जेब पर फिर पड़ा बोझ, आज से प्रीमियम पेट्रोल-डीजल के लिए चुकानी होगी ज्यादा कीमत, इस वजह से बढ़े दाम

नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मची हलचल और रुपये की विनिमय दर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव का असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी के बाद अब तेल विपणन कंपनियों ने आम आदमी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को एक और बड़ा झटका देते हुए प्रीमियम डीजल के दाम भी बढ़ा दिए हैं।

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रात 12 बजे से लागू हो गईं दरें

सोमवार रात 12 बजे से प्रभावी हुए इस फैसले के तहत देशभर में प्रीमियम डीजल की कीमतों में लगभग डेढ़ रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण ईंधन शोधन की लागत लगातार बढ़ रही है। इस निर्णय का सीधा असर न केवल व्यक्तिगत वाहन स्वामियों पर पड़ेगा बल्कि माल ढुलाई और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के बजट पर भी अतिरिक्त भार बढ़ना तय माना जा रहा है।

Petrol-Diesel

तेल कंपनियों ने इस मूल्य वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हो रही वृद्धि और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोर स्थिति को जिम्मेदार ठहराया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है और जब भी वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर घरेलू बाजार के प्रीमियम उत्पादों पर सबसे पहले दिखाई देता है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी सरकारी कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि, लगातार बदलती वैश्विक परिस्थितियों के कारण ईंधन की कीमतों में यह फेरबदल अनिवार्य हो गया था। नई दरों के लागू होने के बाद दिल्ली जैसे महानगरों में प्रीमियम डीजल की कीमतें अब 95 से 96 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गई हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए एक नई चिंता का विषय हैं।

प्रति लीटर 11 रुपए बढ़े दाम

इस नई मूल्य वृद्धि के तहत सबसे बड़ा बदलाव हाई-ऑक्टेन पेट्रोल यानी एक्सपी100 की कीमतों में देखने को मिला है। प्रीमियम कारों और स्पोर्ट्स बाइक्स में इस्तेमाल होने वाले इस विशेष पेट्रोल की कीमत 149 रुपये प्रति लीटर से सीधे बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है यानी एक झटके में इसमें 11 रुपये प्रति लीटर का भारी उछाल आया है। इसी तरह एक्स्ट्रा ग्रीन प्रीमियम डीजल की कीमत में भी वृद्धि की गई है जो अब 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई है। ये नई दरें तुरंत प्रभाव से पूरे देश में लागू कर दी गई हैं जिससे सुबह ईंधन भरवाने पहुंचे वाहन चालकों को बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ा।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि, प्रीमियम डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर दूरगामी होगा, क्योंकि परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। आधुनिक इंजनों वाले ट्रक और भारी वाहन बेहतर माइलेज और इंजन की सुरक्षा के लिए अक्सर प्रीमियम डीजल का ही उपयोग करते हैं। जब ईंधन महंगा होता है तो माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा प्रभाव बाजार में मिलने वाली रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे फल, सब्जी और अन्य किराना सामान की कीमतों पर पड़ता है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में उपयोग होने वाले आधुनिक हार्वेस्टर्स और ट्रैक्टर्स में भी किसान अब प्रीमियम श्रेणी के ईंधन को प्राथमिकता देने लगे हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ना निश्चित है।

बढ़ सकती हैं ईधन  की कीमतें

दिलचस्प बात यह है कि, सरकारी तेल कंपनियों ने इससे पहले 20 मार्च को भी प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में करीब सवा दो रुपये तक की बढ़ोतरी की थी। हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों ने फिलहाल सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखकर आम आदमी को बड़ी राहत देने की कोशिश की है, लेकिन जिस तरह से प्रीमियम ईंधन के दाम एक के बाद एक बढ़ रहे हैं, उससे इस बात की आशंका भी गहराने लगी है कि भविष्य में सामान्य ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

फिलहाल कंपनियां अपने घाटे की भरपाई प्रीमियम ग्राहकों से कर रही हैं, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं तो सामान्य ईंधन को सस्ता रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्रीमियम डीजल सामान्य डीजल की तुलना में बेहतर इंजन परफॉर्मेंस और कम प्रदूषण के लिए जाना जाता है, लेकिन कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण इसका उपयोग अब सीमित हो सकता है।

क्या एक्साइज ड्यूटी में कटौती करेगी सरकार

मध्यम वर्गीय उपभोक्ता जो बेहतर माइलेज के लालच में प्रीमियम ईंधन का रुख कर रहे थे, वे अब वापस सामान्य ईंधन की ओर मुड़ सकते हैं। इससे आने वाले समय में प्रीमियम ईंधन की बिक्री में गिरावट भी देखी जा सकती है। कुल मिलाकर नए महीने और नए वित्त वर्ष की यह शुरुआत आम जनता के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि, क्या केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी में कोई कटौती करेगी या फिर आम आदमी को इसी तरह बढ़ी हुई कीमतों के साथ ही समझौता करना पड़ेगा।

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