
लखनऊ। वैश्विक स्तर पर ईरान और इजरायल के बीच गहराते युद्ध का असर अब भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पर भी पड़ता हुआ नजर आ रहा है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से ऊर्जा संरक्षण की अपील की थी। प्रधानमंत्री की इसी दूरगामी सोच और अपील को अमलीजामा पहनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में बड़े बदलावों का बिगुल फूंक दिया है।
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सीएम ने लिए कई क्रांतिकारी फैसले
मंगलवार को राजधानी लखनऊ में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कई क्रांतिकारी फैसले लिए, जिनका सीधा असर आम जनता से लेकर सरकारी अमले और प्राइवेट सेक्टर तक पर पड़ने वाला है। इस बैठक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला प्रदेश में वर्क फ्रॉम होम कल्चर को दोबारा प्रभावी ढंग से लागू करना रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें आज से ही अपनी जीवनशैली और कार्यप्रणाली में बदलाव करने होंगे।

सीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि, प्रदेश की सभी प्राइवेट कंपनियों, आईटी फर्मों और स्टार्टअप्स के लिए एक विस्तृत राज्य स्तरीय एडवाइजरी जारी की जाए। इस एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की सुविधा प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री का मानना है कि, कोरोना काल के दौरान जिस कार्य संस्कृति ने देश की अर्थव्यवस्था को गति दी थी, उसे अब ऊर्जा संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का समय आ गया है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, जिन संस्थानों में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं, वहां रोटेशन के आधार पर या सामूहिक रूप से दो दिन का वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य या प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे न केवल सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा, बल्कि ईंधन की खपत में भी भारी गिरावट आएगी।
काम काज के तरीकों में बदलाव के आदेश
सीएम का तर्क है कि, जब कर्मचारी घर से काम करेंगे, तो ऑफिसों में बिजली की खपत कम होगी और सड़क पर लगने वाले भीषण जाम से भी राहत मिलेगी, जिससे अंततः प्रदूषण के स्तर में सुधार होगा। मुख्यमंत्री ने केवल निजी क्षेत्र को ही निर्देश नहीं दिए, बल्कि सरकारी कामकाज के तौर-तरीकों को भी पूरी तरह बदलने का आदेश दे डाला है। राज्य सचिवालय और विभिन्न विभागों के निदेशालयों में अब बैठकों का स्वरूप पूरी तरह बदलने जा रहा है।
सीएम योगी ने निर्देश दिया है कि, सरकारी विभागों की कम से कम 50 प्रतिशत आंतरिक बैठकें अब अनिवार्य रूप से वर्चुअल मोड यानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाएंगी। इसके पीछे सरकार की मंशा यह है कि, अधिकारियों को एक शहर से दूसरे शहर या एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर जाने के लिए सरकारी वाहनों का उपयोग न करना पड़े। इसके साथ ही सरकार की ओर से आयोजित होने वाले सेमिनार, कार्यशालाएं और अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी अब ऑफलाइन के बजाय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट करने पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि, डिजिटल इंडिया के इस दौर में फाइलों के मूवमेंट से लेकर चर्चाओं तक, सब कुछ तकनीक के सहारे होना चाहिए ताकि समय और संसाधन दोनों की बचत हो सके। इस बैठक का सबसे सख्त और संदेश देने वाला फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद से जुड़ा लिया है। उन्होंने अपनी और अपने मंत्रिमंडल के अन्य मंत्रियों सहित सभी वीआईपी की आधिकारिक वाहन फ्लीट में तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत की कटौती करने के निर्देश दिए हैं।
उर्जा संकट के मुहाने पर देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि, जब देश ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा हो, तो शासन में बैठे लोगों को सादगी और बचत का उदाहरण पेश करना चाहिए। काफिले छोटे होने से न केवल ईंधन बचेगा, बल्कि आम जनता को भी सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी। इसी कड़ी में योगी आदित्यनाथ ने सभी जनप्रतिनिधियों, जिनमें विधायक और सांसद शामिल हैं, से भावुक अपील की है कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन जैसे बस या मेट्रो का उपयोग करें।

मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि, पूरे प्रदेश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइक्लिंग, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को एक जन आंदोलन बनाया जाए, ताकि लोग निजी पेट्रोल-डीजल वाहनों पर अपनी निर्भरता कम कर सकें। पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत को लेकर मुख्यमंत्री ने एक बेहद अनूठा सुझाव भी दिया है। उन्होंने प्रदेश के बड़े शहरों में सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे मनाने की बात कही है। इस पहल के तहत जनता को जागरूक किया जाएगा कि वे सप्ताह के एक निर्धारित दिन अपने निजी वाहनों का त्याग करें और केवल पैदल, साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।
मुख्यमंत्री का मानना है कि, ईरान युद्ध के कारण आने वाले समय में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं और अगर हम अभी से अपनी खपत पर नियंत्रण नहीं करेंगे, तो इसका बोझ सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत किया जाए, ताकि लोग तेजी से पेट्रोल वाहनों को छोड़ ईवी की ओर रुख करें।
आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम
योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि ये कदम केवल आज की जरूरत नहीं हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश को एक प्रदूषण मुक्त और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर प्रदेश बनाने की दिशा में उठाए गए मील के पत्थर हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन फैसलों ने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश सरकार किसी भी वैश्विक संकट का सामना करने के लिए समय से पहले ही अपनी रणनीति तैयार कर चुकी है।
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