PM मोदी की इंडोनेशिया यात्रा में बड़ा रक्षा समझौता, इन हथियारों पर बनी बात

नई दिल्ली। भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला एक महत्वपूर्ण समझौता मंगलवार, 7 जुलाई को हुआ। दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को लेकर किये गये करार पर हस्ताक्षर किए। ये डील रणनीतिक और आर्थिक, दोनों नजरिए से बेहद अहम मानी जा रही है। इस समझौते से जहां एक ओर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के इस महत्वपूर्ण देश के बीच सामरिक संबंध और गहरे होंगे, वहीं दूसरी ओर भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन इकाइयों को भी नया बल मिलेगा। यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब भारत लगातार अपनी रक्षा उत्पादन क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में प्रयासरत है।

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अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने की योजना

इस करार के साथ ही यह भी सामने आया है कि, इंडोनेशिया भारत में निर्मित ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने की योजना भी बना रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ द्वारा विकसित यह मिसाइल एक ‘बियॉन्ड-विजुअल-रेंज’ यानी दृश्य सीमा से परे मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है।

India to supply BrahMos cruise missile system to Indonesia

इसकी खास बात यह है कि, यह तेजी से दिशा बदलने वाले शत्रु विमानों को भी सटीकता से ट्रैक कर उन्हें भेदने में सक्षम है, जिससे यह हवाई युद्ध की परिस्थितियों में एक बेहद कारगर हथियार साबित होती है। ऐसी मिसाइलों का महत्व आधुनिक वायुसेनाओं के लिए इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आज के हवाई मुकाबलों में दुश्मन के विमान पहले से कहीं अधिक तेज गति और चपलता से पैंतरे बदलते हैं। ऐसी स्थिति में परंपरागत मिसाइलें अक्सर नाकाम साबित होती हैं।

कई मायनों में खास है पीएम का दौरा

रिपोर्टों के अनुसार, भारत की ओर से इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां भी उपलब्ध कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह पूरा घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान सामने आया, जो उनके तीन देशों के व्यापक दौरे का पहला पड़ाव है।

यह दौरा कई मायनों में खास है क्योंकि वर्ष 2023 के बाद यह प्रधानमंत्री मोदी की इस दक्षिण-पूर्व एशियाई देश की पहली यात्रा है, जो दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को कितनी प्राथमिकता दे रहा है।

अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, दोनों देशों के बीच बढ़ता आपसी विश्वास रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग के क्षेत्रों को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि, इस यात्रा के दौरान रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर सहमति बनी है। यह बयान इस बात का संकेत देता है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच का सहयोग केवल हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आपसी क्षमता निर्माण और संकट प्रबंधन जैसे व्यापक पहलू भी शामिल हैं।

कई देशों को पसंद है ब्रह्मोस

ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि, इसे जमीन, समुद्र और कुछ खास परिस्थितियों में हवाई प्लेटफॉर्म से भी दागा जा सकता है, जिससे यह एक बहुआयामी और लचीला हथियार प्रणाली बन जाती है। इसकी अत्यधिक सटीक मारक क्षमता और तेज गति ने दुनिया भर के कई देशों को इसकी ओर आकर्षित किया है और यही वजह है कि, पिछले कुछ वर्षों में कई देशों ने इस मिसाइल में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।

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यह घोषणा ऐसे नाजुक समय में सामने आई है जब प्रधानमंत्री मोदी स्वयं इंडोनेशिया के दौरे पर मौजूद हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा, द्विपक्षीय व्यापार और व्यापक रणनीतिक साझेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विस्तृत बातचीत हो रही है। समुद्री सुरक्षा का मुद्दा दोनों देशों के लिए खासतौर पर अहम है क्योंकि भारत और इंडोनेशिया, दोनों ही हिंद महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और दोनों देश इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने को लेकर गंभीर हैं।

भारतीय तकनीकी पर बढ़ा भरोसा

ब्रह्मोस और अस्त्र, दोनों ही मिसाइल प्रणालियों की संभावित आपूर्ति से भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा संबंध और अधिक प्रगाढ़ होने की उम्मीद है। यह घटनाक्रम केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समग्र रक्षा उत्पादन क्षमता और वैश्विक रक्षा बाजार में उसकी बढ़ती उपस्थिति को भी उजागर करता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। इसी क्रम में अब वह अपने स्वदेशी रक्षा उत्पादों के निर्यात को भी लगातार बढ़ावा दे रहा है।

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मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के तहत भारत ने अपने रक्षा उद्योग को न केवल घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भी विकसित किया है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस, जो भारत और रूस का एक संयुक्त उद्यम है, इस दिशा में एक अग्रणी उदाहरण है। इससे पहले भी फिलीपींस जैसे देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली में रुचि दिखाई है और खरीद समझौते किए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि, भारत की यह मिसाइल तकनीक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विश्वसनीयता स्थापित कर चुकी है।

रक्षा ढांचे पर असर डालेगी ये डील

इंडोनेशिया के साथ यह संभावित समझौता उसी व्यापक रणनीति का एक हिस्सा प्रतीत होता है, जिसके तहत भारत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ अपने रक्षा और सामरिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। यह क्षेत्र न केवल भू-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि व्यापारिक और सामुद्रिक मार्गों की सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता यह रक्षा सहयोग आने वाले समय में क्षेत्रीय संतुलन और सुरक्षा ढांचे पर भी असर डाल सकता है।

 

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