
चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अब महज चार महीने का समय बचा है और इसी के साथ राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को चेन्नई से करीब 100 किलोमीटर दूर मदुरांतकम में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। इस रैली के साथ ही नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस यानी NDA तमिलनाडु में अपने चुनावी अभियान का औपचारिक आगाज करेगा। सियासी गलियारों में चर्चा है कि इस मंच से NDA में शामिल होने वाली कुछ पार्टियों को लेकर बड़े गठबंधन ऐलान भी हो सकते हैं।
AIADMK के नेतृत्व में चुनावी मोर्चाबंदी
तमिलनाडु में NDA की कमान इस बार AIADMK के हाथों में है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि दिवंगत एक्टर विजयकांत की पार्टी DMDK के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अगर यह गठबंधन होता है तो NDA को राज्य में एक मजबूत राजनीतिक आधार मिलने की उम्मीद है।
ओ पन्नीरसेल्वम को लेकर NDA में असमंजस
BJP ने AIADMK से अलग हुई AMMK पार्टी के नेता टीटीवी दिनाकरण को NDA में शामिल करने में सफलता हासिल कर ली है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम के नाम पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है। सूत्रों के मुताबिक, AIADMK महासचिव ई पलनिस्वामी और पन्नीरसेल्वम के बीच निजी टकराव इसकी सबसे बड़ी वजह है। पलनिस्वामी उन्हें गठबंधन में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि AIADMK पहले ही PMK के एक धड़े के साथ गठबंधन का ऐलान कर चुकी है।
PMK में टूट, अंबुमणि का NDA की ओर झुकाव
डॉ. रामदोस की पार्टी PMK फिलहाल अंदरूनी संकट से गुजर रही है। पार्टी दो धड़ों में बंट चुकी है, जब रामदोस ने अपने बेटे अंबुमणि रामदोस को पार्टी से बाहर करने का ऐलान किया। वन्नियर समुदाय में मजबूत पकड़ रखने वाली इस पार्टी के भविष्य को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। हालांकि अंबुमणि रामदोस ने AIADMK के साथ हाथ मिलाकर NDA में शामिल होने का फैसला कर लिया है। NDA इस बार DMK-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने के लिए छोटे दलों को जोड़कर सामाजिक और जातीय समीकरण मजबूत करने में जुटा है।
विजय की एंट्री से बदलेगा चुनावी गणित?
एक्टर विजय की पार्टी TVK को इस चुनाव में ‘एक्स फैक्टर’ माना जा रहा है। राजनीति में सक्रिय अन्य फिल्मी चेहरों की तुलना में विजय को ज्यादा प्रभावशाली माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अपने करियर के शिखर पर राजनीति में कदम रखा है। विजय और उनकी पार्टी ने साफ कर दिया है कि वे DMK और BJP दोनों से समान दूरी बनाए रखेंगे। हालांकि AIADMK के कुछ नेताओं के TVK से बैकडोर संपर्क की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। यदि दोनों के बीच कोई समझौता होता है तो इसका सीधा असर NDA की रणनीति पर पड़ सकता है।
चार महीने पहले PM मोदी की रैली क्यों अहम?
विजय की फिल्म ‘जननायकन’ को सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने और करूर भगड़ग मामले में CBI पूछताछ को लेकर BJP पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये सियासी साजिश है। वहीं BJP का मानना है कि कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर स्टालिन सरकार के खिलाफ जनता में नाराजगी है। इसी माहौल को भुनाने के लिए BJP अपने सबसे बड़े चेहरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैदान में उतार रही है। चुनाव से चार महीने पहले अभियान की शुरुआत इस ओर इशारा करती है कि आने वाले दिनों में PM मोदी के तमिलनाडु दौरे और तेज होंगे।



