट्रीय दस्तावेज है, जिसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही अक्षम्य होगी।

जिलाधिकारी विशाख ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि ‘स्वगणना’ का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा बनाना है। उन्होंने बताया कि, इस 15 दिवसीय अभियान के दौरान नागरिक स्वयं पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों की शुद्धता भी बढ़ेगी। इस अभियान को गति देने के लिए लखनऊ के सभी सरकारी विभागों को अनिवार्य रूप से इसमें शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं।
52 से अधिक विभागों में नियुक्त होंगे नोडल अधिकारी
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि, जिले के सभी 52 से अधिक विभागों में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए। ये अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि, उनके विभाग के प्रत्येक कर्मचारी ने तय समय सीमा के भीतर अपनी स्वगणना पूरी कर ली है। सरकारी कर्मचारियों को इस अभियान में अग्रदूत के रूप में देखा जा रहा है, ताकि वे समाज के अन्य वर्गों के लिए प्रेरणा बन सकें।
लखनऊ नगर निगम के 110 वार्डों में इस अभियान को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए पार्षदों की भूमिका को सबसे अहम माना गया है। जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त को निर्देश दिए कि, सभी 110 वार्डों के पार्षदों का चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण आयोजित किया जाए। इस प्रशिक्षण में उन्हें स्वगणना पोर्टल के संचालन, ऐप की बारीकियों और सबसे महत्वपूर्ण डेटा सुरक्षा के बारे में विस्तार से समझाया जाएगा।
अपने-अपने क्षेत्र में जागरूकता फैलाएं पार्षद
पार्षद अपने क्षेत्रों में न केवल जागरूकता फैलाएंगे, बल्कि उन लोगों की सहायता भी करेंगे जो तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक वार्ड में कम से कम दो से तीन हेल्पडेस्क स्थापित किए जाएं, जहां नागरिक जाकर अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करवा सकें। इसके लिए पार्षदों को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया इसी सप्ताह से शुरू कर दी जाएगी।
शिक्षा के क्षेत्र में इस अभियान को एक जन आंदोलन बनाने की योजना है। जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि लखनऊ के सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्वगणना जागरूकता सप्ताह मनाया जाए। युवाओं को इस अभियान से जोड़ना इसलिए जरूरी है क्योंकि वे तकनीक के साथ सहज हैं और अपने परिवार व पड़ोस को इस डिजिटल प्रक्रिया के लिए प्रेरित कर सकते हैं। कॉलेजों में कार्यशालाएं, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताएं और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जनगणना के महत्व को समझाया जाएगा।
घर-घर चलेगा संपर्क अभियान
जिलाधिकारी ने कहा कि यदि युवा वर्ग इस अभियान से जुड़ गया, तो 7 मई से शुरू होने वाले इस मिशन की सफलता सुनिश्चित है। स्कूलों में विशेष गोष्ठियां आयोजित कर शिक्षकों और अभिभावकों को भी इस डिजिटल सुधार के फायदों के बारे में बताया जाएगा। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सामंजस्य बैठाने के लिए जिलाधिकारी ने आवासीय सोसायटियों और सरकारी कॉलोनियों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने को कहा है।
हाउसिंग सोसायटियों और आरडब्ल्यूए के साथ बैठकें कर उन्हें इस अभियान का सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा। विशेष रूप से अपार्टमेंट और बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाया जाएगा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जो लोग स्वयं गणना करने में असमर्थ हैं, उनके लिए प्रशिक्षित टीमें घर जाकर सहायता प्रदान करेंगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में उपजिलाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों के माध्यम से प्रत्येक घर तक इस संदेश को पहुंचाएं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना के अभाव में कोई भी परिवार जनगणना से वंचित नहीं रहना चाहिए।
मल्टी-मीडिया एप्रोच अपनाने के निर्देश
प्रचार-प्रसार की रणनीति को लेकर जिलाधिकारी ने मल्टी-मीडिया एप्रोच अपनाने के निर्देश दिए। लखनऊ की सड़कों पर लगे बड़े एलईडी स्क्रीन्स, चौराहों पर लगे आईटीएमएस के पब्लिक एड्रेस सिस्टम और व्यस्त बाजारों में लगातार स्वगणना से संबंधित ऑडियो-विजुअल संदेश प्रसारित किए जाएंगे।
इसके साथ ही, राजधानी के मल्टीप्लेक्स और सिनेमा हॉलों में फिल्मों के प्रदर्शन से पहले जनगणना जागरूकता वीडियो दिखाना अनिवार्य करने की योजना बनाई गई है। जिलाधिकारी ने कहा कि रेडियो, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से भी व्यापक अभियान चलाया जाएगा। स्थानीय व्यापारियों, डॉक्टरों, अधिवक्ताओं और स्वयंसेवी संगठनों को भी इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है, ताकि समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी समझे।
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