जी7 समिट में होगी मोदी-ट्रंप की मुलाकात, फ्रांस में तय होगी भारत-अमेरिका संबधों का भविष्य

नई दिल्ली।  दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत और अमेरिका के शीर्ष नेता पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही मिलने वाले हैं। ये दोनों नेता अगले महीने फ़्रांस में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिल सकते हैं। अगर दोनों नेताओं की ये मुलाकात होती है, तो करीब डेढ़ साल के बाद वे एक ही मेज पर बैठकर वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर गहन चर्चा करेंगे।

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ऐसे समय में जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़, चीन की बढ़ती आक्रामकता और बदलते व्यापारिक समीकरणों से जूझ रही है, यह संभावित मुलाकात महज एक औपचारिक मेलजोल नहीं होगी, बल्कि यह आने वाले वर्षों के लिए भारत-अमेरिका संबंधों की नई दिशा तय कर सकती है।

 15 से 17 जून के बीच होगा जी7 समिट

फ्रांस में 15 से 17 जून के बीच जी7 शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। फ्रांसीसी सरकार ने आधिकारिक रूप से पुष्टि कर दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वहीं अमेरिकी मीडिया संस्थान Axios की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस बैठक में शामिल होंगे। इसी के साथ यह अटकलें तेज हो गई हैं कि, सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच अलग से द्विपक्षीय वार्ता भी हो सकती है।

Modi Trump meeting

जी7 यानी दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का यह मंच हमेशा से वैश्विक नीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाता रहा है। इस बार भारत भी एक महत्वपूर्ण अतिथि देश के रूप में इस मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा, जिससे वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और भी रेखांकित होगी।

 AI, व्यापार और चीन पर फोकस

सूत्रों और अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप इस जी7 बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक व्यापार, अपराध नियंत्रण और चीन पर निर्भरता कम करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहते हैं। अमेरिकी प्रशासन की मंशा है कि, अमेरिकी तकनीक आधारित एआई टूल्स को दुनिया भर में बढ़ावा दिया जाए और क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन में चीन की मजबूत पकड़ को कमजोर किया जाए।

यह वह मुद्दा है जहां भारत और अमेरिका के हित स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे से मेल खाते हैं। भारत भी तकनीक और सप्लाई चेन के क्षेत्र में खुद को एक बड़े वैश्विक विकल्प के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। चीन पर से दुनिया की निर्भरता कम करने की जो वैश्विक कोशिश है, उसमें भारत को एक स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में फ्रांस में होने वाली संभावित मोदी-ट्रंप बैठक में इन विषयों पर ठोस बातचीत होने की पूरी संभावना है।

जयशंकर पहले ही कर चुके हैं जमीन तैयार

प्रधानमंत्री मोदी के फ्रांस दौरे को लेकर कूटनीतिक स्तर पर तैयारियां पहले से ही शुरू हो चुकी हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कुछ दिन पहले फ्रांस की यात्रा के दौरान वहां के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरोट से मुलाकात की। इस बैठक में जी7 सम्मेलन के एजेंडे और उसमें भारत की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। यह इस बात का संकेत है कि, भारत इस सम्मेलन को महज एक औपचारिक उपस्थिति के रूप में नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है।

फरवरी में हो चुकी है चार घंटे की ऐतिहासिक बैठक

मोदी और ट्रंप की पिछली आमने-सामने मुलाकात फरवरी 2025 में वॉशिंगटन डीसी में हुई थी। यह बैठक कई मायनों में ऐतिहासिक रही। प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर गए थे और व्हाइट हाउस में दोनों नेताओं के बीच करीब चार घंटे तक मैराथन बातचीत हुई थी।

उस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार समझौते और रणनीतिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई थी। बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया था, जिसमें भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई थी। अब फ्रांस में होने वाली संभावित मुलाकात उसी कड़ी को आगे बढ़ाने का काम करेगी।

  क्या होगा एजेंडा

राजनीतिक और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर फ्रांस में मोदी और ट्रंप के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक होती है तो उसमें कई अहम मुद्दे केंद्र में रह सकते हैं। व्यापार और टैरिफ को लेकर दोनों देशों के बीच जो बातचीत पिछले कुछ समय से चल रही है, उसे एक नई दिशा मिल सकती है। इसके अलावा रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी, इंडो-पैसिफिक रणनीति और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे भी चर्चा में प्रमुख स्थान पा सकते हैं।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जी7 जैसे बहुपक्षीय मंच पर द्विपक्षीय बैठक का अपना एक अलग महत्व होता है। यहां दुनिया के अन्य प्रमुख नेता भी मौजूद होते हैं, जिससे भारत-अमेरिका के बीच किसी भी सहमति या घोषणा का वैश्विक संदर्भ और भी व्यापक हो जाता है।

बदलती दुनिया में भारत-अमेरिका की नई साझेदारी

एक तरफ जहां दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर चीन को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रणनीति भी तेजी से बदल रही है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की संभावनाएं पहले से कहीं अधिक विस्तृत और गहरी होती जा रही हैं।

जी7 सम्मेलन इस लिहाज से बेहद निर्णायक माना जा रहा है क्योंकि यहां दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता मिलकर वैश्विक चुनौतियों पर साझा रणनीति बनाएंगे और अगर इस दौरान मोदी और ट्रंप की अलग से बैठक होती है, तो यह सिर्फ दो नेताओं की मुलाकात नहीं होगी, यह दो देशों के बीच एक नए और मजबूत भविष्य की नींव रखने का क्षण होगा।

 

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