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ऑनलाइन लोक चौपाल में गूंजे कतकी गीत ‘पत्ते-पत्ते पर लिखा है श्याम मुरारी’

लखनऊ। हमारे रीति रिवाज व लोक विश्वास लोगों को प्रकृति से जोड़ने और प्रकृति का उपकार मानने के लिए हैं। शरद ऋतु में कार्तिक माह का विशेष महत्त्व है।यह पूरा महीना व्रत पर्व व त्योहारों का महीना है जो संजीवनी देता है। स्वास्थ्य के लिए अनुकूल इस महीने का इतना महत्व है कि लोगों को आशीर्वाद दिया जाता है कि आप सौ शरद जियें।

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ऑनलाइन लोक चौपाल

ऑनलाइन लोक चौपाल: यें बातें लोक विदुषी डा. विद्या विन्दु सिंह ने बुधवार को लोक संस्कृति शोध संस्थान की मासिक लोक चौपाल में कहीं। कार्तिक मास की लोक परम्पराएँ विषय पर आनलाइन हुई चौपाल में उन्होंने कार्तिक माह में मनाये जाने वाले विभिन्न त्योहारों व उसके महात्म्य पर प्रकाश डाला। अपनी दादी व नानी की चर्चा करते हुए कहा कि वे हम सबको शरद पूर्णिमा के दिन रात में बैठाकर सूई में धागा डलवाती थीं। चांदनी के प्रकाश में पढ़ने लिखने को कहती थीं। मान्यता रही कि इससे आँख की रोशनी तेज होती है।

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ऑनलाइन लोक चौपाल: चौपाल चौधरी के रुप में संगीत विदुषी प्रो. कमला श्रीवास्तव ने ऑनलाइन प्रस्तुत वक्तव्य और गीत-नृत्य प्रस्तुति की समीक्षा की तथा तुलसी महारानी मोरे अंगना केरि तोहे मुरझाए न देबै हम सुनाया।

ऑनलाइन लोक चौपाल: कार्यक्रम में वरिष्ठ लोकगायिका श्रीमती आरती पाण्डेय ने तुलसी मैया मोरे अंगना मा बाढ़ी, साधना ने गंगा के दरस मन भावे, पूनम नेगी ने तुलसी रानी का विवाह सब बधाई गावो रे, पिंकी ठाकुर ने नारायण पूछे तुलसी से, मधु श्रीवास्तव ने तुलसी महारानी नमो नमो, अंजलि सिंह ने कातिक मास लागेली बरतिया, मंजू श्रीवास्तव ने आया है कातिक मास चलो सब मन्दिर चलें, रेनू दुबे ने हम दीया जरइबे हजार हो, सरला गुप्ता ने बिन तुलसा प्रभु न एक मानी, अरुणा उपाध्याय ने पहीले पहील हम कइनी छठी, भजन गायक गौरव गुप्ता ने मुरझाय गईं तुलसी रामा बिना तथा शशि चिक्कर ने मेरे गमले की तुलसा न तोड़ पुजारी पत्ते पत्ते पर लिखा है श्याम मुरारी सुनाया। श्रीमती चन्द्रमुखी श्रीवास्तव ने पारम्परिक भोजपुरी तुलसी सोहर ‘अंगना में तुलसी लगावे ले बेदिया बनावे ले हो ताही तर बैठेले नारायन ओढेले पीताम्बर’ हो सुनाया। बाल नृत्यांगना स्वरा त्रिपाठी ने लक्ष्मन सा भाई हो कौशल्या माई हो तथा श्रेया बिन्दल ने धरती पर आया स्वर्ग उतरकर पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।

ऑनलाइन लोक चौपाल में लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव, चौपाल प्रभारी मंजू श्रीवास्तव, रीता श्रीवास्तव, डा. अपूर्वा अवस्थी, डा. संगीता शुक्ला, निवेदिता भट्टाचार्य, कल्पना त्रिपाठी, नीता निगम, अनुराधा दीक्षित, विजय पुष्पम, लीला श्रीवास्तव, अनुसूइया निगम, विद्याभूषण सोनी आदि उपस्थित रहे।