मिशन 2027: यूपी की आधी आबादी को साधने की तैयारी में भाजपा, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ होगा मास्टरस्ट्रोक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सियासी बिसात अब तेजी से बिछने लगी है।  2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत के लिए सभी राजनीति दल मैदान में कूद पड़े हैं। सपा जहां पीडीए फार्मूले का रास्ता अख्तियार कर सत्ता की चाबी हथियाना चाहती है। वहीं भाजपा ने भी कमर कस ली है और अपनी बिसात बिछाने में जुट गई है।

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बूथ स्तर पर तैयारी तेज

विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कराने के लिए भाजपा अब अपने सबसे धारदार और विश्वसनीय हथियार यानी संगठन को मजबूत करने में जुट गई है। इस बार पार्टी का ध्यान केवल बड़ी रैलियों, हवाई वादों या मंचों से दिए जाने वाले भाषणों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि संगठन की उस सबसे छोटी यानी बूथ लेबल को शंक्ति केंद्र मानकर काम कर रही हैं। आपको बता दें कि, राजनीति की रीढ़ बूथ लेबल के कार्यकर्ता ही माने जाते है। भाजपा  का स्पष्ट संदेश है कि, अब केवल कागजी घोड़े दौड़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर पदाधिकारी को जमीन पर अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी।

पार्टी के रणनीतिकारों ने यह निर्णय लिया है कि, अब कागजों पर बनी कमेटियों की जमीनी हकीकत परखी जाएगी। इसके साथ ही, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण बिल को भाजपा ने अपना सबसे बड़ा और अचूक चुनावी मास्टरस्ट्रोक बनाने की पूरी तैयारी कर ली है। 16 से 18 अप्रैल तक बुलाए गए संसद के विशेष सत्र और उसके बाद उत्तर प्रदेश के गांव-गांव तक महिला वोटरों को साधने का एक ऐसा महा-अभियान शुरू होने जा रहा है, जो विपक्षी दलों के जातिगत समीकरणों को ध्वस्त करने का माद्दा रखता है। इस पूरी कवायद का केंद्र लखनऊ है, लेकिन इसकी डोर दिल्ली से संचालित हो रही है, जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश के दिग्गजों के बीच मैराथन बैठकों का दौर जारी है।

मैदान में उतारे जा रहे प्रवासी पदाधिकारी

भाजपा के सांगठनिक ढांचे की मजबूती हमेशा से उसकी जीत का आधार रही है, लेकिन समय के साथ आए ठहराव को दूर करने के लिए अब ‘प्रवासी पदाधिकारियों’ को मैदान में उतारा जा रहा है। अक्टूबर 2024 में शुरू हुई संगठन चुनाव की लंबी प्रक्रिया के बाद अब करीब डेढ़ साल का वक्त बीत चुका है।

सदस्यता अभियान से लेकर जिला कमेटियों के गठन तक का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन प्रदेश नेतृत्व अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि, यह विशाल ढांचा केवल चुनाव के समय जागने वाला तंत्र न बनकर एक जीवंत इकाई के रूप में कार्य करे। जिला और मंडल स्तर के ये प्रवासी पदाधिकारी सीधे बूथों और शक्ति केंद्रों तक पहुंचेंगे और वहां जाकर एक-एक कार्यकर्ता की सक्रियता का ऑडिट करेंगे। इनका काम केवल औपचारिक मुलाकातें करना नहीं है, बल्कि यह जानना है कि डेढ़ साल पहले जो कमेटियां बनी थीं, वे आज कहां खड़ी हैं।

इन प्रवासियों की पड़ताल काफी व्यापक होने वाली है। वे क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों, स्थानीय प्रभावशाली लोगों और आम जनता के बीच जाकर यह फीडबैक जुटाएंगे कि, भाजपा का स्थानीय चेहरा यानी बूथ अध्यक्ष या शक्ति केंद्र संयोजक जनता के बीच कितना लोकप्रिय और सक्रिय है। अगर कोई पदाधिकारी केवल पद लेकर बैठा है और क्षेत्र में उसकी सक्रियता शून्य है या वह अब उस इलाके में नहीं रहता, तो ऐसे लोगों का पूरा ब्योरा तैयार किया जाएगा।

आधी आबादी की होगी निर्णायक भूमिका

भाजपा नेतृत्व का मानना है कि, विधानसभा चुनाव की असली लड़ाई तो बूथों के भीतर लड़ी जाती है और अगर वहां का सिपाही ही कमजोर होगा तो युद्ध जीतना नामुमकिन है, इसलिए 2027 के महाकुंभ से पहले पार्टी अपने इस निचले स्तर के संगठन की मेजर सर्जरी करने के मूड में है ताकि चुनाव तक एक ऊर्जावान और समर्पित टीम मैदान में तैनात रहे।

वहीं, दूसरी ओर, 2027 के चुनावों में आधी आबादी का वोट बैंक एक निर्णायक भूमिका निभाने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर भाजपा ने उत्तर प्रदेश की एक-एक महिला तक पहुंचने का जो खाका खींचा है, वह बेहद महत्वाकांक्षी है। दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल की हुई बैठक में इस बात पर मुहर लगा दी गई है कि आगामी कुछ महीनों तक पार्टी का पूरा फोकस महिला सशक्तिकरण और आरक्षण बिल के प्रचार-प्रसार पर रहेगा।

इस अभियान को ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ का नाम दिया गया है, जिसके तहत भाजपा की महिला मोर्चा और मुख्य संगठन की टीमें बूथ स्तर तक जाकर महिलाओं को यह समझाएंगी कि कैसे यह बिल उनके भविष्य और राजनीति में उनकी भागीदारी को बदलने वाला है। इस अभियान के पहले चरण में जिला स्तर पर प्रबुद्ध महिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इनमें मंच से लेकर पांडाल तक केवल महिलाओं का ही दबदबा होगा।

तेज हुई हलचल

डॉक्टर, वकील, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी महिलाओं को वक्ता के तौर पर आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे समाज के विभिन्न वर्गों को इस ऐतिहासिक बदलाव से जोड़ सकें। इसके बाद इस कार्यक्रम को मंडल और फिर बूथ स्तर की नुक्कड़ सभाओं तक ले जाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में चुनाव होने के कारण यहां इस अभियान की अहमियत को दोगुना माना जा रहा है। भाजपा का लक्ष्य एक ऐसा साइलेंट वोट बैंक तैयार करना है जो जाति, धर्म और संप्रदाय की सीमाओं को तोड़कर केवल विकास और सम्मान के नाम पर पार्टी के साथ मजबूती से खड़ा हो।

राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भाजपा के गलियारों में इस समय हलचल तेज है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दिल्ली में रहकर राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में हैं और आगामी अभियानों की सूक्ष्म रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। वहीं, महामंत्री संगठन धर्मपाल जमीन पर इन योजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए जिला और मंडल इकाइयों को निर्देशित कर रहे हैं।

हर कार्यकर्ता को दी जा रही ट्रेनिग

भाजपा के भीतर यह साफ हो चुका है कि, विपक्षी गठबंधन जिस तरह से नई रणनीतियों और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों के साथ घेराबंदी कर रहा है, उसका जवाब केवल एक अभेद्य संगठन और महिलाओं जैसे बड़े भावनात्मक एवं ठोस मुद्दे से ही दिया जा सकता है। पार्टी चाहती है कि जब चुनाव का बिगुल बजे, तब तक भाजपा का हर बूथ कार्यकर्ता पूरी तरह से प्रशिक्षित और चार्ज हो चुका हो।

भाजपा की यह पूरी कवायद यह दर्शाती है कि, वह चुनाव आने का इंतजार नहीं करती, बल्कि चुनावों के बीच के समय को अपनी तैयारी में निवेश करती है। मिशन 2027 की सफलता इस बात पर टिकी होगी कि प्रवासी पदाधिकारी अपनी रिपोर्ट में कितनी सच्चाई बरतते हैं और क्या वाकई निष्क्रिय लोगों को हटाकर जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को जगह दी जाती है।

महिला आरक्षण बिल का कार्ड उत्तर प्रदेश की ग्रामीण और शहरी महिलाओं के बीच कितना प्रभावी होता है, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन फिलहाल भाजपा ने अपनी तैयारियों से यह साफ कर दिया है कि वह यूपी के सिंहासन को दोबारा हासिल करने के लिए किसी भी स्तर की मेहनत से पीछे नहीं हटने वाली।

 

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