
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति के इतिहास में पिछले एक दशक का सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सत्ता के गलियारों में हलचल उस समय तेज हो गई जब प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से यह जानकारी दी गई कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। यह संबोधन सामान्य परिस्थितियों में नहीं हो रहा है, बल्कि इसके पीछे संसद में हुई वह अभूतपूर्व घटना है जिसने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है।
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महिलाओं को देंगे भावात्मक संदेश
कल लोकसभा में मोदी सरकार का नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण गिर गया। पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को सदन के भीतर इस तरह की विधायी हार का सामना करना पड़ा है। माना जा रहा है कि, प्रधानमंत्री आज रात अपने संबोधन में न केवल इस हार पर अपनी बात रखेंगे, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं को एक बड़ा भावनात्मक संदेश भी दे सकते हैं।
कल की घटना ने भारतीय संसद के भीतर एक ऐसी तस्वीर पेश की जो मोदी युग में अब तक अकल्पनीय मानी जाती थी। महिला आरक्षण बिल पर मतदान के दौरान सरकार को आवश्यक विशेष बहुमत प्राप्त नहीं हुआ, जिसके चलते यह ऐतिहासिक विधेयक पारित होने से रह गया। इस हार ने विपक्ष को एक नई संजीवनी दे दी है।
वहीं, सरकार के लिए यह आत्ममंथन का विषय बन गया है। विपक्ष ने एकजुट होकर इस बिल का पुरजोर विरोध किया और आरोप लगाया कि, सरकार आरक्षण की आड़ में परिसीमन का एक ऐसा खेल-खेल रही है, जिससे दक्षिण भारत के राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। विपक्षी दलों का तर्क था कि, बिना जनगणना और परिसीमन के इस बिल को तुरंत लागू क्यों नहीं किया जा रहा? इसी खींचतान और हंगामे के बीच जब वोटिंग हुई, तो नतीजे एनडीए सरकार के पक्ष में नहीं रहे।
पीएम ने की तर्क पूर्ण अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोटिंग से ठीक पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बेहद भावुक और तर्कपूर्ण अपील की थी। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि सरकार ने इस बिल को लेकर फैलाए गए हर भ्रम को दूर करने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री ने सदन के सभी सदस्यों से आग्रह किया था कि वे राजनीति से ऊपर उठकर आधी आबादी के हक में फैसला लें।
उन्होंने कहा था कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश में पिछले चार दशकों से बहुत राजनीति हो चुकी है, लेकिन अब समय आ गया है कि भारत की महिलाओं को निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं में उनका वाजिब हक मिले। पीएम मोदी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया था कि, आजादी के इतने वर्षों बाद भी नीति निर्धारण में महिलाओं की कम भागीदारी एक गंभीर चिंता का विषय है।
प्रधानमंत्री ने अपनी अपील में सांसदों को यह याद दिलाया था कि, देश की करोड़ों महिलाओं की नजरें संसद की कार्यवाही और उनकी नीयत पर टिकी हैं। उन्होंने सांसदों से प्रार्थना की थी कि कोई भी ऐसा कदम न उठाएं जिससे नारी शक्ति की भावनाएं आहत हों। पीएम ने जोर देकर कहा था कि यह विधेयक संशोधनों के साथ देश की महिलाओं के भाग्य को बदलने वाला है, इसलिए संवेदनशीलता के साथ इसके पक्ष में मतदान करें। हालांकि, प्रधानमंत्री की इस मार्मिक अपील का विपक्ष पर कोई असर नहीं पड़ा और सदन में संख्या बल की कमी के कारण बिल धराशायी हो गया।
क्या कहेंगे पीएम मोदी
अब सबकी निगाहें आज रात के संबोधन पर टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, प्रधानमंत्री इस हार को जनता की अदालत में ले जाने की तैयारी में हैं। वे देश को बता सकते हैं कि उनकी सरकार महिलाओं को अधिकार देने के लिए कितनी प्रतिबद्ध थी और किन शक्तियों ने इसमें बाधा उत्पन्न की। यह संबोधन केवल एक सूचना मात्र नहीं होगा, बल्कि आने वाले चुनाव के लिए एक नया नैरेटिव सेट करने की कोशिश भी हो सकती है। विपक्ष ने जिस परिसीमन और दक्षिण भारत के हितों का कार्ड खेला है, प्रधानमंत्री उसका क्या काट पेश करते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
सरकार के लिए यह स्थिति काफी असहज है क्योंकि जिस ‘नारी शक्ति’ को वे अपना सबसे बड़ा समर्थक आधार मानते रहे हैं, उनके लिए लाए गए कानून को वे सदन में पास नहीं करा पाए। ऐसे में प्रधानमंत्री का आज का भाषण डैमेज कंट्रोल और भविष्य की रणनीति के बीच का एक सेतु होगा। क्या वे नए सिरे से बिल लाने की घोषणा करेंगे या इस हार का ठीकरा सीधे तौर पर विपक्ष के सिर फोड़ेंगे? यह रात 8:30 बजे स्पष्ट हो जाएगा। दिल्ली की ठंडी फिजाओं में सियासी पारा चरम पर है और लोग टीवी स्क्रीन के सामने बैठने को तैयार हैं, क्योंकि इस संबोधन से न केवल सरकार की साख जुड़ी है, बल्कि देश की महिलाओं के उस लंबे इंतजार का भविष्य भी जुड़ा है जो वे दशकों से कर रही हैं।
विपक्ष भी सतर्क
विपक्ष भी इस समय पूरी तरह सतर्क है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने इसे अपनी एकता की जीत बताया है और सरकार पर बिना तैयारी के बिल लाने का आरोप मढ़ा है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की खूबी रही है कि वे अपनी हार को भी एक बड़े अवसर में बदलने की कला जानते हैं। आज का संबोधन इस बात का प्रमाण होगा कि वे इस विधायी झटके को किस तरह राष्ट्रवाद और महिला सशक्तीकरण के मुद्दे से जोड़कर जनता के बीच ले जाते हैं। निश्चित रूप से, आज का यह संबोधन भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाला एक ऐतिहासिक पल साबित होने जा रहा है।
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