
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की सनसनीखेज घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले की राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता और एआईएमआईएम (AIMIM) नेता मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है।
इसे भी पढ़ें- आर एन रवि ने पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल के तौर पर शपथ ली
यह गिरफ्तारी उस समय हुई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को इस सुरक्षा चूक के लिए कड़ी फटकार लगाई है। घटना की गंभीरता और इसके पीछे के अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय सुरक्षा पहलुओं को देखते हुए एनआईए की टीम शुक्रवार को मालदा का दौरा करेगी और आधिकारिक रूप से जांच अपने हाथों में लेगी।
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य की अंतिम मतदाता सूची से लगभग 63 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जबकि 60 लाख अन्य मतदाताओं के नामों को विचाराधीन रखा गया है। इन हटाए गए या संदिग्ध नामों की समीक्षा करने और अंतिम फैसला लेने की जिम्मेदारी न्यायिक अधिकारियों को सौंपी गई थी।

विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार को प्रदर्शनकारियों की एक उग्र भीड़ ने मालदा के कालियाचक इलाके में बीडीओ कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे थे कि, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए। जब न्यायिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की अनुचित मांगों को मानने और बैठक करने से इनकार कर दिया, तो भीड़ हिंसक हो गई। प्रदर्शनकारियों ने तीन महिला अधिकारियों सहित कुल सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान अधिकारियों के साथ बदसलूकी और मानसिक प्रताड़ना की खबरें भी सामने आईं, जिसने पूरे देश के न्यायिक जगत को झकझोर कर रख दिया।
उत्तर बंगाल के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) के. जयरामन ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि, पुलिस ने अब तक इस हिंसा और बंधक कांड के सिलसिले में कुल 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि, इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड मोफक्करुल इस्लाम है, जो पेशे से वकील है और खुद को राजनीतिक दल एआईएमआईएम का नेता बताता है।
19 जगहों पर दर्ज हुई है FIR
एडीजी जयरामन के अनुसार, मोफक्करुल इस्लाम को गुप्त सूचना के आधार पर बागडोगरा से हिरासत में लिया गया है। उसे मालदा लाया जा रहा है जहां कालियाचक मामले में उसकी औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई जाएगी। इस मामले में अब तक 19 अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस का मानना है कि, मोफक्करुल ने ही भीड़ को उकसाया और न्यायिक अधिकारियों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी।
मालदा की इस घटना पर देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि, न्यायिक कार्य कर रहे अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य प्रशासन विफल क्यों रहा? अदालत ने इसे न्यायपालिका पर सीधा हमला करार दिया।
इसी पृष्ठभूमि में, केंद्र सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एनआईए जांच के आदेश दिए हैं। एनआईए की टीम शुक्रवार को मालदा पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना करेगी और जब्त किए गए दस्तावेजों व साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। एजेंसी यह जांच करेगी कि क्या मतदाता सूची के पुनरीक्षण को रोकने के पीछे कोई बड़ी राष्ट्रविरोधी साजिश थी या इसमें विदेशी ताकतों का हाथ है, क्योंकि मालदा एक सीमावर्ती जिला है।
बंगाल की राजनीति में उबाल
मालदा की घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में उबाल ला दिया है। बीजेपी ने इसे राज्य में जंगलराज का प्रमाण बताया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता सुकांता मजूमदार ने ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, यह घटना चौंकाने वाली है। क्या यह मुख्यमंत्री के उकसावे वाले भाषणों का नतीजा है? हम चुनाव आयोग से आग्रह करते हैं कि वे इस बात की गहराई से जांच करें कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, वे वास्तव में भारतीय नागरिक हैं या नहीं।

भाजपा का आरोप है कि, सत्ताधारी दल वोट बैंक की राजनीति के लिए घुसपैठियों को संरक्षण दे रहा है और जब संवैधानिक संस्थाएं अपना काम कर रही हैं, तो उन पर हमले करवाए जा रहे हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस अपना काम कर रही है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। टीएमसी नेताओं का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का शुद्धिकरण हमेशा से एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। इस बार 63 लाख नामों का हटाया जाना एक बड़ा आंकड़ा है। विपक्षी दलों का दावा है कि ये वे नाम हैं, जो अवैध रूप से सूची में शामिल किए गए थे, जबकि कुछ सामाजिक संगठनों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वास्तविक नागरिकों के नाम भी जानबूझकर हटाए जा रहे हैं।
न्यायिक अधिकारियों को इन संवेदनशील मामलों की सुनवाई का जिम्मा इसलिए दिया गया था, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष रहे, लेकिन मालदा में उन पर हुए हमले ने यह साफ कर दिया है कि, जमीनी स्तर पर स्थिति काफी तनावपूर्ण है। एनआईए की एंट्री के बाद अब इस मामले के कई और लिंक खुलने की उम्मीद है। जांच एजेंसी उन वित्तीय स्रोतों की भी तलाश करेगी, जिन्होंने मोफक्करुल इस्लाम जैसे चेहरों को भीड़ जुटाने और हिंसा फैलाने के लिए संसाधन उपलब्ध कराए।
आगामी चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने भी पश्चिम बंगाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश दिए हैं। मालदा कांड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि, आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में चुनावी रार और तेज होगी। फिलहाल, मालदा में भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन न्यायिक अधिकारियों के मन में बैठा डर दूर करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
इसे भी पढ़ें- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर प्रोटोकॉल विवाद, केंद्र ने मांगा स्पष्टीकरण



