वाराणसी में शुरू हुआ एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन, सीएम मोहन यादव ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में टेका

 वाराणसी। अध्यात्म और संस्कृति की नगरी काशी के लिए मंगलवार का दिन बेहद ऐतिहासिक रहा, जब गंगा के पवन तट पर देश के दो प्रमुख राज्यों की शक्ति और संभावनाओं का अद्भुत मिलन देखने को मिला। दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया।

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रखी गई गहरे रिश्ते की नींव

इस पूरी यात्रा का मुख्य केंद्र ‘एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026’ है, जो न केवल दो राज्यों के बीच प्रशासनिक और राजनीतिक तालमेल को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि उत्तर भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक दिशा को भी एक नई गति प्रदान करने वाला साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह यात्रा भक्ति, कूटनीति और विकास का एक ऐसा अनूठा मिश्रण रही जिसने आने वाले समय में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच गहरे होते रिश्तों की नींव रख दी है।

CM Mohan Yadav

वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मीडिया से संक्षिप्त बातचीत के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव सीधे बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। वहां उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया और लोक-कल्याण की मंगल कामना की। मंदिर में दर्शन के बाद मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान श्रीकाशी विश्वनाथ धाम (कॉरिडोर) की आधुनिक व्यवस्थाओं पर केंद्रित रहा।

उन्होंने कॉरिडोर के भीतर तीर्थयात्रियों के प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण की तकनीकों और अधोसंरचना के लेआउट का बारीकी से अध्ययन किया। चूंकि मध्य प्रदेश में महाकाल लोक के निर्माण के बाद अब राज्य सरकार वहां के अन्य धार्मिक स्थलों को भी वैश्विक स्तर पर विकसित करने की योजना बना रही है, इसलिए काशी विश्वनाथ मंदिर के एसओपी और वहां विकसित किए गए क्राउड फ्लो मैनेजमेंट को समझना उनके इस अध्ययन भ्रमण का प्राथमिक उद्देश्य था।

औद्योगिक क्षमताओं और नीतियों को किया साझा

मंदिर भ्रमण के पश्चात होटल रमाडा में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026 का भव्य आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की। इस मंच पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ राजनेता, औद्योगिक नीति विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी एक साथ नजर आए।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश केवल भौगोलिक पड़ोसी राज्य नहीं हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक रूप से एक ही शरीर के दो अंगों की तरह हैं जिनकी आत्मा एक ही है। इस साझा मंच के माध्यम से दोनों राज्यों ने अपनी-अपनी औद्योगिक क्षमताओं और नीतियों को एक-दूसरे के सामने रखा, ताकि भविष्य में निवेशक एक राज्य से दूसरे राज्य में बिना किसी बाधा के अपने व्यापार का विस्तार कर सकें।

सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण वहां आयोजित की गई भव्य प्रदर्शनी थी, जिसमें उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध एक जिला एक उत्पाद (ODOP) और मध्य प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। चंदेरी की मशहूर साड़ियों से लेकर बनारसी सिल्क की चमक और पारंपरिक शिल्पकला ने वहां मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा

इस आयोजन का उद्देश्य उत्पादन, बाजार और पहचान के विभिन्न आयामों पर एक सार्थक संवाद स्थापित करना था। कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और पारंपरिक वस्त्रों के क्षेत्र में दोनों राज्यों के बीच सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा की गई। यह प्रदर्शनी राज्य की आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता को एक ही मंच पर पेश करते हुए निवेशकों को सीधे तौर पर जोड़ने का एक सफल प्रयास बनकर उभरी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) का भी दौरा किया, जहां 3 अप्रैल से शुरू होने वाले बहुप्रतीक्षित विक्रमोत्सव महानाट्य की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य और उनके न्यायप्रिय शासन की गाथा पर आधारित है, जिसे मध्य प्रदेश सरकार काशी की जनता के लिए आयोजित करवा रही है।

मुख्यमंत्री ने वहां मंचन की तैयारियों का जायजा लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से यह जानकारी भी साझा की कि 3 अप्रैल को आयोजित होने वाले इस मुख्य कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह आयोजन दोनों राज्यों के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों का सबसे बड़ा प्रमाण बनेगा। सम्मेलन के अंतिम सत्र में निवेश, औद्योगिक सहयोग और ओडीओपी आधारित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित चर्चा की गई।

पर्यटन सर्किट विकसित करने पर सहमति

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि, कैसे यूपी के एक्सप्रेसवे नेटवर्क और एमपी की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर लॉजिस्टिक्स लागत को कम किया जा सकता है। साझा पर्यटन सर्किट विकसित करने पर भी सहमति बनी, जिससे विदेशी पर्यटकों को दोनों राज्यों के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए आकर्षित किया जा सके।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह काशी यात्रा केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि यह भविष्य के उन आर्थिक और सांस्कृतिक सेतुओं का निर्माण है जो आने वाले वर्षों में दोनों राज्यों के करोड़ों नागरिकों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि लेकर आएगा। काशी की इस पावन धरती से शुरू हुआ यह सहयोग का सिलसिला अब एक नए युग की शुरुआत कर रहा है।

 

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