48 घंटे में बढ़े दूध, CNG और पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई की मार से टूटी कमर

 नई दिल्ली। भारतीय मध्यम वर्ग और गरीब तबके की रसोई पर महंगाई की मार एक बार फिर से पड़ने लगी है। पिछले 48 घंटों के अंदर ही देश की जनता को एक के बाद एक तीन ऐसे बड़े झटके लगे हैं, जिन्होंने घर का पूरा बजट बिगाड़ दिया है। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं का सीधा असर अब भारत के आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है।

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97 रुपये के पार पहुंचे पेट्रोल

पहले दूध की कीमतों में इजाफा, फिर सीएनजी के दामों में बढ़ोतरी और अब शुक्रवार सुबह पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुए भारी उछाल ने जनता  को परेशान कर दिया है। यह महज आंकड़े नहीं है, बल्कि आम इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी पर किया गया एक ऐसा प्रहार है जो उसे पूरी तरह से तोड़ रहा है।

Petrol Diesel

शुक्रवार की सुबह देशवासियों के लिए एक गहरा सदमा लेकर आई है, क्योंकि तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये से अधिक की भारी बढ़ोतरी कर दी है। ताजा अपडेट के अनुसार, देशभर में पेट्रोल के दाम में 3.14 रुपये प्रति लीटर का इजाफा देखा गया है, जिसके बाद इसकी औसत कीमत 97.77 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, डीजल की कीमतों में भी 3.11 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है, जिससे यह 90.67 रुपये प्रति लीटर के स्तर को छू गया।

बढ़ सकते हैं फल और सब्जियों के दाम

अगर विस्तृत कीमतों पर गौर करें, तो नियमित पेट्रोल जो कल तक करीब 94.77 रुपये था, वह अब उछलकर 97.91 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। प्रीमियम पेट्रोल इस्तेमाल करने वालों के लिए तो स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां कीमतें 105.14 रुपये से लेकर 107.14 रुपये प्रति लीटर के बीच पहुंच चुकी हैं।

डीजल, जो माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन की रीढ़ माना जाता है, उसकी कीमतों में 87.67 रुपये से 90.78 रुपये तक की छलांग ने महंगाई की नई इबारत लिख दी है। यह बढ़ोतरी केवल गाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में सब्जी, फल और राशन की कीमतों में आग लगना तय माना जा रहा है।

CNG

महंगाई के इस तांडव की शुरुआत बुधवार से हुई, जब देश की दिग्गज दूध कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की घोषणा की। कंपनियों ने चारे की बढ़ती लागत और ट्रांसपोर्टेशन खर्च का हवाला देते हुए इस बोझ को उपभोक्ताओं के कंधों पर डाल दिया।

ऑटो टैक्सी और बस का किराया भी बढ़ेगा

दूध हर भारतीय परिवार की बुनियादी जरूरत है और इसकी कीमत बढ़ने का मतलब है कि, अब चाय, दही, घी, पनीर और बच्चों के पोषण पर खर्च बढ़ना तय है, लेकिन राहत मिलने के बजाय, गुरुवार को दूसरा झटका मुंबई से आया जहां एमजीएल ने सीएनजी के दामों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी। देखते ही देखते शुक्रवार तक सीएनजी की यह बढ़ी हुई कीमतें पूरे देश में लागू हो गईं, जिससे अब सीएनजी 84 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है।

सीएनजी की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर ऑटो-टैक्सी चालकों और उन निजी वाहन स्वामियों पर पड़ेगा जिन्होंने बढ़ते पेट्रोल के खर्च से बचने के लिए सीएनजी का रुख किया था। अब परिवहन के इन साधनों का कराया बढ़ना निश्चित है, जिससे ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों और छात्रों की जेब पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, लेकिन सबसे तगड़ा और तीसरा झटका पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने दिया है, जिसने महंगाई की इस प्रक्रिया को पूर्ण चक्र में बदल दिया है।

जानकारों और सरकारी सूत्रों की मानें तो इस अचानक आई महंगाई के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है।

होर्मुज संकट से बाधित हुई सप्लाई चेन

युद्ध के कारण इस मार्ग से होने वाली सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है, जिससे कच्चे तेल की लागत में भारी उछाल आया है। तेल कंपनियां इस वैश्विक अस्थिरता के कारण भारी घाटे में चल रही थीं और अंततः उन्होंने इसका बोझ जनता पर डालने का फैसला किया।

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खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले दिनों जनता से ईंधन बचाने की अपील की थी और प्रतीकात्मक तौर पर अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम की थी, जो इस बात का संकेत था कि, सरकार को इस संकट का आभास पहले से था, लेकिन सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय दबाव इतना अधिक रहा कि घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखना असंभव हो गया।

तनाव कम होने के आसार नहीं

आम जनता के मन में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि, क्या यह महंगाई यहीं थमेगी? इसका जवाब फिलहाल नकारात्मक ही नजर आता है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट अगर लंबा खिंचा, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और अधिक बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसके अलावा, ईंधन की कीमतों में वृद्धि का एक डोमिनो इफेक्ट होता है। जब डीजल महंगा होता है, तो ट्रकों का किराया बढ़ता है, जिससे खेतों से मंडी तक आने वाली सब्जियां और अनाज महंगे हो जाते हैं।

मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोग, जिनकी आय स्थिर है लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, उनके लिए स्थिति अब असहनीय होती जा रही है। रसोई के बजट से लेकर ऑफिस जाने के खर्च तक, हर जगह कटौती करना अब उनकी मजबूरी बन जाएगी। बाजार में अब इस बात की भी सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या अगला नंबर एलपीजी (LPG) सिलेंडर का है? अगर रसोई गैस की कीमतों में भी बदलाव होता है, तो यह आम आदमी के लिए ‘करेला और नीम चढ़ा’ वाली स्थिति होगी।

 

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