लखनऊ में अजब खेल, बेटे से एक साल छोटी निकली मां, सिस्टम की गलती का खामियाजा भुगत रहा परिवार

लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ से एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जो सरकारी कामों ने होने वाली लापरवाही को बखूबी बयां कर रहा है। दरअसल, सरकारी दस्तावेजों की एक बड़ी लापरवाही ने प्रकृति के नियमों को ही चुनौती दे डाली है।  यहां बंथरा इलाके में बने एक आधार कार्ड में मां की उम्र उसके अपने सगे बेटे से एक साल कम दर्ज की गई है। यानी कागजों की दुनिया में मां अपने बेटे से एक साल छोटी है।

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मुश्किल में परिवार 

यह सुनने में तो काफी हल्का और हास्यपद लग रहा है, लेकिन पीड़ित परिवार को काफी मुश्किल आ रही है, जिससे वे मानसिक तौर पर बेहद परेशान हैं। परिवार पिछले दो वर्षों से महिला का आधार कार्ड सही करने के लिए सरकारी दफ्तरों की खाक छान रहा है, लेकिन सिस्टम की फाइलें और अधिकारियों की बेबसी इस विसंगति को दूर करने में नाकाम साबित हो रही है। हर तरफ से हार मान चुके बेटे ने अब न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।

राजधानी के बंथरा हरौनी की रहने वाली नीता की रियल उम्र लगभग 60 वर्ष है। चेहरे की झुर्रियां और सफेद बाल उनकी उम्र को बखूबी बयां कर रहे हैं,  लेकिन भारत सरकार का सबसे अहम दस्तावेज आधार कार्ड कुछ और ही कहानी कह रहा है। बताया जा रहा है कि, नीता के आधार कार्ड में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1995 दर्ज कर दी गई है।

तकनीकी त्रुटि

वहीं, उनके बेटे शैलेंद्र के दस्तावेजों में उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1996 अंकित है। इस तकनीकी त्रुटि का परिणाम यह हुआ कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार मां नीता अपने ही बेटे शैलेंद्र से एक साल छोटी हैं। इस बड़ी गलती की वजह से नीता न तो किसी सरकारी योजना का लाभ ले पा रही हैं और न ही अपनी उम्र से जुड़े अन्य लाभ उठा पा रही हैं।

नीता के बेटे शैलेंद्र का कहना है कि, वे इस गलती को सुधारने के लिए पिछले दो साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने सबसे पहले आधार कार्ड केंद्र पर जाकर सुधार के लिए आवेदन किया। उन्हें लगा कि यह एक छोटी सी टाइपिंग मिस्टेक है जो आसानी से सुधर जाएगी, लेकिन मामला तब पेचीदा हो गया जब आधार केंद्र ने उनके आवेदन को बार-बार निरस्त करना शुरू कर दिया। आधार अधिकारियों का तर्क है कि, उम्र में इतना बड़ा अंतर बिना किसी ठोस मेडिकल सर्टिफिकेट या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना नहीं बदला जा सकता।

सीएमओ ऑफिस पहुंचा परिवार

जब आधार केंद्र से बात नहीं बनी, तो पीड़ित परिवार सीएमओ कार्यालय पहुंचा। शुक्रवार को शैलेंद्र अपनी मां नीता को लेकर लखनऊ सीएमओ दफ्तर पहुंचे। उन्होंने वहां अधिकारियों को अपनी समस्या बताई और अनुरोध किया कि, मां का मेडिकल परीक्षण करवाया जाए ताकि उनकी वास्तविक उम्र का वैज्ञानिक निर्धारण हो सके उनके आधार कार्ड में उम्र को लेकर की गई गलती को सुधारा जा सके।

सीएमओ कार्यालय पहुंचे शैलेंद्र ने वहां अपनी मां का परिवार रजिस्टर भी दिखाया। इस रजिस्टर में नीता की उम्र स्पष्ट रूप से 60 वर्ष दर्ज है। परिवार रजिस्टर एक वैध सरकारी दस्तावेज है, लेकिन आधार डेटाबेस के सामने यह भी बौना साबित हो रहा है।

सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने इस मामले में अपनी असमर्थता जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास फिलहाल ऐसा कोई सीधा आदेश या प्रावधान नहीं है, जिसके तहत किसी व्यक्ति की निजी अर्जी पर उसकी आयु निर्धारण की जांच की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयु निर्धारण के लिए मेडिकल बोर्ड तभी गठित किया जाता है जब किसी अन्य सरकारी विभाग जैसे पुलिस, कोर्ट या आधार विभाग से इसके लिए आधिकारिक पत्र प्राप्त होता है।

नियमों से पल्ला झाड़ रहे अधिकारी

सिस्टम के द्वारा की गई इस गलती अब खुद सिस्टम भी नहीं सुधार पा रहा है।  ऐसे में शैलेंद्र अब कानूनी लड़ाई के लिए कोर्ट जानें की तैयारी कर रहे हैं। शैलेंद्र का कहना है कि, यह केवल एक दस्तावेज की गलती नहीं है, बल्कि उनकी मां के अस्तित्व और सच्चाई का अपमान है। उन्होंने दुखी होकर कहा, अधिकारी संवेदनशीलता दिखाने के बजाय नियमों का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

इस बारे में मीडिया से बात करते हुए शैलेंद्र ने कहा, हम पिछले दो साल से इस विभाग से उस विभाग, उस विभाग से इस विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या हल नहीं हो रही हैं। उन्होंने कहा, मां बुजुर्ग हैं, उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होती है, फिर भी हम उन्हें लेकर दफ्तरों के चक्कर काटते हैं, लेकिन जब सरकारी अधिकारी परिवार रजिस्टर जैसे दस्तावेज को भी मानने को तैयार नहीं हैं, तो हमारे पास कोर्ट जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हम अदालत से गुहार लगाएंगे कि, मां की सही उम्र का निर्धारण करने के लिए आदेश जारी किया जाए।

 

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