
नई दिल्ली। भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने एक बेहद गंभीर और चिंताजनक अलर्ट जारी किया है, जिसके अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत के खिलाफ एक व्यापक और बहुस्तरीय साइबर युद्ध छेड़ने की साजिश रच रही है।
खुफिया रिपोर्टस के मुताबिक यह हमला केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य भारत के महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों, वित्तीय ढांचे और सार्वजनिक सेवा प्रणालियों को पूरी तरह ठप करना है। इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा जुटाए गए इनपुट बताते हैं कि पिछले एक सप्ताह के भीतर रावलपिंडी और इस्लामाबाद में आईएसआई के उच्चाधिकारियों ने कई गुप्त बैठकें की हैं, जिनमें भारत के अहम संस्थानों की डिजिटल घेराबंदी करने के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की गई है।
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हाई अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां
2026 की शुरुआत के साथ ही इनकी साइबर गतिविधियों में जो तेजी देखी गई है, उसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह हाई-अलर्ट पर ला दिया है। खुफिया एजेंसियों द्वारा साझा किए गए विवरणों के अनुसार, पाकिस्तान अब पारंपरिक युद्ध के बजाय डिजिटल माध्यमों से भारत को अस्थिर करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके लिए पाकिस्तान ने अपनी विशेष साइबर फोर्स को सक्रिय कर दिया है जो सीधे तौर पर आईएसआई के कमांड और कंट्रोल में काम करती है।

इस साजिश को अंजाम देने के लिए केवल सरकारी संसाधनों का ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय पेशेवर हैकर समूहों और डार्क वेब के अपराधियों का भी सहारा लिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि, इन हमलों को बहुस्तरीय साइबर हमलों की श्रेणी में रखा गया है। इसमें पहले चरण में भारतीय प्रणालियों में घुसपैठ कर उनकी कमजोरियों का पता लगाया जाएगा और फिर मेलवेयर या रैनसमवेयर के जरिए डेटा को फ्रीज कर पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को क्रैश करने की कोशिश की जाएगी।
दो हैकर समूहों को मिली है जिम्मेदारी
दिलचस्प बात यह है कि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने वर्ष 2025 के अपने वार्षिक सुरक्षा आंकलन में ही इस खतरे की भविष्यवाणी कर दी थी। उस समय की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 2026 में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमा पार से होने वाले भौतिक हमलों के बजाय साइबर स्पेस से आने वाले खतरे होंगे।
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, आईएसआई ने इस बार मुख्य रूप से दो हैकर समूहों HOAX1337 और नेशनल साइबर क्रू को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। ये दोनों समूह पहले भी भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और इनके तार सीधे तौर पर पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े पाए गए हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि, इन समूहों को स्पेशल निर्देश दिए गए हैं कि, वे भारतीय रक्षा मंत्रालय, सैन्य अनुसंधान केंद्रों और प्रमुख आयुध कारखानों के नेटवर्क को निशाना बनाएं।
इनका मकसद न केवल सिस्टम को बाधित करना है, बल्कि भारत की अगली पीढ़ी की मिसाइल प्रणालियों और रक्षा सौदों से जुड़ी अत्यंत गोपनीय फाइलों को चुराना भी है। इसके साथ ही भारतीय बैंकिंग प्रणाली और शेयर बाजार को नुकसान पहुंचाकर आर्थिक अराजकता पैदा करने की योजना भी इस साजिश का हिस्सा है। यूपीआई जैसे सफल डिजिटल पेमेंट गेटवे को अस्थिर करने की कोशिश भी की जा सकती है ताकि जनता में घबराहट पैदा हो और अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाई जा सके।
पाकिस्तान भेजी जा रही थी CCTV कैमरे के लाइव फीड
यह साजिश केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जासूसी का एक जमीनी नेटवर्क भी शामिल है। खुफिया रिपोर्टों में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि, आईएसआई का जासूसी नेटवर्क भारत की जमीन पर भौतिक डेटा जुटाने में लगा है। गाजियाबाद पुलिस की एक हालिया जांच ने इस नेटवर्क के खतरनाक मंसूबों को बेनकाब किया है। जांच में पता चला कि, कुछ संदिग्ध लोगों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों, विशेषकर रेलवे स्टेशनों और सेना की आवाजाही वाले मार्गों के पास सोलर पावर से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए थे।
इन कैमरों की लाइव फीड इंटरनेट के जरिए सीधे पाकिस्तान में बैठे संचालकों को भेजी जा रही थी। यह तकनीक इसलिए अपनाई गई ताकि बिजली कटने पर भी निगरानी बाधित न हो और कैमरों को लंबी अवधि तक बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के चलाया जा सके। रेलवे स्टेशनों की जानकारी जुटाने का मकसद भारत के भीतर रसद और सैन्य परिवहन की गतिशीलता को बारीकी से समझना है।
अधिकारियों के मुताबिक, आईएसआई की यह साजिश दोतरफा है जिसमें एक तरफ तकनीकी हमला है, तो दूसरी तरफ मनोवैज्ञानिक युद्ध की रणनीति है। सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप्स के जरिए भारत में भ्रम और डर का माहौल पैदा करने के लिए भारी निवेश किया गया है। चुनावी माहौल को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों और समुदायों के बीच नफरत फैलाने के लिए डीपफेक वीडियो और फर्जी खबरों का सहारा लिया जाएगा। इसके अलावा फर्जी कॉल्स और संदेशों के जरिए यह अफवाह फैलाने की योजना है कि देश में तेल और एलपीजी की भारी कमी होने वाली है।
सोशल मीडिया से फैलाया जा रहा भारत विरोधी प्रोपेगेंडा
इसका उद्देश्य बाजार में अफरा-तफरी मचाना और आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी को बढ़ावा देना है। स्कूलों, कॉलेजों और एयरलाइंस को बम से उड़ाने की फर्जी धमकियां देना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है क्योंकि इन क्षेत्रों में फैली अफवाह का असर तुरंत और व्यापक होता है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद आईएसआई भारत विरोधी साइबर गतिविधियों पर मोटी धनराशि खर्च कर रही है। यह पैसा हैकर्स को भुगतान करने और सोशल मीडिया पर बॉट फार्म्स चलाने के लिए उपयोग किया जा रहा है।
पाकिस्तान के मुख्यधारा के मीडिया और वहां के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भी इस मुहिम में शामिल किया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। भारत सरकार की तथ्य जांच इकाइयों ने पाया है कि, सोशल मीडिया पर हजारों ऐसे अकाउंट सक्रिय किए गए हैं जो केवल भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने का काम कर रहे हैं। इन नापाक मंसूबों को देखते हुए भारत ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वय केंद्र और अन्य एजेंसियां चौबीसों घंटे निगरानी कर रही हैं। सभी सरकारी विभागों को अपने सिस्टम का तत्काल सुरक्षा ऑडिट करने और जनता को सतर्क रहने की सलाह दी गई है ताकि दुश्मन के नापाक इरादों को हर स्तर पर नाकाम किया जा सके।
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