
लखनऊ। यूपी में मानसून ने जोर पकड़ लिया है और मंगलवार सुबह से वाराणसी, चंदौली, मुरादाबाद सहित प्रदेश के करीब 30 शहरों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। वाराणसी में घाटों की सीढ़ियों से पानी झरने के रूप में बहता नजर आया। वहीं फतेहपुर और मुरादाबाद की सड़कों पर जगह-जगह पानी जमा हो गया। मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश की चेतावनी जारी की है, जिनमें से आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर में भारी बारिश की आशंका जताई गई है, जबकि बाकी 67 जिलों में गरज-चमक के साथ सामान्य बारिश की संभावना है।
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यूपी के 48 शहरों में हुई बारिश
सोमवार को भी मौसम ने करवट ली थी और प्रदेश के 48 शहरों में बारिश दर्ज की गई। इसी दौरान पीलीभीत में एक दिलचस्प घटना सामने आई, जब भारी बारिश से तालाब का जलस्तर बढ़ने के कारण एक मगरमच्छ पानी से निकलकर पास के गांव में घुस आया। ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए उसे चारों ओर से घेरकर रस्सियों से बांध दिया और वन विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ को पकड़कर वापस नदी में छोड़ दिया।

सोमवार शाम सहारनपुर में भी हड़कंप मच गया, जब सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी मंदिर परिसर से होकर बहने वाली शाकंभरी खोल (नदी) में अचानक तेज बहाव आ गया। इससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी फैल गई। पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को सचेत किया और उन्हें सुरक्षित स्थानों की ओर भेजा। साथ ही एहतियातन मंदिर मार्ग पर आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई। कुछ ही देर में जलस्तर सामान्य होने पर हालात नियंत्रण में आ गए। प्रशासन ने आमजन से बरसात के दिनों में नदी-नालों के आसपास न जाने की अपील दोहराई है।
रेलवे स्टेशन पर टपकने लगा पानी
बारिश के चलते बनारस रेलवे स्टेशन पर भी परेशानी की स्थिति देखने को मिली। यहां प्लेटफॉर्म नंबर आठ पर छत के पंखों के पास से पानी टपकता एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद रेलवे की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे। जांच में सामने आया कि, रेन वाटर पाइप में मांझा और पेड़ों के पत्ते फंसने से पानी की निकासी बाधित हो गई थी, जिसे कुछ समय बाद सही कर दिया गया।
बीते चौबीस घंटों में सबसे अधिक बारिश औरैया जिले में दर्ज की गई, जहां 35.9 मिलीमीटर पानी बरसा। यह वहां के सामान्य औसत 7.5 मिमी से करीब 379 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, पूरे प्रदेश की बात करें, तो औसतन 5.7 मिमी बारिश ही हुई, जो सामान्य स्तर 8.9 मिमी से करीब 36 प्रतिशत कम है। इस बदलाव के पीछे मौसम विभाग उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में बने दबाव क्षेत्र को जिम्मेदार बता रहा है, जो उत्तरी ओडिशा तट को पार कर अब दक्षिणी झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ के आसपास सक्रिय है। इसी सिस्टम के असर से यूपी में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं।
गर्मी से मिली राहत
प्रदेश के कई जिलों से स्थानीय स्तर पर मौसम बदलाव की खबरें आईं। चित्रकूट में झमाझम बारिश के बाद उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली और तापमान में गिरावट दर्ज हुई। हालांकि कई इलाकों की सड़कों पर पानी भर गया। फतेहपुर में सुबह सात बजे से शुरू हुई रुक-रुक कर बारिश के कारण पुरवा गांव की ओर जाने वाले रास्ते पर करीब दो फीट पानी जमा हो गया और तापमान में छह डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई। कौशांबी में तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हुई, जिससे तापमान पांच डिग्री तक गिर गया और शाम तक फिर बारिश होने की संभावना जताई गई है।

अमेठी में मंगलवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में घने काले बादल छा गए जिससे दिन में ही अंधेरा जैसा माहौल बन गया। तेज हवाओं के साथ रुक-रुक कर हल्की बूंदाबांदी भी हुई, जिससे तापमान में दस डिग्री सेल्सियस से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। 22 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी।
इसी तरह चंदौली में डेढ़ घंटे से लगातार बारिश जारी रही, जिससे कई सड़कों पर जलभराव हो गया और दस से पंद्रह किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलती रहीं। वाराणसी में सुबह के समय बादल छाए रहे और हल्की बूंदाबांदी होती रही, हवा की रफ्तार अठारह किलोमीटर प्रति घंटे रही जबकि तापमान उनतीस डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून सबसे पहले केरल के तट से भारत में दाखिल होता है और फिर दो हिस्सों में बंट जाता है। एक शाखा अरब सागर के रास्ते केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान की ओर बढ़ती है, जबकि दूसरी शाखा बंगाल की खाड़ी से होते हुए पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की तरफ आगे बढ़ती है। इसी दूसरी शाखा के जरिए मानसून पूर्वांचल के रास्ते यूपी में दाखिल हुआ है।

आगे की स्थिति को लेकर मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान चिंताजनक है। वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल सिंह के मुताबिक, इस बार पूरे देश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। आमतौर पर जून से सितंबर के बीच प्रदेश में करीब 820 से 840 मिलीमीटर बारिश दर्ज होती है, लेकिन इस साल इसमें करीब आठ प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है, यानी कुल बारिश घटकर 754 से 773 मिलीमीटर के आसपास रह सकती है। इसके उलट पिछले साल यानी 2025 के मानसून सीजन में प्रदेश में औसतन 870 से 900 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य औसत से दस से पंद्रह प्रतिशत अधिक थी।
यूपी में तेज हुईं मानसूनी गतिविधियां
मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्रा ने इस कमी की वजह बताते हुए कहा कि प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां अब खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ रही हैं, जिसके चलते वर्षा में कमी आने की आशंका है। इसके अलावा इस साल जनवरी से मार्च के बीच उत्तरी गोलार्ध में बर्फ की मात्रा भी कम रही, जो मानसून के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। कुल मिलाकर इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कुछ कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं, भले ही फिलहाल यूपी में बारिश की गतिविधियां तेज दिख रही हों।
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