पेट्रोलियम मंत्रालय का बयान, भारत में नहीं है गैस की किल्लत, संडे को भी होगी डिलीवरी

नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति में जारी उथल-पुथल और विशेष रूप से अमेरिका एवं ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।

भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, वहां भी पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस यानी एलपीजी की किल्लत को लेकर कई तरह की अफवाहें और आशंकाएं सोशल मीडिया पर तैर रही थीं। इन परिस्थितियों के बीच, भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक विस्तृत रिपोर्ट और आधिकारिक बयान जारी कर देश की जनता को बड़ी राहत दी है।

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मंत्रालय ने साझा किए आंकड़े

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद भारत में एलपीजी गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू है। सरकार ने न केवल आपूर्ति के आंकड़े साझा किए हैं, बल्कि ऑनलाइन बुकिंग और वितरण प्रणाली में आए क्रांतिकारी सुधारों का भी उल्लेख किया है ताकि आम नागरिक किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी का शिकार न हों।

LPG Cylinder

पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने घरेलू एलपीजी गैस की उपलब्धता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। मंत्रालय ने खुलासा किया कि घरेलू गैस सिलेंडरों की डिलीवरी दर को उद्योग जगत के मानकों के आधार पर 99 प्रतिशत तक सुनिश्चित कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि जिन उपभोक्ताओं ने बुकिंग कराई है, उनमें से लगभग सभी को समय पर सिलेंडर मिल रहा है।

92% है सफल डिलीवरी का आंकड़ा

आपूर्ति को लेकर किसी भी तरह की बाधा न आए, इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने विशेष इंतजाम किए हैं। मंत्रालय ने बताया कि देश के कई हिस्सों में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स रविवार को भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं और गोदामों से सिलेंडरों की निकासी जारी है, ताकि किसी भी घर की रसोई में ईंधन की कमी न हो। सरकार का यह कदम उन अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त है जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से भारत में गैस की राशनिंग शुरू हो सकती है।

वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा लागू की गई डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) प्रणाली के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मंत्रालय ने बताया कि डीएसी आधारित डिलीवरी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और अब सफल डिलीवरी का आंकड़ा 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है। डीएसी प्रणाली के तहत उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक कोड भेजा जाता है, जिसे डिलीवरी बॉय को बताने के बाद ही सिलेंडर हैंडओवर किया जाता है। इससे न केवल सिलेंडरों की कालाबाजारी रुकी है, बल्कि डेटा की सटीकता भी बढ़ी है।

ऑनलाइन बुकिंग में उछाल

सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले कुछ महीनों में ऑनलाइन बुकिंग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में भारी उछाल आया है। लोग अब गैस एजेंसियों के चक्कर काटने के बजाय मोबाइल ऐप्स और आधिकारिक वेबसाइटों के जरिए बुकिंग करना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मान रहे हैं।

व्यावसायिक क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी सरकार ने अपनी रणनीति साझा की है। मंत्रालय के अनुसार, कमर्शियल एलपीजी आवंटन को संकट पूर्व के स्तर से लगभग 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। इसमें 10 प्रतिशत का सुधार-संबंधी आवंटन भी शामिल है ताकि उद्योगों और छोटे व्यापारियों को काम करने में कोई कठिनाई न हो।

आंकड़ों के मुताबिक, 23 मार्च 2026 से अब तक 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री 18.45 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। वितरण व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तीन बड़ी तेल कंपनियों आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशकों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है।

PNG नेटवर्क बढ़ाने पर जोर

यह तीन सदस्यीय समिति राज्य अधिकारियों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ निरंतर संवाद कर रही है ताकि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल गैस का वितरण सुचारू रहे। पिछले पांच दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो रोजाना औसतन 7 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा कमर्शियल एलपीजी बेची गई है, जो बाजार में मजबूत आपूर्ति का संकेत है।

एलपीजी के पारंपरिक वितरण के साथ-साथ सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के नेटवर्क को भी युद्ध स्तर पर विस्तारित कर रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 से अब तक 4.93 लाख से ज्यादा नए पीएनजी कनेक्शनों का सफलतापूर्वक गैसीकरण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 5.51 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने नए पीएनजी कनेक्शनों के लिए अपना पंजीकरण कराया है, जो यह दर्शाता है कि लोग अब एलपीजी सिलेंडर के झंझट से मुक्त होकर पाइप वाली गैस की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

एक रोचक डेटा यह भी सामने आया है कि 19 अप्रैल तक लगभग 39,200 पीएनजी उपभोक्ताओं ने ‘MYPNGD.in’ वेबसाइट के जरिए अपने पुराने एलपीजी कनेक्शन स्वेच्छा से सरेंडर कर दिए हैं। इससे न केवल एलपीजी सिलेंडरों पर दबाव कम हो रहा है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर देश का कदम भी मजबूत हो रहा है।

कालाबाजारी करने वालों पर होगी कार्रवाई

सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि, वे किसी भी असत्यापित खबर या अफवाह पर ध्यान न दें। आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भारत के पास पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है और रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर सरकार की पैनी नजर है और देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

एलपीजी की होम डिलीवरी को लेकर जो सुधार किए गए हैं, वे लंबी अवधि में उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद साबित होंगे। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी डिस्ट्रीब्यूटर के खिलाफ अवैध भंडारण या जानबूझकर देरी की शिकायत मिलती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

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