
नेपाल। दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बड़ा उलटफेर करते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देश की नई और महत्वाकांक्षी विदेश नीति का औपचारिक ऐलान कर दिया है। यह नई नीति न केवल नेपाल के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को परिभाषित करने का एक दस्तावेज है, बल्कि यह इस हिमालयी राष्ट्र के आत्मसम्मान और स्वावलंबन की एक नई गर्जना भी मानी जा रही है। लंबे समय तक वैश्विक शक्तियों और पड़ोसी देशों की खींचतान के बीच खुद को एक बफर स्टेट यानी दो बड़े देशों के बीच फंसा हुआ तटस्थ क्षेत्र मानने वाला नेपाल अब अपनी इस पहचान को पीछे छोड़कर एक सेतु बनने की ओर अग्रसर है।
इसे भी पढ़ें- नेपाल चुनाव 2026: क्या नई पीढ़ी के अरमान पूरे कर पाएंगे बालेंद्र शाह या फिर खुद को दोहराएगा इतिहास
सत्ता के गलियारे में हलचल
प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस कदम ने न केवल काठमांडू के सत्ता गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि नई दिल्ली और बीजिंग के विदेश मंत्रालयों को भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। बालेन शाह की इस नई विदेश नीति का सबसे प्रमुख स्तंभ “नेपाल सबसे पहले: नेपाली सबसे पहले” का सिद्धांत है।

यह विचार स्पष्ट करता है कि, अब नेपाल की कूटनीति किसी विचारधारा या किसी बाहरी देश के दबाव से संचालित नहीं होगी, बल्कि इसका एकमात्र केंद्र नेपाल का राष्ट्रीय हित और उसके नागरिकों का आर्थिक विकास होगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि, नेपाल की संप्रभुता और भौगोलिक अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस नीति के माध्यम से नेपाल ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह अपनी सीमाओं के भीतर और बाहर अपने फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। नई नीति में यह भी साफ किया गया है कि नेपाल वैश्विक भू-राजनीति में हो रहे तेजी से बदलावों को एक चुनौती के तौर पर नहीं, बल्कि अपने विकास के अवसर के रूप में देखता है।
अर्थव्यवस्था मजबूत करना है उद्देश्य
इस विदेश नीति का सबसे क्रांतिकारी हिस्सा वह है जहां नेपाल को भारत और चीन के बीच एक जीवंत सेतु के रूप में विकसित करने की बात कही गई है। दशकों से नेपाल को भारत और चीन की प्रतिद्वंद्विता के बीच एक सुरक्षा कवच या बफर ज़ोन माना जाता रहा है, लेकिन बालेन शाह की सरकार अब इस धारणा को बदलकर त्रिपक्षीय आर्थिक साझेदारी की वकालत कर रही है।
नेपाल चाहता है कि वह अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए दोनों पड़ोसी महाशक्तियों के बीच कनेक्टिविटी और व्यापार का केंद्र बने। इससे न केवल नेपाल की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया में शांति और सहयोग का एक नया मॉडल पेश करेगा। सरकार का मानना है कि, त्रिपक्षीय आर्थिक गलियारों के माध्यम से नेपाल अपने राष्ट्रीय हितों को और अधिक सुरक्षित कर पाएगा।
भारत और चीन के साथ संबंधों के मामले में बालेन शाह ने एक बहुत ही नपी-तुली और समान दूरी की नीति अपनाने का फैसला किया है। नई विदेश नीति में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि, नेपाल किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगा। यह घोषणा उन अटकलों पर विराम लगाती है जिनमें नेपाल के किसी विशेष सुरक्षा ब्लॉक की ओर झुकाव की बात कही जाती थी।
नेपाल ने खुद को एक तटस्थ और गुटनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में विश्व मंच पर स्थापित करने का संकल्प लिया है। सरकार का तर्क है कि, हथियारों की होड़ और युद्ध किसी भी देश की शांति में बाधक होते हैं, इसलिए नेपाल अपनी कूटनीति का केंद्र केवल आर्थिक प्रगति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बनाए रखेगा।
नेपाल की सक्रियता पर जोर
विदेश नीति के इस नए प्रारूप में नेपाल के राजनयिकों और विदेशी मिशनों की कार्यप्रणाली में भी बड़े बदलावों के संकेत दिए गए हैं। अब नेपाल के राजदूतों और राजनयिक मिशनों के कार्यों का आकलन करने के लिए एक वैज्ञानिक प्रदर्शन लेखा परीक्षा शुरू की जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि, विदेश में तैनात नेपाली राजनयिकों को अब अपने परिणामों के प्रति जवाबदेह होना होगा। उन्हें यह सिद्ध करना होगा कि उनकी गतिविधियों से नेपाल को क्या आर्थिक या रणनीतिक लाभ हुआ है। यह कदम नेपाल की कूटनीति को अधिक पेशेवर और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक साहसी पहल है।
इसके अलावा, नई नीति में जलवायु परिवर्तन और हिमालय संरक्षण जैसे वैश्विक मुद्दों पर नेपाल की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। नेपाल ने यह तय किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पर्वतीय देशों और चारों ओर से जमीन से घिरे देशों के साझा हितों की आवाज बुलंद करेगा।
सागरमाथा संवाद जैसे कार्यक्रमों के जरिए नेपाल दुनिया का ध्यान हिमालयी क्षेत्र में पिघलते ग्लेशियरों और पर्यावरण संकट की ओर आकर्षित करना जारी रखेगा। साथ ही, विदेशों में काम कर रहे लाखों नेपाली श्रमिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को भी कूटनीति के केंद्र में रखा गया है। बालेन शाह की सरकार ने वादा किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ समन्वय स्थापित कर नेपाली कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा।
इसे भी पढ़ें- बालेंद्र शाह की पार्टी आरएसपी नेपाल में भारी जीत की ओर अग्रसर,समर्थकों में खुशी की लहर



