
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में पलटीमार और यू-टर्न जैसे शब्दों के पर्याय बन चुके बिहार के कद्दावर नेता नीतीश कुमार ने एक बार फिर पूरी सियासी बिसात ही पलट दी है। गुरुवार, 9 अप्रैल को जब नीतीश कुमार पटना से दिल्ली की धरती पर उतरे, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि वह अपने भविष्य को लेकर इतना बड़ा ऐलान कर देंगे।
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लेने जा रहे राज्यसभा की सदस्यता
राज्यसभा सदस्यता की शपथ लेने से ठीक एक दिन पहले नीतीश कुमार ने मीडिया के सामने आकर जो कहा, उसने न केवल बिहार की सत्ता में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि एनडीए गठबंधन के भीतर भी नए सवालों को जन्म दे दिया है। बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर दशकों तक राज करने वाले नीतीश ने अब साफ कर दिया है कि उनका ठिकाना अब पटना नहीं, बल्कि दिल्ली होगा।
दिल्ली पहुंचते ही नीतीश कुमार के तेवर बदले-बदले नजर आए। मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा, कल मैं शपथ लूंगा और अब यहीं रहूंगा। बहुत समय तक वहां (बिहार) काम किया, अब वापस यहां (दिल्ली) आ रहा हूं। नीतीश कुमार का यह बयान इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि अब तक यह माना जा रहा था कि, वह राज्यसभा सांसद बनने के बावजूद बिहार की राजनीति को रिमोट कंट्रोल से चलाएंगे, लेकिन नीतीश ने आगे बढ़कर कहा, हमने तय कर लिया है कि यहीं रहेंगे और वहां वाला (मुख्यमंत्री पद) छोड़ देंगे। वहां का छोड़ के यहां आए हैं… नए लोगों को कर देंगे।
पुराने दिनों को किया याद
नीतीश कुमार का इशारा साफ है कि, वह अब सक्रिय रूप से बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का मन बना चुके हैं। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि, वह पहले भी दिल्ली में ही थे सांसद और केंद्रीय मंत्री के तौर पर, फिर बीच में बिहार चले गए थे और अब फिर से अपने पुराने घर यानी राष्ट्रीय राजनीति में लौट आए हैं।
नीतीश कुमार का यह बयान जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के उस दावे के ठीक उलट है, जो उन्होंने कुछ दिनों पहले किया था। संजय झा ने स्पष्ट रूप से कहा था कि, नीतीश कुमार केवल सत्र के दौरान दिल्ली में रहेंगे और बाकी समय पटना में रहकर एनडीए सरकार का मार्गदर्शन करेंगे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया था कि, बिहार नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही आगे चलेगा, लेकिन दिल्ली की हवा लगते ही नीतीश कुमार ने जो यू-टर्न लिया है, उससे यह सवाल उठने लगा है कि, क्या जेडीयू के भीतर सब कुछ ठीक है? या फिर नीतीश कुमार ने बिहार की उलझी हुई राजनीति से खुद को पूरी तरह अलग करने का फैसला कर लिया है?
72 घंटे में बिहार को मिल सकता है सीएम
नीतीश कुमार ने यहां तक कह दिया कि तीन-चार दिन में बिहार नया करवा देंगे, जिसका सीधा अर्थ है कि, आने वाले 72 से 96 घंटों के भीतर बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।
जब मीडिया ने नीतीश कुमार से उनके बेटे निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने और भविष्य की भूमिका को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले अंदाज में उत्तर दिया। नीतीश ने कहा, उनके (निशांत) बारे में हमारे नेता बताएंगे। नीतीश का यह जवाब भी रहस्यमयी है। क्या वह अपने बेटे के लिए कोई बड़ी भूमिका देख रहे हैं या फिर संगठन के भीतर किसी और को अपनी विरासत सौंपना चाहते हैं, यह अभी भविष्य के गर्भ में है।
तेज हुईं अटकलें
नीतीश कुमार के इस बयान ने बिहार में नई सरकार के गठन की अटकलों को तेज कर दिया है। उनके शब्दों वहां इतना काम किए हैं… अब मेरे मन में हुआ कि अब यहीं रहें… से स्पष्ट है कि, वह अब रिटायरमेंट या मार्गदर्शक की भूमिका में नहीं, बल्कि राज्यसभा के जरिए दिल्ली की राजनीति में सक्रिय पारी खेलने की तैयारी में हैं। बिहार में अब अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या बीजेपी के किसी चेहरे को कमान मिलेगी या जेडीयू का कोई नया नेता सामने आएगा? ये वो सवाल हैं जिनका जवाब अगले तीन-चार दिनों में मिलना तय है।
नीतीश कुमार का यह महा-पलायन बिहार की राजनीति के एक बड़े अध्याय का अंत माना जा सकता है। उन्होंने साफ कर दिया है कि, उन्होंने बिहार में अपना काम पूरा कर लिया है और अब वह दिल्ली की राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। शुक्रवार को राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के साथ ही बिहार की सत्ता का केंद्र बिंदु भी बदलता नजर आएगा।
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