
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में इन दिनों भीषण जंग जारी है, जिसकी आंच न सिर्फ मिडिल ईस्ट पर पड़ रही है, बल्कि दुनिया के अन्य देश भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। अब पीएम नरेंद्र मोदी ने इस संघर्ष को लेकर आज लोकसभा को संबोधित किया। पिछले 24 दिनों से चल रही जंग और इसके वैश्विक प्रभावों पर भारत की रणनीति स्पष्ट करते हुए पीएम ने देश को ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा का भरोसा दिलाया।
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विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब
प्रधानमंत्री ने सदन में विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि, भारत ने अपनी तेल आपूर्ति के स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक फैला दिया है, ताकि घरेलू बाजार पर असर न पड़े। उन्होंने जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़े एक्शन की चेतावनी दी और कहा कि, संकट के समय में देश की एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए पीएम ने कहा कि, पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक चिंता का विषय है। उन्होंने सदन को बताया कि, पिछले तीन हफ्तों से अधिक समय से जारी यह संकट मानवीय जीवन पर विपरीत असर डाल रहा है और पूरी दुनिया इसके जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह कर रही है।
पीएम ने कहा, मैं इस सदन में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और भारत पर उसके प्रभाव पर बात रखने के लिए आया हूं। इस समय वहां के हालात बेहद चिंताजनक हैं। भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है, हमने इस जंग पर गहरी चिंता व्यक्त की है और मैंने स्वयं वेस्ट एशिया के प्रमुख देशों के नेताओं से बात की है। हमने सभी से तनाव कम करने की अपील की है।
जहाजों पर हमला स्वीकार नहीं
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि, पश्चिम एशिया भारत के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते हैं और काम करते हैं। इसके अलावा, उस क्षेत्र के समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों में भारतीय क्रू मेंबर्स की संख्या भी बहुत अधिक है।
पीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, कमर्शियल जहाजों पर हमला और आवाजाही में रुकावट किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। यही वजह है कि हमारी चिंता ज्यादा है। इस युद्ध के बीच यह बहुत जरूरी है कि भारत की संसद से एकमत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए, ताकि हमारे नागरिकों के हितों की रक्षा हो सके।
भारत हमेशा से मानवता के हित में शांति की आवाज उठाता रहा है। बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का समाधान हैं।
हमारे प्रयास तनाव को कम करने और इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए हैं।
इस युद्ध में किसी के भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है इसलिए भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द…
— PMO India (@PMOIndia) March 23, 2026
विपक्ष द्वारा तेल और गैस की संभावित किल्लत को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रधानमंत्री ने विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत का कच्चा तेल और फर्टिलाइजर का एक बड़ा हिस्सा आता है, जो युद्ध के कारण प्रभावित हुआ है, लेकिन सरकार की मुस्तैदी का जिक्र करते हुए उन्होंने एक बड़ा आंकड़ा पेश किया।
41 देशों से आ रहा पेट्रोल
प्रधानमंत्री ने कहा, संकट को कम करने के लिए जहां पहले हम 27 देशों से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करते थे, अब हमारी सरकार ने इसे बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचा दिया है। हम अलग-अलग देशों के सप्लायर्स के साथ निरंतर संपर्क में हैं, ताकि सप्लाई चैन में कोई बाधा न आए। उन्होंने आगे बताया कि सरकार ने एक विशेष कार्य समूह बनाया है जो हर रोज आयात-निर्यात में आने वाली दिक्कतों की समीक्षा करता है।
नागरिकों की सुरक्षा को अपनी पहली प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने सदन को सूचित किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं, जो लोग अभी भी वहां हैं, उनके लिए भारत ने 24X7 हेल्पलाइन और निरंतर एडवाइजरी जारी की है।
इस समय, पश्चिमी एशिया के हालात चिंताजनक हैं।
बीते दो-तीन हफ्तों में जयशंकर जी ने और हरदीप पुरी जी ने इस विषय पर सदन को जरूरी जानकारी दी हैं।
लेकिन अब इस संकट को तीन सप्ताह से ज्यादा हो गए हैं।
इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत विपरीत असर हो रहा है।…
— PMO India (@PMOIndia) March 23, 2026
पीएम ने भावुक होते हुए कहा, जिस दिन से यह युद्ध शुरू हुआ है, उसी समय से प्रभावित देशों में हर भारतीय को जरूरी मदद उपलब्ध कराई जा रही है। मैंने व्यक्तिगत रूप से संबंधित देशों के राष्ट्रध्यक्षों से बात कर भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन लिया है। युद्ध में घायल हुए भारतीयों का इलाज जारी है और हमारे मिशन उनके परिवारों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
जमाखोरों को चेताया
प्रधानमंत्री ने देश के भीतर छद्म संकट पैदा करने की कोशिश करने वाले तत्वों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने रविवार को हुई 3.30 घंटे की उच्च-स्तरीय बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि पेट्रोलियम, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक जैसे अहम क्षेत्रों में भारत की तैयारियां पूरी हैं।

उन्होंने राज्यों को कड़े निर्देश देते हुए कहा, कोरोना के समय भी हमने एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना किया था। इस समय भी हमें सतर्क रहना है और गलत खबरों पर भरोसा नहीं करना है। मैंने राज्य सरकारों को आदेश दिया है कि जो लोग इस संकट की आड़ में जमाखोरी या कालाबाजारी करेंगे, उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
सामने रखा तैयरियों का रोडमैप
बता दें कि, 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग के बाद से विपक्ष लगातार संसद में बहस की मांग कर रहा था। विपक्ष का दावा था कि, देश में ऊर्जा संकट गहरा सकता है, लेकिन पीएम मोदी के आज के संबोधन ने केंद्र सरकार की तैयारियों का रोडमैप सामने रख दिया है।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में कहा कि भारत ने हमेशा शांति का समर्थन किया है और हम सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने पूरे सदन से आह्वान किया कि इस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संकट के समय में राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद, आज लोकसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेंगी। इसके जरिए लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट 2008 और कंपनी एक्ट 2013 में महत्वपूर्ण संशोधन किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि सत्र की पिछली कार्यवाही में विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों को ‘गिलोटिन’ प्रक्रिया के तहत बिना बहस के पारित कर दिया गया था, ताकि सरकारी कामकाज सुचारू रूप से चल सके।
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