
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन कहे जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को रणक्षेत्र में बदल दिया है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के इस सबसे संवेदनशील गलियारे में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। नतीजत इधर से वैश्विक आपूर्ति में काफी मुश्किल आ रही है, जिसका असर भारतीय व्यापारिक जहाजों पर भी पड़ रहा है। इस संकट की घड़ी में भारतीय नौसेना एक बार फिर देवदूत बनकर सामने आई है और अपनी रणनीतिक कुशलता से समुद्र में एक बड़ा प्रोटेक्शन ऑपरेशन शुरू किया है।
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अदृश्य समुद्री खतरों से भी कर रहे बचाव
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वॉरशिप्स न केवल भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षा दे रहे हैं, बल्कि उन्हें अदृश्य समुद्री खतरों और अंडरवॉटर माइंस से बचाकर एक सुरक्षित नेविगेशन रूट भी उपलब्ध करा रहे हैं।

आपको बता दें कि, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का वह समुद्री मार्ग है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। वर्तमान में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने इस व्यापारिक मार्ग को बेहद जोखिम भरा बना दिया है। ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह भारत के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाला अधिकांश कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर भारत पहुंचता है।
हालिया खुफिया रिपोर्ट्स और अमेरिकी दावों के बाद स्थिति और भी भयावह हो गई है। आशंका जताई जा रही है कि, ईरान ने इस जलडमरूमध्य के पास अंडरवॉटर माइंस (समुद्री सुरंगें) बिछा रखी हैं। ये माइंस पानी के नीचे छिपी होती हैं और किसी भी बड़े जहाज के संपर्क में आते ही उसे जलसमाधि दे देती हैं। इसके अलावा, ड्रोन हमलों और समुद्री डकैती का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है।
रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि, भारतीय नौसेना ने हॉर्मुज स्ट्रेट के पूर्वी हिस्से यानी ओमान की खाड़ी में अपनी तैनाती को व्यापक रूप से बढ़ा दिया है। भारतीय नौसेना के आधुनिक युद्धपोत इस वक्त खाड़ी क्षेत्र में ‘प्रहरी’ की भूमिका निभा रहे हैं।
इस तरह से मदद कर रही नौ सेना
- नौसेना उन सभी भारतीय वाणिज्यिक जहाजों के साथ बराबर संपर्क में है, जो फारस की खाड़ी से बाहर निकल रहे हैं। जहाजों को एक-एक कर सुरक्षित घेरे में लिया जा रहा है।
- जैसे ही कोई भारतीय जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट के करीब पहुंचता है, नौसेना के वॉरशिप उसे अपनी सुरक्षा में ले लेते हैं और एस्कॉर्ट मिशन के तहत उसे आधे रास्ते तक सुरक्षित क्षेत्र में छोड़कर आते हैं।
- इस मिशन को निर्बाध रूप से चलाने के लिए नौसेना ने इलाके में पर्याप्त ईंधन और रसद की व्यवस्था भी की है, ताकि युद्धपोतों को बार-बार बंदरगाह पर न लौटना पड़े।
वैश्विक तेल बाजार में लग जाएगी आग
सामान्य परिस्थितियों में दुनिया भर की शिपिंग लाइन्स हाइड्रोग्राफिक चार्ट और सैटेलाइट सिस्टम के आधार पर चलती हैं, लेकिन जब समंदर में माइंस बिछी हों, तो ये पारंपरिक तरीके नाकाफी साबित होते हैं।
अंडरवॉटर माइंस का पता लगाना बेहद कठिन होता है। यदि कोई जहाज इन माइंस की चपेट में आ जाता है, तो न केवल जान-माल का नुकसान होगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में भी आग लग जाएगी। भारतीय नौसेना इस वक्त अपने उन्नत सोनार और निगरानी उपकरणों का उपयोग कर भारतीय जहाजों को वह सुरक्षित मार्ग बता रही है, जहां माइंस होने का खतरा न्यूनतम है। नौसेना के विशेषज्ञ लगातार डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि जहाजों को जोखिम भरे इलाकों से दूर रखा जा सके।
मार्ग बदलने कि तैयारी में शिपिंग कंपनियां
हॉर्मुज में जारी इस तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें बढ़ा दी हैं। शिपिंग बीमा कंपनियों ने इस रूट के लिए प्रीमियम दरों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अपने मार्ग बदलने पर विचार शुरू कर दिया है, लेकिन भारत जैसे देशों के लिए, जिनकी ऊर्जा निर्भरता खाड़ी देशों पर बहुत अधिक है, यह मार्ग अपरिहार्य है।

भारतीय नौसेना की इस मुस्तैदी ने भारतीय आयातकों और निर्यातकों को एक बड़ा भरोसा दिया है। रक्षा जानकारों का मानना है कि, हिंद महासागर क्षेत्र में नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में भारत की भूमिका इस मिशन से और भी मजबूत हुई है।
दुनिया को कड़ा संदेश
ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना की मौजूदगी केवल रक्षात्मक नहीं है, बल्कि यह एक कड़ा संदेश भी है कि, भारत अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। नेवी के सूत्रों का कहना है कि, वे हर स्थिति पर नजर रख रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बेड़ों को भी रवाना किया जा सकता है।
समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि, यह संकट लंबा खिंच सकता है। ऐसे में नौसेना का इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर भी अन्य देशों की नौसेनाओं के साथ जानकारी साझा कर रहा है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है, जहां एक छोटी सी चूक बड़े युद्ध को जन्म दे सकती है। ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में भारतीय नौसेना के जवान और उनके युद्धपोत भारतीय तिरंगे वाले जहाजों के लिए अभय कवच बने हुए हैं। यह न केवल भारत की सैन्य ताकत को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखने की उसकी प्रतिबद्धता को भी जगजाहिर करता है।



